नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम राहुल है। मैं दिल्ली में रहता हूँ और एक छोटी सी प्रोडक्शन कंपनी में असिस्टेंट डायरेक्टर की जॉब करता हूँ। पिछले दो साल से स्टार प्लस के एक पॉपुलर शो में काम कर रहा हूँ, जिसका नाम है अक्षरा नाटक। शो की हीरोइन अक्षरा है, जिसे असल जिंदगी में सब अक्षरा ही बोलते हैं। वो बीस पच्चीस साल की बेहद सेक्सी औरत है। गोरी चमड़ी, बड़े-बड़े स्तन, मोटी गोल गांड और पतली कमर। शो में वो साड़ी पहनकर आती है तो पूरा सेट हिल जाता है।
एक दिन शूटिंग के बाद सब चले गए थे। सिर्फ मैं और अक्षरा स्टूडियो में रह गए थे। बारिश हो रही थी, बाहर पानी गिर रहा था। अक्षरा ने मुझे बुलाया, “राहुल, ये सीन का डायलॉग चेक करो ना।” मैं उनके ड्रेसिंग रूम में गया। अक्षरा सिर्फ ब्लाउज और पेटीकोट में थी। ब्लाउज थोड़ा खुला था, उनके गोरे स्तनों का ऊपरी हिस्सा साफ दिख रहा था।
“राहुल, तुम्हें मेरी बॉडी अच्छी लगती है ना?” अक्षरा ने सीधे सवाल किया। मैं घबरा गया। “मैडम…” “बस मैडम मत बोलो। आज रात हम दोनों अकेले हैं।” उन्होंने मेरा हाथ पकड़कर अपने स्तनों पर रख दिया। नरम, गरम और भारी स्तन मेरी हथेली में समा गए। मैंने दबाया तो अक्षरा की सांस तेज हो गई। “हाँ, ऐसे ही दबाओ मेरे मोटे स्तनों को।”
मैंने उनका ब्लाउज उतारा। अंदर लाल ब्रा थी। ब्रा के अंदर से उनके काले-काले निप्पल साफ दिख रहे थे। मैंने ब्रा खींचकर फेंक दी। दोनों स्तन झूल गए, बड़े और गोल। मैंने एक स्तन मुंह में लिया और चूसने लगा। अक्षरा का “आह्ह्ह… राहुल, चूसो जोर से, मेरी चूचियां चूस लो” निकला। दूसरा स्तन हाथ में लेकर मसलने लगा।
अक्षरा ने मेरी पैंट खोली। मेरा लंड बाहर आ गया, सख्त और मोटा। “वाह, कितना बड़ा लंड है तेरा। आज मेरी चूत फाड़ देगा।” उन्होंने घुटनों के बल बैठकर मेरा लंड मुंह में लिया। जीभ से लंड के सिरे को चाटा, फिर पूरा मुंह में ठूस लिया। “चलो, चूसो मेरे लंड को, अक्षरा।” मैंने उनके बाल पकड़कर मुंह में ठेलना शुरू किया। थूक की आवाजें आने लगीं, “गल्प गल्प”।
उन्होंने लंड निकालकर कहा, “अब मेरी चूत चाटो।” पेटीकोट उतार दिया। अंदर कोई पैंटी नहीं थी। गंजी चूत, मोटी लेबिया और ऊपर से चमकता हुआ क्लिटोरिस। मैंने उनकी टांगें फैलाईं और मुंह लगाया। जीभ से चूत के होठों को चाटा, फिर अंदर घुसा दी। अक्षरा चीखने लगी, “हाँ, मेरी चूत चाट, पूरा रस पी ले।” उनकी चूत से मीठा रस निकल रहा था, मैं चाटता रहा।
फिर अक्षरा ने मुझे लेटाया और मेरे ऊपर चढ़ गई। उनकी गीली चूत मेरे लंड के ऊपर रगड़ने लगी। “अब डाल, मेरी चूत में अपना मोटा लंड डाल।” उन्होंने लंड पकड़कर अपनी चूत के मुंह पर रखा और धीरे से बैठ गई। “आह्ह्ह… कितना मोटा है, मेरी चूत फट रही है।” पूरा लंड अंदर घुस गया। अक्षरा ऊपर-नीचे होने लगी। उनके स्तन झूल रहे थे। मैंने दोनों स्तन पकड़कर दबाए और चूत में जोर-जोर से चोदने लगा।
“चोदो मुझे, राहुल। स्टार प्लस की अक्षरा को अपनी रंडी बना लो।” उनकी गांड पर थप्पड़ मारने लगा। “थप्पड़ मारो मेरी मोटी गांड पर।” थप्पड़ की आवाजें, “थप थप” और चूत की “पुच पुच” आवाजें भर गईं।
हमने पोजीशन बदली। अक्षरा कुत्ते वाली मुद्रा में हो गई। मैं पीछे से घुसा। गांड को दोनों हाथों से पकड़कर जोर-जोर से चोदने लगा। “ले, मेरी रंडी, ले पूरा लंड अपनी चूत में।” अक्षरा चिल्ला रही थी, “हाँ, और जोर से, मेरी चूत को फाड़ डाल।” पंद्रह-बीस मिनट तक ऐसे ही चोदा।
फिर अक्षरा ने मुंह में लिया और मैं उनके मुंह में झड़ गया। गरम-गरम वीर्य उनके गले में उतरा। उन्होंने सब पी लिया। “अब मेरी गांड मारो।” उन्होंने खुद अपनी गांड फैलाई। मैंने थूक लगाकर गांड में लंड डाला। “आह्ह्ह… गांड फट रही है।” धीरे-धीरे पूरा लंड अंदर घुसा। फिर तेजी से चोदने लगा। गांड की “फच फच” आवाजें आने लगीं।
रात भर हम चोदते रहे। सुबह तक तीन बार चूत मारी, दो बार गांड मारी। अक्षरा की चूत और गांड लाल हो गई थी। रस से पूरा बिस्तर भीग चुका था।
अगले दिन शूटिंग पर दोनों नॉर्मल दिखे, लेकिन रात को फिर मिलते थे। ये सिलसिला महीनों चला। अक्षरा नाटक स्टार प्लस की शूटिंग के बाद हमारी असली नाटक शुरू होती थी। अक्षरा की चूत अब मेरे लंड की आदि हो गई थी। वो खुद आकर कहती, “राहुल, आज मेरी चूत और गांड दोनों मारना।”
एक बार हमने होटल में पूरी रात बिताई। अक्षरा ने साड़ी पहनी हुई थी। मैंने साड़ी उठाकर पीछे से चोदा। फिर उन्हें दीवार से टिका कर चोदा। उनके स्तन मेरे मुंह में थे। “चूसो, चूसो मेरी चूचियां।”
ये कहानी सच है। अक्षरा नाटक स्टार प्लस के पीछे की असली कहानी यही है। अगर और डिटेल चाहिए तो बताना, क्योंकि अक्षरा अभी भी कभी-कभी मुझे बुलाती है अपनी चूत और गांड मारने के लिए।