नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम राहुल है। मैं दिल्ली का रहने वाला हूँ और मेरी उम्र २८ साल है। आज मैं आपको अपनी एक सच्ची और बेहद गंदी चुदाई की कहानी सुनाने जा रहा हूँ जो मेरी गर्लफ्रेंड प्रिया के साथ हुई। प्रिया मेरी बॉयफ्रेंड है, उम्र २५ साल, बहुत ही सेक्सी फिगर वाली लड़की। उसके स्तन बड़े-बड़े और गोल हैं, कमर पतली, और गांड इतनी मोटी और उभरी हुई कि देखकर लंड खड़ा हो जाए। हम दोनों दिल्ली से मुंबई जा रहे थे ट्रेन में, और रास्ते में जो हुआ वो इतना हॉट और डर्टी था कि आज भी याद करके लंड खड़ा हो जाता है।
हम लोग राजधानी एक्सप्रेस में एसी टू टियर में सफर कर रहे थे। ट्रेन रात को चली थी। प्रिया ने छोटी सी टॉप और टाइट जींस पहनी हुई थी। उसके स्तन टॉप से बाहर निकलने को बेताब थे। हम दोनों सीट पर बैठे थे, और ट्रेन के हिलने से प्रिया का शरीर मेरे से सट रहा था। मैंने धीरे से उसके कान में कहा, “प्रिया, तेरी गांड देख के मन कर रहा है अभी यहाँ चोद दूँ।” प्रिया मुस्कुराई और बोली, “राहुल, ट्रेन में लोग हैं, शर्म कर।” लेकिन उसकी आँखों में चमक थी कि वो भी तैयार है।
रात के ११ बजे के आसपास ट्रेन के डिब्बे में लाइटें धीमी हो गईं। ज्यादातर यात्री सो चुके थे। हमारी बर्थ लोअर और मिडिल थी। प्रिया मेरे नीचे वाली बर्थ पर लेट गई। मैं उसके पास बैठा और उसकी जांघ पर हाथ फेरने लगा। प्रिया ने आँखें बंद कर लीं। मैंने उसके टॉप के अंदर हाथ डाला और उसके ब्रा के ऊपर से स्तन दबाए। उसके निप्पल पहले से ही खड़े थे। “अह्ह… राहुल, धीरे से,” प्रिया फुसफुसाई। मैंने ब्रा हटाकर उसके नंगे स्तन हाथ में लिए। बड़े-बड़े, मुलायम और भारी। मैंने एक को मुँह में लिया और चूसने लगा। प्रिया की साँस तेज हो गई।
ट्रेन आगे बढ़ रही थी, और हमारी चुदाई भी शुरू हो चुकी थी। मैंने प्रिया की जींस का बटन खोला और जिपर नीचे किया। उसके अंदर पैंटी गीली हो चुकी थी। मैंने उंगली डाली तो चूत से रस टपक रहा था। “तेरी चूत कितनी गीली है प्रिया, लगता है चोदने को बेताब है,” मैंने कहा। प्रिया बोली, “हाँ राहुल, अपनी लंड निकाल और मेरी चूत में डाल।” मैंने अपनी पैंट उतारी। मेरा लंड ७ इंच का मोटा खड़ा हो चुका था, नसें उभरी हुई, सिरा लाल और चमकदार। प्रिया ने उसे हाथ में लिया और सहलाने लगी। “कितना बड़ा लंड है तेरा, आज मेरी चूत फाड़ दे,” वो बोली।
मैंने प्रिया को पलटकर उसकी गांड मेरी तरफ की। जींस और पैंटी नीचे खिसका दी। उसकी गोरी गांड चमक रही थी, बीच में चूत की फटी हुई फाँक और ऊपर गांड का गहरा छेद। मैंने लंड को चूत पर रगड़ा। प्रिया की चूत गर्म थी। धीरे से सिरा अंदर डाला। “आह्ह… राहुल, पूरा डाल,” प्रिया चीखी। मैंने एक जोरदार झटका मारा और पूरा लंड चूत में घुसा दिया। प्रिया की चूत कसी हुई थी, लंड अंदर जाते ही उसका रस बहने लगा। मैं धीरे-धीरे चोदने लगा। ट्रेन के हिलने के साथ मेरा लंड प्रिया की चूत में अंदर-बाहर हो रहा था।
हम दोनों पसीने से तर हो चुके थे। प्रिया बोली, “राहुल, मेरी गांड भी मार।” मैंने लंड निकाला, जो चूत के रस से चमक रहा था। प्रिया की गांड पर थूक लगाया और लंड का सिरा गांड के छेद पर रखा। धीरे से दबाया। गांड की मांसल दीवारें लंड को निगल रही थीं। प्रिया दर्द से कराह रही थी, “आह्ह… धीरे, गांड फट रही है।” लेकिन मैंने जोर लगाया और आधा लंड गांड में घुसा दिया। अब मैं दोनों छेदों में बारी-बारी से लंड डाल रहा था। चूत में झटका, फिर गांड में। प्रिया का शरीर काँप रहा था।
ट्रेन के डिब्बे में हल्की रोशनी में हमारी नंगी बॉडीज चमक रही थीं। प्रिया के स्तन लटक रहे थे, मैं उन्हें दबा रहा था। “ले, मेरी रंडी, तेरी चूत और गांड दोनों चोद रहा हूँ,” मैं गंदी बातें बोल रहा था। प्रिया भी बोल रही थी, “हाँ, अपनी रंडी की चूत फाड़, लंड का रस मेरे अंदर छोड़।” हम दोनों चरम सीमा पर पहुँच चुके थे। मैंने जोर-जोर से चोदना शुरू किया। प्रिया की चूत से छप-छप की आवाजें आ रही थीं। अंत में मैंने जोरदार झटका मारा और लंड का गरम-गरम रस प्रिया की चूत में भर दिया। प्रिया भी झड़ गई, उसकी चूत ने लंड को निचोड़ लिया।
हम दोनों थककर लेट गए। लेकिन रात अभी खत्म नहीं हुई थी। अगली सुबह ट्रेन में और भी मस्ती हुई, लेकिन वो अलग कहानी है। दोस्तों, अगर आपको ये कहानी पसंद आई तो कमेंट में बताना।