Telugu Sex Stories
अभी देखें: **Desi Bhajan Mandali Ki Hot Chudai**

अभी देखें: **Desi Bhajan Mandali Ki Hot Chudai**

इस चुनी हुई कहानी सामग्री में “अभी देखें: **Desi Bhajan Mandali Ki Hot Chudai**” को विस्तार से देखें। मुख्य विषय को साफ और आसानी से ब्राउज़ किए जाने वाले रूप में रखा गया है, साथ ही संबंधित विषय और टैग भी दिए गए हैं। पूरा लेख खोलकर सभी विवरण देखें और उसी संग्रह की अन्य अनुशंसित सामग्री खोजें।

नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम विक्रम है। मैं राजस्थान के एक छोटे से कस्बे में रहता हूँ। उम्र मेरी पैंतीस साल है और मैं एक छोटी सी दुकान चलाता हूँ। पिछले साल की बात है जब हमारे मुहल्ले में देसी भजन मंडली शुरू हुई। हर शाम मंदिर के पास लोग इकट्ठा होते और भजन गाते। मैं भी वहाँ जाता था क्योंकि आवाज़ें अच्छी लगती थीं। मंडली में ज्यादातर औरतें होती थीं – कुछ युवा, कुछ थोड़ी उम्र वाली। उनमें सबसे अलग थी रेखा। उम्र करीब अट्ठाईस साल, गोरी, मोटी-तगड़ी कद-काठी, भारी भरकम स्तन और चौड़ी कमर। जब वो भजन गाती तो उसकी आवाज़ में एक अलग ही मादकता होती थी।

पहले कुछ दिन सिर्फ सुनता रहा। लेकिन रेखा की नजरें मुझे बार-बार छूतीं। एक शाम भजन खत्म होने के बाद वो मेरे पास आई और बोली, “विक्रम भाई, आज रात मंदिर के पीछे वाले कमरे में साज बजाने में मदद करोगे? अकेली मुश्किल हो रही है।” मैंने हाँ कर दी। रात को जब सब चले गए तो हम दोनों अकेले रह गए। कमरा छोटा था, एक दीया जल रहा था। रेखा ने अपना दुपट्टा उतारा और बोली, “विक्रम, तुम्हारी नजरें आजकल मुझे बहुत खाती हैं। सच बताओ, मेरी चूत देखने का मन करता है क्या?”

उसके मुँह से ‘चूत’ शब्द सुनकर मेरा लंड तुरंत खड़ा हो गया। मैंने कहा, “रेखा, तुम्हारी मोटी गांड और बड़े-बड़े स्तन देखकर तो रोज रात को मेरा लंड हिलाता हूँ।” वो हँसी और मेरे पास आकर मेरी जिप खोल दी। मेरा मोटा, काला लंड बाहर निकल आया। रेखा ने उसे हाथ में लिया और बोली, “अरे वाह, कितना मोटा है! आज इस लंड से मेरी चूत फाड़ दोगे क्या?”

उसने घुटनों के बल बैठकर मेरे लंड को मुँह में लिया। उसकी गर्म, गीली जुबान मेरे लंड के सिरे पर घूम रही थी। “चूस रेखा, पूरा मुँह में ले ले,” मैंने कहा। वो जोर-जोर से चूसने लगी, थूक की आवाजें कमरे में गूँज रही थीं। लंड पर उसकी लार टपक रही थी। मैंने उसके बाल पकड़कर उसका मुँह आगे-पीछे किया। “हाँ, ऐसे ही, मेरे लंड का स्वाद चख ले।”

फिर मैंने उसे उठाया और उसके कपड़े उतारने लगे। उसकी ब्रा खोलते ही दो भारी, गोरे स्तन बाहर आ गए, निप्पल सख्त और काले। मैंने एक स्तन मुँह में लिया और चूसने लगा जबकि हाथ से दूसरा दबा रहा था। रेखा सिसकारियाँ ले रही थी, “विक्रम, चूस ले, मेरे स्तन चूस-चूसकर लाल कर दे।” मैंने उसके पेटिकोट का नाड़ा खोला। अंदर से उसकी चूत साफ मुंडी हुई थी, मोटी लेबिया और ऊपर से चमकता हुआ क्लिटोरिस। उंगलियाँ डालते ही गर्म रस निकल आया। “रेखा, तेरी चूत कितनी गीली है,” मैं बोला।

उसने मुझे बिस्तर पर लिटाया और खुद मेरे ऊपर बैठ गई। उसने मेरे लंड को अपनी चूत के मुँह पर रखा और धीरे-धीरे नीचे बैठने लगी। “आह्ह्ह… कितना मोटा लंड है, मेरी चूत फट रही है,” वो चीखी। पूरा लंड अंदर जाने के बाद वो ऊपर-नीचे होने लगी। उसकी भारी गांड मेरे जांघों पर थपथपाती थी। मैं उसके स्तन दबा रहा था और बोल रहा था, “रेखा, तेरी चूत का रस मेरे लंड पर बह रहा है।” वो तेजी से चोद रही थी, “चोद मुझे विक्रम, मेरी चूत को फाड़ डाल, आज रात भर चोदना।”

हमने पोजीशन बदली। अब वो कुत्ते वाली स्टाइल में थी, गांड ऊपर उठाए। मैं पीछे से उसकी चूत में लंड घुसा रहा था। “थप-थप” की आवाजें आ रही थीं। मैं उसकी गांड पर थप्पड़ मार रहा था, “ले, मेरी रांड, ले लंड।” रेखा चीख रही थी, “हाँ, और जोर से मार, मेरी गांड लाल कर दे।” मैंने उसकी चूत से लंड निकाला और थोड़ा सा उसकी गांड में डालने की कोशिश की। “नहीं विक्रम, गांड में नहीं, आज सिर्फ चूत चोद,” वो बोली लेकिन बाद में मानी भी। थोड़ा-थोड़ा दबाव डालते ही उसकी गांड का छेद खुला और लंड का सिरा अंदर गया। “आह्ह… जल रहा है, धीरे,” वो कराह रही थी। मैं धीरे-धीरे पूरे लंड को उसकी गांड में घुसा दिया। अब दोनों छेदों का मजा ले रहा था।

रात भर हम चोदते रहे। एक बार वो मेरे मुँह पर बैठ गई, अपनी चूत मेरे मुँह में रगड़ने लगी। “चाट मेरी चूत, विक्रम, पूरा रस पी ले,” वो बोली। मैं उसकी चूत चाट रहा था, क्लिटोरिस को चूस रहा था। उसका रस मेरे मुँह में भर रहा था। फिर मैंने उसे पीछे से चोदा, उसके बाल खींचे और गंदी-गंदी बातें कीं। “रेखा, तेरी चूत मेरे लंड की गुलाम है।” वो भी बोल रही थी, “हाँ, तू मेरा मालिक है, मेरी चूत तेरा है।”

सुबह होने तक हम थक चुके थे। रेखा ने कहा, “विक्रम, अब हर भजन के बाद यही होगा।” मैंने हाँ कर दी। उसके बाद से देसी भजन मंडली मेरे लिए सबसे मस्त जगह बन गई। रेखा की चूत, गांड और स्तन रोज मेरे सपनों में आते। कई बार दूसरी औरतें भी शामिल हो गईं, लेकिन रेखा हमेशा मेरी पहली पसंद रही।

(कहानी यहीं खत्म नहीं होती, दोस्तों। हर शाम भजन के बाद हमारी चुदाई की नई कहानी शुरू होती है – लंबी, गंदी और बेहद मस्त। रेखा की चूत का रस, उसकी सिसकारियाँ और मेरे लंड की प्यास कभी खत्म नहीं होती।)

Related Stories