नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम राहुल है। मैं दिल्ली के करोल बाग इलाके में रहता हूँ। उम्र मेरी 28 साल है और मैं एक छोटी सी आईटी कंपनी में जॉब करता हूँ। आज मैं आपको अपनी एक बहुत ही गंदी और रसीली चुदाई की कहानी सुनाने जा रहा हूँ जो अक्षरा सीरियल के आज के एपिसोड से जुड़ी हुई है।
कल शाम को जब मैं घर आया तो मेरी पड़ोस वाली भाभी अनन्या मेरे फ्लैट में ही बैठी थी। अनन्या 32 साल की है, शादीशुदा, लेकिन उसका पति अक्सर बाहर रहता है। उसकी चूतड़ी बड़ी-बड़ी है, मोटी जांघें, और स्तन ऐसे कि देखते ही मुंह में पानी आ जाए। वो अक्सर मेरे पास आती रहती है सीरियल देखने के बहाने। आज भी वो बोली, “राहुल, अक्षरा सीरियल का आज का एपिसोड लगाओ ना, टीवी पर नहीं आ रहा।”
मैंने लैपटॉप खोला और अक्षरा सीरियल आज का एपिसोड यूट्यूब पर सर्च किया। एपिसोड शुरू हुआ लेकिन हम दोनों की नजरें एक-दूसरे पर थीं। अनन्या ने साड़ी थोड़ी सी ऊपर खींच ली थी, उसकी गोरी जांघें चमक रही थीं। मैंने पूछा, “भाभी, क्या हाल है? अकेली लग रही हो?” उसने मुस्कुराते हुए कहा, “हां राहुल, आज मन बहुत बेचैन है। कुछ ऐसा करो कि मन शांत हो जाए।”
मैंने हिम्मत करके उसका हाथ पकड़ लिया। अनन्या ने हाथ नहीं छुड़ाया। मैंने उसे अपनी तरफ खींचा और उसके होंठों पर अपना मुंह लगा दिया। वो भी जोर से चूमने लगी। उसकी जीभ मेरी जीभ से लड़ रही थी। मैंने उसकी साड़ी का पल्लू खींचा और उसके बड़े-बड़े स्तन बाहर निकाल लिए। स्तन इतने नरम और भरे हुए थे कि दोनों हाथों से भी नहीं समा रहे थे। मैंने एक स्तन मुंह में लिया और जोर-जोर से चूसने लगा। अनन्या सिसकारियां भरने लगी, “आह्ह्ह राहुल… चूसो और जोर से… मेरे स्तन तुम्हारे हैं आज।”
मैंने उसकी साड़ी और पेटीकोट दोनों उतार दिए। अब वो सिर्फ ब्लाउज और पैंटी में थी। मैंने उसकी पैंटी खींची तो उसकी गीली चूत सामने आ गई। चूत के बाल हल्के-हल्के थे, और रस बह रहा था। मैंने उंगली डाली तो अनन्या चीख पड़ी, “ओह्ह्ह मादरचोद… उंगली मत डाल, सीधा लंड डाल अंदर।” मैंने अपनी पैंट उतारी। मेरा लंड खड़ा हो चुका था, नौ इंच लंबा और मोटा। अनन्या ने उसे हाथ में लिया और बोली, “कितना मोटा लंड है तेरा… आज मेरी चूत फाड़ दे।”
मैंने उसे सोफे पर लिटाया और उसके पैर फैलाए। लंड की नोक उसकी चूत के मुंह पर रखा और जोर से धक्का मारा। आधा लंड अंदर घुस गया। अनन्या चीखी, “आह्ह्ह साले… धीरे… चूत फट रही है।” लेकिन मैंने नहीं सुनी। दो-तीन जोरदार झटके मारे और पूरा लंड उसकी चूत में घुसा दिया। अब मैं तेजी से चोदने लगा। थाप-थाप की आवाज पूरे कमरे में गूंज रही थी। अनन्या के स्तन उछल रहे थे। मैंने उन्हें हाथों से दबाया और बोला, “ले भाभी… ले मेरा लंड… तेरी चूत आज फट जाएगी।” वो चिल्ला रही थी, “चोदो मुझे… और जोर से चोदो… अक्षरा सीरियल भूल गई मैं… बस तेरा लंड चाहिए।”
हमने पोजीशन बदली। अनन्या ने कुत्ते वाली हालत में घुटनों के बल बैठकर गांड ऊपर उठा दी। मैंने उसके पीछे से लंड डाला। अब गांड की चुदाई शुरू हुई। मैं उसकी गांड के दोनों तरफ हाथ मार रहा था और लंड अंदर-बाहर कर रहा था। अनन्या का रस मेरे लंड पर बह रहा था। मैंने उसकी गांड में उंगली भी डाल दी। वो पागल हो गई, “आह्ह्ह… दोनों छेद भर दिए… मर गई मैं… चोदते रहो।”
हमने अगले 40 मिनट तक चोदा। सोफे पर, फर्श पर, यहां तक कि बालकनी में भी जहां बारिश हो रही थी। अनन्या ने मेरे लंड को मुंह में लिया और चूसा। लंड से निकलने वाले प्री-कम को वो चाट रही थी। मैंने भी उसकी चूत चाटी, उसका रस पिया। फिर से लंड डाला और इस बार उसकी गांड में डाला। गांड बहुत टाइट थी। अनन्या रो रही थी, “गांड फट गई… लेकिन मत रुक… चोद मेरी गांड।”
आखिर में मैंने उसकी चूत में ही झड़ने का फैसला किया। तेजी से चोदा और गरम-गरम माल उसकी चूत में भर दिया। अनन्या का भी चरम हो गया। वो कांप रही थी। हम दोनों पसीने से लथपथ हो चुके थे।
एपिसोड अभी भी चल रहा था लेकिन हमने उसे बंद कर दिया। अनन्या ने कहा, “राहुल, ये तो सिर्फ शुरुआत है। अक्षरा सीरियल के हर एपिसोड के साथ अब हम चोदेंगे।” मैंने फिर से उसे चूमा और बोला, “हां भाभी, आज का एपिसोड तो यादगार हो गया।”
(शेष कहानी विस्तार से: हमने रात भर चोदा, सुबह फिर से, अनन्या ने मुझे बताया कि उसका पति नपुंसक है, इसलिए वो मुझे चुना। हमने कई पोजीशन आजमाई जैसे 69, स्टैंडिंग चुदाई, दीवार से टेककर, और यहां तक कि किचन में जहां अनन्या खाना बना रही थी। हर बार लंड डालते ही वो चीखती, “मेरा लंड… मेरा मालिक।” उसकी चूत का रस मेरे मुंह में, मेरे लंड पर, और फर्श पर फैलता रहा। गांड चुदाई में वो इतनी मस्त हो गई कि खुद ही पीछे हट-हटकर लंड लेने लगी। अंत में हम दोनों थककर गिर पड़े लेकिन अगली सुबह फिर से शुरू किया। ये कहानी सच है, और अक्षरा सीरियल आज का एपिसोड मेरे लिए हमेशा यादगार रहेगा क्योंकि उसने मुझे अनन्या जैसी चूत दी।)