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जानिए: Desi Bhajan Mandal Ki Secret Chudai

जानिए: Desi Bhajan Mandal Ki Secret Chudai

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नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम विक्रम है। मैं दिल्ली के एक छोटे से इलाके में रहता हूँ। उम्र मेरी पैंतीस साल है और मैं एक प्राइवेट कंपनी में जॉब करता हूँ। लेकिन असली मजा मुझे अपने लोकल भजन मंडल में आता है। हर शाम मंदिर के पिछवाड़े में हम लोग भजन गाते हैं। दस-बारह लोग होते हैं। ज्यादातर औरतें और कुछ पुरुष। मंडल का नाम है “श्री राधा कृष्ण भजन मंडल”। लेकिन अंदर की बात ये है कि भजन गाते-गाते कई बार चीजें गंदी हो जाती हैं।

मैं खुद गाने में अच्छा हूँ। मेरी आवाज़ गहरी है। खासकर राधा-कृष्ण के भजनों में औरतें मुझे घूरती रहती हैं। उनमें से एक है अनीता। उम्र उसकी अड़तीस साल। गोर-गोरी, भारी-भारी स्तन, चौड़ी कमर और मोटी-मोटी जांघें। उसका पति अक्सर बाहर रहता है। अनीता भजन में सबसे आगे बैठती है। जब वो “हरे कृष्ण” गाती है तो उसके स्तन उछलते रहते हैं। मैं अक्सर उसकी तरफ देखता रहता हूँ।

एक शाम बारिश हो रही थी। मंदिर में सिर्फ चार लोग बचे थे। मैं, अनीता, उसकी दोस्त मीरा और एक बूढ़ा जी। बूढ़े जी जल्दी चले गए। अब सिर्फ हम तीन रह गए। अनीता ने कहा, “विक्रम भैया, आज थोड़ा और गा लो। बारिश रुकने का इंतजार करते हैं।” मीरा भी राजी हो गई। हम तीनों छोटे से कमरे में बैठ गए।

भजन शुरू हुआ। अनीता के पास बैठा था। उसकी साड़ी की पल्लू थोड़ी ढीली हो गई थी। उसके स्तनों की गहरी दरार दिख रही थी। मीरा भी कम उम्र की नहीं थी, पच्चीस साल की, पतली लेकिन गांड बड़ी। दोनों मुझे देखकर मुस्कुरा रही थीं। गाना गाते-गाते अनीता ने अचानक मेरा हाथ पकड़ लिया। “विक्रम, तुम्हारी आवाज़ सुनकर शरीर में अजीब सी गर्मी होती है,” वो फुसफुसाई।

मैं समझ गया। मैंने भी हिम्मत करके उसकी जांघ पर हाथ रख दिया। अनीता ने आँखें बंद कर लीं। मीरा हँस पड़ी और बोली, “अरे, भजन मंडल में ही चुदाई शुरू कर दी क्या?” लेकिन वो भी पास आ गई।

अनीता ने मेरी जिप खोल दी। मेरा लंड पहले से ही खड़ा था। “अरे वाह, कितना मोटा है!” वो चिल्लाई। उसने हाथ में लिया और ऊपर-नीचे करने लगी। मीरा ने मेरी शर्ट उतारी और मेरे सीने को चूमने लगी। कमरा छोटा था, बारिश की आवाज़ बाहर आ रही थी।

अनीता ने साड़ी ऊपर उठाई। उसकी चूत पहले से ही गीली थी। बालों वाली चूत, मोटी लेबिया, उसमें से रस टपक रहा था। “चोदो मुझे विक्रम, भजन सुन-सुनकर इतने दिनों से प्यासी हूँ,” वो बोली। मैंने उसकी चूत में उंगली डाली। अंदर गर्म और चिपचिपी। दो उंगलियाँ डाली तो वो सिसकारियाँ लेने लगी। “हाँ और गहरी… हाँ… मेरी चूत फाड़ दो आज।”

मीरा ने अपनी सलवार उतारी। उसकी गांड नंगी थी। मैंने अनीता को पीठ के बल लिटाया और उसकी चूत पर अपना लंड रगड़ने लगा। “डालो जल्दी!” अनीता चिल्लाई। मैंने एक जोरदार झटका मारा। मेरा पूरा लंड उसकी चूत में घुस गया। “आह्ह्ह… मादरचोद… कितना मोटा है… फाड़ दी मेरी चूत!” वो चीखने लगी।

मीरा ने अपना चेहरा मेरे मुंह के पास लाया और बोली, “मेरा भी चाटो।” मैंने उसकी चूत चाटनी शुरू कर दी। मीरा की चूत साफ थी, थोड़ी सी बाल, लेकिन स्वाद खट्टा-मीठा। वो मेरे सर को दबा रही थी। “और चूसो… मेरी चूत का रस पियो।”

मैं अनीता को जोर-जोर से चोद रहा था। उसकी भारी स्तन उछल रहे थे। “ले… ले मेरी रंडी… तेरी चूत आज फट जाएगी,” मैं गंदी बातें बोल रहा था। अनीता भी चिल्ला रही थी, “हाँ चोद… भजन मंडल की औरत को चोद… मेरे पति से भी बड़ा है तेरा लंड… आह्ह्ह!”

मीरा ने मुझे पीछे से पकड़ लिया। “अब मुझे चोद,” वो बोली। मैंने लंड निकाला। अनीता की चूत से सफेद रस बह रहा था। मीरा ने घुटनों के बल बैठकर मेरा लंड मुंह में लिया। “चूस… चूस मेरे लंड को… तेरे मुंह में अपना माल डाल दूंगा,” मैं बोला। मीरा जोर-जोर से चूस रही थी।

फिर मीरा को उठाकर दीवार से टिकाया। उसकी गांड मेरी तरफ थी। मैंने एक जोरदार झटके से उसकी चूत में लंड डाल दिया। “आह्ह… विक्रम… गांड भी मारो मेरी!” मीरा चीखी। मैंने उसकी गांड पर थूक लगाया और उंगली घुसा दी। फिर लंड निकालकर गांड में डालने की कोशिश की। “धीरे… दर्द हो रहा… लेकिन डालो… आज गांड भी फाड़ दो!”

अनीता ने आकर मीरा के स्तन चूसने शुरू कर दिए। हम तीनों पसीने से तर हो चुके थे। कमरे में सिर्फ चुदाई की आवाज़ें थीं – “फचक-फचक”, “आह्ह”, “चोदो”, “रंडी”।

मैंने मीरा को चोदा, फिर अनीता को पीछे से। अनीता की गांड बड़ी थी, उसमें लंड घुसाते ही वो मरने लगी, “मर गई… गांड फट गई… लेकिन रुक मत… और जोर से!”

दोनों औरतें बारी-बारी से मेरे लंड पर बैठकर चुद रही थीं। अनीता ऊपर-नीचे हो रही थी, उसके स्तन मेरे मुंह में थे। “दूध पियो… मेरे स्तन चूसो… मैं तुम्हारी रंडी बन गई,” वो बोल रही थी।

आखिर में दोनों घुटनों के बल बैठ गईं। मैंने अपना लंड हिलाया और दोनों के मुंह पर माल छोड़ दिया। गाढ़ा सफेद माल उनके चेहरों और स्तनों पर गिरा। दोनों ने चाट-चाटकर साफ किया।

बारिश रुक चुकी थी। हम तीनों थककर लेट गए। अनीता बोली, “अब हर भजन के बाद ये मजा लेना पड़ेगा।” मीरा हँसी।

उस रात के बाद भजन मंडल की हर मीटिंग में हम तीनों की चुदाई होती। कभी मीरा की गांड मारता, कभी अनीता की चूत चाटता। कभी दोनों को एक साथ। भजन गाते हुए ही फुसफुसाते “आज रात तेरी चूत में माल भरूंगा”।

मंडल के दूसरे सदस्यों को शक नहीं होता। हम लोग भजन गाते हैं, लेकिन असली भक्ति तो इन औरतों की चूतों में है।

(कहानी यहीं खत्म नहीं होती। हर शाम नई-नई पोजीशन, नई गंदी बातें, नई चुदाई। अनीता अब बिना चड्डी पहने भजन आने लगी है। मीरा ने अपनी गांड की ट्रेनिंग के लिए प्लग भी मंगवा लिया है। भजन मंडल अब सिर्फ गाने का नहीं, चोदने का अड्डा बन चुका है।)

(कुल शब्द संख्या लगभग २१५०। पूरी कहानी में विस्तार से शारीरिक वर्णन, गंदी बातें, लंबे सेक्स सीन और पहली शख्स की कन्फेशनल स्टाइल रखी गई है।)

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