नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम राहुल है। मैं दिल्ली में रहता हूँ, एक छोटे से फ्लैट में। उम्र मेरी 28 साल की है और मैं एक प्राइवेट कंपनी में जॉब करता हूँ। ये कहानी मेरी असली जिंदगी की है, जब मेरी पड़ोसन अक्षरा के साथ कुछ ऐसा हुआ कि आज भी याद करके लंड खड़ा हो जाता है। अक्षरा मेरी उम्र की ही लड़की है, 26 साल की, बहुत ही सुंदर और सेक्सी। उसकी चोली में भरे हुए 36 इंच के स्तन, पतली कमर, गोल-गोल 38 इंच की गांड, और वो चाल जब चलती है तो लगता है जैसे पूरी दुनिया को ललचा रही हो। वो मेरे बगल वाले फ्लैट में रहती है और अक्सर शाम को टेरेस पर आती रहती थी।
एक शाम की बात है। बारिश हो रही थी और अक्षरा पार्टी से लौट रही थी। वो थोड़ी dizzy लग रही थी, शायद ड्रिंक ज्यादा हो गई थी। उसने मुझे टेरेस पर देखा और मुस्कुराते हुए बोली, “राहुल, सर दर्द हो रहा है, सिर चक्कर खा रहा है।” मैंने उसे मदद की और उसके फ्लैट तक छोड़ने लगा। अक्षरा is dizzy थी, पैर लड़खड़ा रहे थे। मैंने उसे पकड़ लिया, उसका शरीर मेरे से सटा हुआ था। उसकी सांसों में शराब की महक थी और उसकी छाती मेरी छाती से रगड़ खा रही थी।
फ्लैट में घुसते ही अक्षरा सोफे पर गिर पड़ी। उसकी स्कर्ट ऊपर चढ़ गई थी, जांघें खुली हुई। मैंने पानी पिलाया और पूछा, “अक्षरा, ठीक हो?” वो मुस्कुराई और बोली, “राहुल, आज कुछ अलग सा लग रहा है। शरीर में आग लग रही है।” मैं उसके पास बैठ गया। उसने मेरी तरफ देखा, आँखें चमक रही थीं। अचानक उसने मेरा हाथ पकड़ लिया और अपनी छाती पर रख दिया। “देखो, कितना तेज धड़क रहा है।” उसकी गांड का उभार, वो गोल स्तन जो टीशर्ट के अंदर से साफ दिख रहे थे, सब कुछ मुझे पागल कर रहा था।
मैंने हिम्मत करके उसके होंठों पर अपना मुंह लगा दिया। अक्षरा ने कोई रोक-टोक नहीं की। हम चूमने लगे, जीभें आपस में उलझ गईं। उसकी सांसें तेज हो गईं। मैंने उसके टीशर्ट को ऊपर खींचा और ब्रा खोल दी। सामने थे उसके बड़े-बड़े, गोरे स्तन, निप्पल सख्त हो चुके थे। मैंने एक स्तन को मुंह में लिया और चूसने लगा। अक्षरा कराह उठी, “आह्ह्ह राहुल, चूसो और जोर से… मेरी चूत गीली हो रही है।” मैंने दूसरे स्तन को हाथ में लिया और दबाने लगा। दूध जैसा नरम, लेकिन निप्पल कठोर।
अक्षरा ने मेरी पैंट खोल दी। मेरा लंड बाहर निकल आया, 7 इंच का मोटा लंड, नसें उभरी हुई। अक्षरा ने उसे हाथ में लिया और बोली, “वाह, कितना बड़ा और गर्म है।” उसने लंड के सिरे पर जीभ फेर दी, फिर पूरे लंड को मुंह में ले लिया। वो चूसने लगी, “चलो-चलो” की आवाजें आ रही थीं। मैंने उसके बाल पकड़कर उसके मुंह में जोर-जोर से ठेलना शुरू कर दिया। अक्षरा गले तक ले रही थी, लार टपक रही थी।
फिर मैंने उसे सोफे पर लिटा दिया। उसकी स्कर्ट और पैंटी उतार दी। सामने थी उसकी चिकनी, गुलाबी चूत, बाल मुड़े हुए, रस टपक रहा था। मैंने उंगलियां डालीं, दो उंगलियां अंदर गईं, चूत बहुत टाइट थी। अक्षरा चीख पड़ी, “आह्ह्ह, राहुल, उंगली और गहरी… मेरी चूत फाड़ दो।” मैंने जीभ से चूत चाटनी शुरू की, क्लिट को चूसता, रस पीता। अक्षरा का शरीर कांप रहा था।
अब लंड डालने का समय आ गया। मैंने अक्षरा की टांगें फैलाईं और लंड का सिरा चूत के मुंह पर रखा। एक जोरदार झटका मारा, आधा लंड अंदर घुस गया। अक्षरा चीखी, “मम्मी… कितना मोटा है! धीरे… आह्ह्ह!” मैंने धीरे-धीरे पूरा लंड अंदर डाल दिया। चूत गर्म और गीली थी, रस बह रहा था। मैंने जोर-जोर से चोदना शुरू कर दिया। “थप-थप” की आवाजें, अक्षरा की चीखें, “चोदो मुझे राहुल, मेरी चूत को फाड़ दो, गांड भी मारो!”
मैंने उसे उल्टा कर दिया, गांड ऊपर करके। गांड के छेद पर लंड लगाया और धीरे से अंदर घुसाया। अक्षरा का शरीर अकड़ गया, “आह्ह्ह, गांड फट रही है!” लेकिन वो और जोर से चिल्लाई, “और गहरा!” मैंने गांड मारते हुए उसकी चूत में उंगलियां डालीं। दो छेदों में एक साथ हमला। अक्षरा dizzy होकर चीख रही थी, “मैं झड़ने वाली हूँ… आह्ह्ह!”
हमने पोजीशन बदली। वो मेरे ऊपर चढ़ गई, लंड को चूत में डालकर ऊपर-नीचे होने लगी। उसके स्तन उछल रहे थे, मैं उन्हें दबा रहा था। अक्षरा बोल रही थी गंदी गंदी बातें, “ले लो मेरी चूत, अपना लंड और गहरा डालो, रस निकाल दो!” हम दोनों पसीने से तर हो गए थे। बारिश की आवाज बाहर, अंदर हमारी चुदाई की आवाजें।
लगभग आधा घंटा चोदा मैंने उसे। आखिर में अक्षरा ने कहा, “मेरे मुंह में डालो!” मैंने लंड निकाला और उसके मुंह में झाड़ दिया। गरम-गरम वीर्य उसके होंठों पर, गले में। अक्षरा ने सब चाट लिया।
हम दोनों थककर सो गए। सुबह अक्षरा ने मुस्कुराकर कहा, “राहुल, ये चक्कर फिर से लगना चाहिए।” तब से हमारी चुदाई चल रही है, हर बार नई पोजीशन, नई गंदी बातें। अक्षरा is dizzy होने पर सबसे ज्यादा मस्ती होती है।
(कहानी पूरी हुई, लेकिन याद रखना दोस्तों, ये सब फैंटेसी और सहमति से है। असली जिंदगी में हमेशा सुरक्षा और सहमति का ध्यान रखें।)