नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम विक्रम है। मैं दिल्ली का एक अमीर बिजनेसमैन हूँ, उम्र 38 साल। मेरे पास कारखाने हैं, बंगले हैं, और पैसे की कोई कमी नहीं। लेकिन कभी-कभी शहर की औरतों से ऊबकर मैं अपने गाँव वाले इलाके में जाता हूँ, जहाँ हवा साफ है और देहाती लड़कियाँ ताजा-ताजा रस से भरी होती हैं। पिछले महीने की बात है, जब मैं अपने पुराने घर गया था। गाँव में बारिश का मौसम था, खेतों में कीचड़, और हवा में ठंडक। एक शाम मैं स्कूटर पर घूम रहा था कि मेरी नजर एक खेत के किनारे खड़ी एक लड़की पर पड़ी।
उसका नाम राधा था, उम्र करीब 22 साल। गाँव की साधारण लड़की, लेकिन शरीर देखकर मेरा लंड तुरंत खड़ा हो गया। उसकी छाती पर दो बड़े-बड़े स्तन लटक रहे थे, जैसे दो पके आम। पतली कमर, गोल-गोल नितंब जो चड्डी से बाहर निकलने को बेताब थे, और गोरी-गोरी जांघें जो बारिश में भीगकर चमक रही थीं। उसने साड़ी पहनी थी, लेकिन ऊपर से भिगी हुई थी तो उसके निप्पल साफ दिख रहे थे। मैंने स्कूटर रोका और उससे बात की।
“राधा, तुम्हारा नाम क्या है?” मैंने पूछा। वो शरमा गई, लेकिन मेरी अमीर वाली कार देखकर उसकी आँखें चमक गईं। “जी, राधा। आप कौन हैं साहब?” मैंने बताया कि मैं शहर का आदमी हूँ और उसे नौकरी का लालच दिया। पहले तो वो डरी, लेकिन जब मैंने 5000 रुपये हाथ में थमाए तो उसकी आँखें चमक उठीं। “साहब, मेरे माँ-बाप गरीब हैं, लेकिन आप अमीर लगते हैं।”
मैंने उसे अपनी कार में बैठाया और एक पुराने खेत के किनारे ले गया, जहाँ कोई नहीं था। बारिश शुरू हो चुकी थी। कार के अंदर ही मैंने उसकी साड़ी खींची। “राधा, आज मैं तुझे चोदूँगा, समझ गई?” मैंने गंदी भाषा में कहा। वो शरमा गई लेकिन मना नहीं किया। मैंने उसके स्तनों को हाथ में लिया। दोनों हाथों में भरपूर माल, नरम और भारी। मैंने निप्पलों को चूसा, काटा। “आह्ह्ह साहब, धीरे…” वो चीखी। लेकिन मैं रुका नहीं।
उसकी साड़ी उतारी, पेटीकोट नीचे खिसकाया। उसकी चूत देखकर मेरा लंड फटने लगा। बालों से भरी, गुलाबी और रस से तर। मैंने उंगली डाली, अंदर गर्म और तंग। “राधा, तेरी चूत कितनी गीली है, जैसे बारिश में भीग गई हो।” मैंने अपनी उंगली अंदर-बाहर की, फिर दो उंगलियाँ। वो कराहने लगी, “विक्रम साहब, अह्ह्ह, मेरा पहला बार है, दर्द हो रहा है।” लेकिन मैंने रुकना नहीं, उसकी चूत चाटी, जीभ घुसाई। उसका रस मीठा था, जैसे आम का रस।
मैंने अपना लंड निकाला, 8 इंच का मोटा लंड, नसों से भरा। “राधा, इस लंड को चूस।” उसने मुँह खोला, लेकिन पहले डरी। फिर मैंने उसके बाल पकड़कर मुंह में ठूंस दिया। “चूस, रंडी की तरह।” वो चूसने लगी, जीभ से लंड चाटा, अंडकोष चूसा। लार टपक रही थी। मैंने उसके मुंह में झड़ने से पहले रोका।
फिर उसे कार की सीट पर लिटाया। उसके पैर फैलाए, चूत के पास लंड रखा। “अब चोदता हूँ तुझे।” एक जोरदार झटका, लंड आधा अंदर गया। “आह्ह्ह साहब, फट रही है चूत!” वो चीखी। मैंने और जोर लगाया, पूरा लंड घुसा दिया। उसकी चूत तंग थी, दीवारें लंड को कस रही थीं। मैं धीरे-धीरे चोदने लगा, फिर तेज। “थप-थप” की आवाज, उसकी चूत से रस निकल रहा था, मेरे लंड पर चिपक रहा था।
मैंने उसके स्तनों को निचोड़ा, चूसा। “राधा, तेरे स्तन कितने बड़े हैं, जैसे दूध से भरे हों।” वो बोल रही थी, “साहब, और जोर से चोदो, मेरी चूत फाड़ दो।” मैंने उसकी जांघें कंधों पर रखीं, गहराई से चोदा। उसकी गाँड भी मलाईदार थी, मैंने उंगली उसमें डाली। “गाँड भी चोदूँगा एक दिन।”
सेक्स घंटे भर चला। पहले पोजीशन में मैं ऊपर, फिर उसने ऊपर चढ़कर चोदना शुरू किया। उसकी चूत मेरे लंड पर ऊपर-नीचे हो रही थी, स्तन उछल रहे थे। “विक्रम, मैं झड़ने वाली हूँ!” उसका शरीर काँप गया, चूत से रस फूटा। मैंने भी अंदर झड़ दिया, गरम-गरम वीर्य उसकी चूत भर दिया।
लेकिन खत्म नहीं हुआ। मैंने उसे फिर से चोदा, इस बार पीछे से। गाँड के पास लंड रखा, चूत में घुसाया। “थप्पड़” मारते हुए चोदा। उसकी गाँड लाल हो गई। वो चीखती रही, “साहब, और मारो, मुझे गंदी लड़की बनाओ।”
रात भर चला ये सिलसिला। सुबह उसने कहा, “साहब, अब मैं आपकी ही हूँ।” मैंने उसे पैसे दिए और शहर ले आया। अब वो मेरे साथ रहती है, और हर रात वो मेरी चूत की रानी बन जाती है। उसकी चूत, उसके स्तन, सब मेरे हैं।
(यह कहानी यहीं खत्म नहीं होती, दोस्तों। राधा अब मेरी रखैल है। हर हफ्ते मैं उसे नई-नई जगहों पर ले जाता हूँ। एक बार होटल में, जहाँ मैंने उसकी चूत में आइसक्रीम डालकर चाटी। दूसरी बार कार में रात के अंधेरे में। उसकी चूत हमेशा गीली रहती है मेरे लंड के लिए। वो अब गंदी बातें करती है, “विक्रम, मेरी चूत को अपना लंड दे दो।” मैं उसकी गाँड भी चोदता हूँ, धीरे-धीरे, ताकि वो चीखे। उसका शरीर अब मेरे निशानों से भरा है, काटने के निशान, चूसने के निशान।
लंबी रातों में, जब बारिश होती है, मैं उसे याद करता हूँ कि कैसे पहली बार उसकी चूत फाड़ी थी। अब वो खुद कहती है, “साहब, मुझे चोदो, मुझे अपनी रंडी बनाओ।” हम दोनों के शरीर पसीने से तर, लंड और चूत एक-दूसरे में रगड़ते हुए। उसका रस, मेरा वीर्य, सब मिलकर गंदा खेल खेलते हैं।
दोस्तों, ये मेरी असली कहानी है। अगर तुम्हें और डिटेल चाहिए तो बताना, लेकिन इतना काफी है कि राधा अब मेरी गाँव वाली चूत है, अमीर लंड से चोदी हुई।)