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जानिए: Mamatha Uma Hot – Dono Garam Bhabhiyon Ki Chudai Kahani — मुख्य बातें

जानिए: Mamatha Uma Hot – Dono Garam Bhabhiyon Ki Chudai Kahani — मुख्य बातें

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नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम अर्जुन है। मैं दिल्ली के एक मध्यम वर्गीय इलाके में रहता हूँ। उम्र मेरी पैंतीस साल है और मैं एक छोटी सी आईटी कंपनी में जॉब करता हूँ। मेरी शादी हो चुकी है लेकिन बीवी अक्सर मायके चली जाती है। अकेलेपन में मन अक्सर इधर-उधर भटकता रहता है। मेरे फ्लैट के बगल में दो बहनें रहती हैं – ममथा और उमा। दोनों की उम्र तीस के आसपास है। ममथा थोड़ी गोरी और भरी हुई है, जबकि उमा थोड़ी साँवली लेकिन बहुत ही फिगर वाली। दोनों की गांड और छातियाँ देखकर ही लंड खड़ा हो जाता है।

एक दिन शाम को बारिश हो रही थी। मैं छत पर कपड़े सुखाने गया तो दोनों बहनें भी वहाँ आईं। ममथा ने हल्का सा ब्लाउज पहना हुआ था जिससे उसकी मोटी छातियाँ साफ दिख रही थीं। उमा ने टाइट साड़ी बाँधी थी जिससे उसकी गोल-गोल गांड हिल रही थी। हम तीनों बातें करने लगे। ममथा ने मुस्कुराते हुए कहा, “अर्जुन भाई, बारिश में अकेले लग रहा है क्या?” मैंने भी हँसकर जवाब दिया, “हाँ दीदी, थोड़ा तो।” उमा ने आँख मारते हुए कहा, “चलो हमारे घर चलो, चाय पीते हैं।”

हम तीनों उनके फ्लैट में गए। अंदर जाकर ममथा ने दरवाजा बंद किया और सीधे मेरे पास आ गई। उसने मेरी जिप खोलकर लंड बाहर निकाल लिया और बोली, “अरे वाह, कितना मोटा लंड है! उमा देख, कितना गरम है।” उमा ने भी घुटनों के बल बैठकर मेरे लंड को हाथ में लिया और चूसने लगी। उसकी गर्म साँसों से मेरा लंड और सख्त हो गया। ममथा ने अपना ब्लाउज उतारा तो उसकी भारी छातियाँ झूलने लगीं। मैंने एक हाथ से ममथा की छाती दबाई और दूसरे हाथ से उमा के बाल पकड़कर उसका मुँह अपने लंड पर दबाया। उमा “उम्म्म… अह्ह…” करती हुई लंड चूस रही थी।

ममथा ने साड़ी उतार दी। उसकी सफेद जाँघें और गीली चूत दिखने लगी। मैंने उसे बिस्तर पर लिटाया और उसकी चूत चाटने लगा। उसकी चूत से रस बह रहा था। मैंने जीभ से उसकी चूत के अंदर तक चाटा और बोला, “ममथा, तेरी चूत कितनी स्वादिष्ट है।” ममथा चीख रही थी, “अर्जुन, और जोर से चाटो… मेरी चूत फाड़ दो!” उमा मेरे पीछे आकर मेरी गांड चाटने लगी। उसकी जीभ मेरी गांड में घुस रही थी।

फिर मैंने ममथा को उल्टा कर दिया और उसकी गांड पर लंड रखकर धक्का मारा। लंड उसकी गांड में आधा घुस गया। ममथा चिल्लाई, “आह्ह… धीरे… गांड फट जाएगी!” लेकिन मैंने जोर से धक्के मारे। “थप थप” की आवाजें पूरे कमरे में गूँज रही थीं। उमा ने अपनी चूत मेरे मुँह पर रख दी और मैं उसकी चूत भी चाट रहा था। उमा बोली, “अर्जुन, मेरी चूत भी चोदो ना… देखो कितना रस निकल रहा है।”

मैंने ममथा की गांड से लंड निकाला और उमा की चूत में घुसा दिया। उमा की चूत बहुत टाइट थी। “आह्ह… लंड अंदर तक घुस गया!” उमा चीख रही थी। मैं दोनों बहनों को बारी-बारी से चोद रहा था। ममथा ने मेरे लंड पर बैठकर ऊपर-नीचे होने लगी। उसकी छातियाँ मेरे मुँह में आ रही थीं। मैं उनको चूसता और काटता। ममथा का रस मेरे लंड पर बह रहा था।

हम तीनों घंटों तक चोदते रहे। मैंने उमा को कुत्ते वाली पोज में डाला और उसकी गांड मारने लगा। “ले ले, मेरी रंडी… तेरी गांड फाड़ दूंगा!” उमा चीख रही थी, “हाँ, और जोर से… मेरी चूत और गांड दोनों फाड़ दो!” ममथा मेरे नीचे आकर लंड चूस रही थी जब भी मैं बाहर निकालता।

आखिर में मैंने दोनों की चूतों पर झड़ दिया। गरम-गरम माल दोनों की छातियों और चूत पर फैल गया। ममथा और उमा ने उसे चाटकर साफ किया। हम तीनों थककर बिस्तर पर गिर गए।

इसके बाद से हर हफ्ते हम तीनों मिलकर चुदाई करते हैं। ममथा और उमा दोनों मेरी पर्सनल रंडियाँ बन गई हैं। उनकी गर्म चूत और गांड का मजा लेते-लेते मेरा लंड कभी शांत नहीं होता। दिल्ली की बारिश में उनकी चूतों का रस और भी स्वादिष्ट लगता है।

(कहानी यहीं खत्म नहीं होती, दोस्तों। अगली बार और भी लंबी चुदाई की कहानी सुनाऊंगा।)

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