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चुनिंदा: Naitik and Akshara Put Naksh to Sleep – Gandi Raat Ki Chudai — विस्तार से

चुनिंदा: Naitik and Akshara Put Naksh to Sleep – Gandi Raat Ki Chudai — विस्तार से

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नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम नैतिक है। मैं दिल्ली के एक मिडिल क्लास इलाके में रहता हूँ, एक छोटे से फ्लैट में। मेरी पत्नी अक्षरा और हमारा तीन साल का बेटा नक्ष। आज शाम को नक्ष को सुलाने के बाद जो हुआ वो इतना गंदा और मस्त था कि मैं सोचता हूँ बार-बार याद करके हिलाऊं।

शाम के सात बजे की बात है। नक्ष बहुत थका हुआ था स्कूल और पार्क से। अक्षरा उसे नहला के दूध पिला रही थी। मैं किचन में चाय बना रहा था। अक्षरा की साड़ी थोड़ी खिसक गई थी, उसकी गोरी कमर और नाभि दिख रही थी। उसकी भारी छातियां साड़ी के ब्लाउज में अटकी हुई थीं, निप्पल्स के उभार साफ दिख रहे थे। नक्ष को गोद में लेकर वो झूला रही थी।

“नक्ष सो जा बेटा, पापा-मम्मी को भी थोड़ी देर आराम करने दो,” अक्षरा ने धीरे से कहा। उसकी आवाज में एक अजीब सी गर्माहट थी। नक्ष की आंखें बंद हो गईं। हमने उसे पालने में लिटा दिया। दरवाजा बंद किया।

अब सिर्फ हम दोनो। फ्लैट में सन्नाटा। अक्षरा ने मुझे देखा और मुस्कुराई। “नैतिक, आज नक्ष जल्दी सो गया। क्या करें?”

मैंने उसे दीवार से चिपका लिया। “चोदेंगे तुझे आज रात भर। तेरी चूत फाड़ दूंगा।”

अक्षरा की सांस तेज हो गई। मैंने उसकी साड़ी का पल्लू खींचा। ब्लाउज के हुक खोले। उसकी बड़ी-बड़ी छातियां बाहर आ गईं। गोरी, मुलायम, निप्पल्स गुलाबी और खड़े। मैंने एक निप्पल मुंह में लिया और चूसने लगा। “आह्ह… नैतिक, जोर से चूस… मेरा दूध निकाल ले…” वो चीखी।

मैंने दूसरी छाती भी निचोड़ी। दूध की बूंदें निकलीं। मैंने उसे चाट लिया। अक्षरा ने मेरी पैंट खोली। मेरा लंड बाहर आ गया, नौ इंच का मोटा, नसें उभरी हुई, लाल सिरा चमक रहा था। “कितना बड़ा लंड है तेरा… मेरी चूत में घुसा दे,” उसने कहा और घुटनों के बल बैठ गई।

उसने मेरे लंड को हाथ में लिया और चूसने लगी। जीभ से सिरे को चाटा, फिर पूरा मुंह में ले लिया। “उम्म्म… थूक से गीला कर रही हूं तेरा लंड… मेरी गांड मारना बाद में।” थूक की आवाजें आ रही थीं। मेरे अंडकोष चाट रही थी।

मैंने उसे उठाया और बेड पर लिटा दिया। साड़ी पूरी उतार दी। अब वो सिर्फ पेटीकोट में थी। मैंने पेटीकोट फाड़ा। उसकी चूत सामने थी, गंजी, मोटी लेबिया, क्लिटोरिस सूजी हुई। रस टपक रहा था। मैंने उंगलियां डालीं। “कितनी गीली है तेरी चूत… दो उंगलियां अंदर गईं।”

अक्षरा चीख रही थी। “नैतिक, चोद मुझे… लंड घुसा… आह्ह्ह!”

मैंने अपना लंड उसकी चूत पर रगड़ा। सिरा अंदर डाला। धीरे-धीरे पूरा घुसा दिया। “फट रही है मेरी चूत… मोटा लंड… जोर से धक्का मार!”

हम चोदने लगे। बेड हिल रहा था। “चोद… चोद… तेरी रंडी बना दे!” अक्षरा चिल्ला रही थी। मैंने उसके बाल पकड़े और तेज ठोकने लगा। चूत की आवाजें आ रही थीं – फच फच फच। रस निकल रहा था, मेरे अंडकोष पर लग रहा था।

पोजीशन बदली। अक्षरा को कुत्ते वाली बना दिया। गांड ऊपर, चूत पीछे। मैंने गांड के छेद पर उंगली डाली। “आज तेरी गांड भी मारूंगा।” थूक लगाया और लंड घुसा दिया। “आह्ह… दर्द… लेकिन मजा आ रहा है… गांड फाड़ दे मेरी!”

मैंने दोनों छेद बारी-बारी से चोदा। अक्षरा का शरीर कांप रहा था। “नैतिक, मैं झड़ने वाली हूं… रस निकाल… मेरी चूत भर दे!”

मैंने अंदर झड़ दिया। गर्म रस भर गया। फिर निकाला और उसकी गांड पर मार दिया।

लेकिन रात अभी खत्म नहीं हुई। हमने दोबारा शुरू किया। अक्षरा ने मेरे ऊपर बैठकर चूत में लंड लिया। ऊपर-नीचे होने लगी। उसकी छातियां उछल रही थीं। मैं निप्पल्स चूस रहा था। “दूध पी ले… मम्मी बन गई हूं तेरे लिए!”

तीसरी बार हम शॉवर में गए। पानी गिर रहा था। अक्षरा को दीवार से लगाकर पीछे से चोदा। “पानी में भी तेरी चूत गर्म है… और जोर से!”

चार घंटे बाद हम थक गए। नक्ष अभी भी सो रहा था। अक्षरा ने कहा, “कल फिर नक्ष को जल्दी सुलाएंगे।”

मैंने उसे चूमा। “हां, और तेरी चूत फिर फाड़ूंगा।”

ये थी हमारी वो रात। नक्ष को सुलाने के बाद की सबसे गंदी चुदाई। अब रोज ऐसा ही होता है।

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