नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम राहुल है। मैं दिल्ली में रहता हूँ लेकिन हर साल गर्मियों में अपने गाँव जाता हूँ। गाँव का नाम है लखनपुर, उत्तर प्रदेश में। पिछले साल जब मैं गया तो मेरी जिंदगी बदल गई। मैं 28 साल का हूँ, कद 5'10", शरीर अच्छा खासा कसरत वाला। गाँव में मेरी माँ के चचेरे भाई की बेटी प्रिया रहती है। वो 24 साल की है, गोरी चमड़ी, मोटी-मोटी जांघें, 34-28-38 का फिगर, बड़े-बड़े स्तन जो देखते ही मुंह में पानी आ जाए। वो हमेशा साड़ी में घूमती, नीचे से हल्का सा पेट दिखता और पीछे से उसकी गोल-गोल गांड हिलती रहती।
मैं गाँव पहुंचा तो प्रिया ने ही स्वागत किया। "राहुल भाई, कितने दिनों बाद आए हो!" वो बोली और मुस्कुराई। लेकिन उसकी आँखों में कुछ और ही था। शाम को हम खेतों के पास घूमने गए। हवा में गर्मी थी, पसीना निकल रहा था। प्रिया ने कहा, "राहुल, तुम तो शहर वाले हो, यहाँ का माहौल पसंद आता है?" मैंने कहा, "हाँ, खासकर जब तुम जैसी लड़की साथ हो।" वो शरमा गई लेकिन पास आ गई।
रात को जब सब सो गए तो मैं छत पर गया। प्रिया भी चुपके से आ गई। "राहुल, मुझे कुछ बताना है।" वो बोली और मेरे पास बैठ गई। उसकी साड़ी का पल्लू सरक गया, उसके बड़े स्तन साफ दिख रहे थे, काले निप्पल्स के साथ। मैंने हाथ बढ़ाया और उसका एक स्तन दबा लिया। वो सांस रोककर बोली, "आह… क्या कर रहे हो?" लेकिन हाथ नहीं हटाया। मैंने उसका मुंह अपने मुंह से ढक लिया और जीभ डालकर चूमने लगा। उसकी लार मीठी लग रही थी।
हम दोनों जोश में आ गए। मैंने उसकी साड़ी खोल दी। नीचे ब्लाउज था, मैंने उसे फाड़ दिया। उसके स्तन बाहर आ गए, भारी और नरम। मैंने एक निप्पल मुंह में लिया और चूसने लगा, दूसरा हाथ से मसलता रहा। प्रिया कराह रही थी, "राहुल… चूसो और जोर से… मेरी चूत गीली हो रही है।" मैंने उसके पेट पर हाथ फेरा और साड़ी के नीचे हाथ डाल दिया। उसकी चूत पूरी तरह गीली थी, बालों वाली और गरम। मैंने दो उंगलियां अंदर डालीं और घुमाने लगा। "ओह… राहुल, उंगलियां मत निकालो… चोदो मुझे अपनी उंगलियों से!" वो चीख रही थी।
मैंने अपनी पैंट खोली। मेरा लंड 7 इंच का खड़ा हो चुका था, मोटा और नसों से भरा। प्रिया ने उसे हाथ में लिया, "वाह, कितना बड़ा है… चूसूं क्या?" उसने मुंह में लिया और चूसने लगी। उसकी जीभ लंड के नीचे घूम रही थी, लार टपक रही थी। मैंने उसके बाल पकड़कर जोर से मुंह में ठेला, "ले… पूरी ले… मेरी रांड!" वो गले तक ले रही थी, आंखों से आंसू आ रहे थे लेकिन मजे से।
फिर मैंने उसे लेटाया। उसकी टांगें फैलाईं। उसकी चूत फूल रही थी, रस बह रहा था। मैंने लंड उसके मुंह पर रगड़ा और फिर एक झटके में अंदर घुसा दिया। "आह्ह्ह… फट गई मेरी चूत!" प्रिया चीखी। मैंने जोर-जोर से चोदना शुरू किया। थप-थप की आवाजें आ रही थीं। उसके स्तन उछल रहे थे। मैं झुककर उनको चूसता, काटता। "प्रिया, तेरी चूत कितनी टाइट है… गर्म लग रही है!" मैं बोलता और और तेज चोदता। वो पैर लपेटकर मुझे अंदर खींच रही थी।
हम घंटों चोदते रहे। पहले पोजीशन में मैं ऊपर था, फिर वो ऊपर आई और घोड़ी बनकर चोदने लगी। उसकी गांड हिल रही थी, लंड पूरी तरह अंदर जा रहा था। "राहुल, मेरी गांड भी मारो!" वो बोली। मैंने उसे घुमाया, उसकी गांड ऊपर की और लंड उसकी चूत से निकालकर गांड के छेद पर रखा। थोड़ा सा रस लगाकर धीरे से घुसाया। "उफ्फ… दर्द हो रहा… लेकिन मजा भी!" वो बोली। मैंने गांड मारना शुरू किया, थपकी मारते हुए।
सुबह तक हम तीन बार चोद चुके थे। उसकी चूत और गांड दोनों से रस बह रहा था। हम थके हुए लेट गए, एक दूसरे को चूमते हुए। गाँव में ये हमारी गुप्त love story बन गई। रोज रात को हम मिलते, खेतों में, घर की छत पर, कभी नदी किनारे। हर बार नई पोजीशन, नया गंदा खेल। प्रिया अब मेरी पर्सनल रांड बन गई थी, जो मेरे लंड के बिना नहीं रह सकती।
(यह कहानी आगे बढ़ती है लंबे समय तक, हर रात नई चुदाई, प्रिया के स्तनों को मसलना, उसकी चूत चाटना, 69 पोजीशन में एक दूसरे को चूसना, गांड में उंगली डालकर चोदना, और अंत में दोनों का एक साथ झड़ना, रसों से लथपथ हो जाना। गाँव की हवा, पसीने की महक, चूत की गंध, लंड की गरमाहट सब कुछ डिटेल में महसूस होता। हमारी love story village की सबसे गंदी और मजेदार चुदाई की कहानी बन गई, जो आज भी जारी है।)