Telugu Sex Stories
चुनिंदा: Dehati Choot Romance: Gaon Ki Rasili Choot Ki Pyas — नई पसंद

चुनिंदा: Dehati Choot Romance: Gaon Ki Rasili Choot Ki Pyas — नई पसंद

यह पृष्ठ “चुनिंदा: Dehati Choot Romance: Gaon Ki Rasili Choot Ki Pyas — नई पसंद” को प्रमुख कहानी सामग्री के रूप में प्रस्तुत करता है। सरल संरचना ब्राउज़िंग को आसान बनाती है, जबकि संबंधित टैग और सुझाव समान सामग्री खोजने में मदद करते हैं। पूरी प्रविष्टि खोलें और इसी विषय की अन्य अनुशंसाएं देखें।

नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम विकास है। मैं दिल्ली में नौकरी करता हूँ लेकिन हर साल गर्मियों में अपने गांव जाता हूँ। गांव उत्तर प्रदेश के एक छोटे से देहाती इलाके में है, जहां खेत, कुएं और मिट्टी की सड़कें हैं। पिछले साल जब मैं गांव गया तो मेरी जिंदगी बदल गई। वहां मेरी पुरानी दोस्त रेखा मिली। रेखा अब बीस साल की हो चुकी थी, देहाती औरतों जैसी मोटी-तगड़ी काया, बड़े-बड़े स्तन, चौड़ी कमर और गोल-गोल गांड। उसकी चूत की बात अलग ही थी – देहाती चूत, काली-भूरी, बालों से घिरी और हमेशा रस से भीगी हुई।

रेखा बचपन से मेरी पड़ोस की लड़की थी। जब मैं शहर चला गया तो वो गांव में ही रह गई। इस बार जब मैं गांव पहुंचा तो वो अकेले अपने घर में थी क्योंकि उसके माता-पिता शहर गए हुए थे। शाम को जब मैं उसके घर गया तो वो खेत से लौट रही थी। पसीने से तर उसका शरीर, ब्लाउज में दबे हुए भारी स्तन और पेटीकोट में छुपी हुई वो देहाती चूत। हम बातें करने लगे। रेखा हंसते हुए बोली, “विकास भैया, तुम शहर में बड़े हो गए लेकिन गांव की चूत याद आती है क्या?” मैं चौंक गया लेकिन मुस्कुराते हुए बोला, “रेखा, तेरी चूत तो अब भी मेरे सपनों में आती है।”

वो शरमा गई लेकिन आंखों में चमक थी। रात को अंधेरा होने के बाद वो मुझे अपने घर बुला लाई। अंदर घुसते ही उसने दरवाजा बंद कर दिया। “विकास, आज रात भर मुझे चोदो। मेरी देहाती चूत सूख रही है।” मैंने उसे दीवार से लगाकर चूमा। उसके होंठ नरम थे, जीभ से हम एक-दूसरे का मुँह चाट रहे थे। मैंने उसके ब्लाउज के हुक खोले। दो बड़े स्तन बाहर निकल आए, काले-काले निप्पल और पसीने की बूंदें। मैंने एक स्तन मुंह में लिया और चूसने लगा। रेखा सिसकारियां भरने लगी, “आह्ह्ह… विकास, मेरे मोटे स्तन चूसो, और जोर से काटो।”

मैंने दूसरे स्तन को हाथ में लिया और मसलते हुए चूसा। फिर मैं घुटनों पर बैठ गया। उसका पेटीकोट खोला। अंदर कोई चड्डी नहीं थी। सीधे उसकी देहाती चूत सामने थी – घने काले बाल, फूली हुई लेबिया, और बीच से चमकता हुआ रस। मैंने उंगली लगाई तो चिपचिपा रस निकला। “रेखा, तेरी चूत तो पूरी तरस रही है।” मैंने मुंह लगाया और चाटने लगा। उसकी चूत का स्वाद नमकीन और देहाती था। जीभ से क्लिटोरिस को रगड़ते हुए अंदर तक चाटा। रेखा चीखने लगी, “हां… हां… मेरी चूत चाटो, पूरा रस पी लो! आह्ह्ह… जीभ और अंदर डालो!”

मैंने दो उंगलियां अंदर डालीं और तेजी से फिंगरिंग करने लगा। उसकी चूत से छप-छप की आवाजें आने लगीं। रस मेरे हाथ पर बह रहा था। रेखा का शरीर कांप रहा था। “विकास, अब अपना लंड निकालो। मेरी चूत में घुसाओ।” मैंने अपनी पैंट उतारी। मेरा लंड खड़ा हो चुका था, सात इंच लंबा, मोटा और नीले-नीले नसों से भरा। रेखा ने उसे हाथ में लिया और सहलाते हुए बोली, “कितना मोटा लंड है, मेरी देहाती चूत फट जाएगी।”

वो बिस्तर पर लेट गई, टांगें फैला दीं। मैं उसके ऊपर चढ़ा। लंड को चूत के मुंह पर रखा और धीरे से धकेला। सिरा अंदर गया तो रेखा चीख पड़ी, “आह्ह्ह… धीरे… तेरे लंड से मेरी चूत फट रही है!” लेकिन मैंने जोर लगाया। पूरा लंड अंदर घुस गया। उसकी चूत गर्म, तंग और रस से भरी थी। मैं धीरे-धीरे चोदने लगा। “रेखा, तेरी देहाती चूत कितनी टाइट है।”

रेखा मेरी पीठ पर नाखून गड़ाते हुए बोली, “जोर से चोदो विकास, मेरी चूत को फाड़ दो! गांड भी मारो!” मैंने रफ्तार बढ़ाई। लंड अंदर-बाहर होता रहा, छप-छप की आवाजें पूरे कमरे में गूंज रही थीं। रेखा के स्तन उछल रहे थे। मैं झुककर उन्हें चूसता रहा। पंद्रह मिनट तक इसी पोजीशन में चोदा। फिर मैंने उसे कुत्ते वाली पोजीशन में कर दिया। गांड ऊपर करके उसकी चूत पीछे से दिख रही थी। लंड फिर घुसाया। इस बार और गहराई तक गया। रेखा चीख रही थी, “आह्ह्ह… हां… मेरी गांड भी सहलाओ!” मैंने उसकी गांड के छेद में उंगली डाली और चोदते रहा।

रस दोनों तरफ से बह रहा था। लंड पर सफेद-पीला मिश्रण चिपक गया था। रेखा का पहला झड़ना हो चुका था लेकिन वो और मांग रही थी। “विकास, अब मेरी गांड मारो।” मैंने लंड निकाला और गांड के छेद पर रखा। थोड़ा सा थूक लगाकर धकेला। गांड भी तंग थी लेकिन धीरे-धीरे लंड घुस गया। रेखा चीखती रही, “दर्द हो रहा है… लेकिन और जोर से मारो!” मैंने गांड मारते हुए उसकी चूत में उंगलियां डालीं। दोनों छेदों से खेलते हुए चोदा।

घंटे भर तक हम चोदते रहे। अलग-अलग पोजीशन – वो मेरे ऊपर चढ़कर चोदने लगी, फिर मैंने उसे दीवार से टिका कर खड़े होकर चोदा। हर बार उसकी चूत से नया रस निकलता। आखिर में मैंने लंड निकालकर उसके स्तनों पर झाड़ दिया। गरम-गरम वीर्य उसके स्तनों और मुंह पर गिरा। रेखा ने उसे चाट लिया।

रात भर हम सोए नहीं। सुबह फिर चोदा। रेखा की देहाती चूत अब मेरी हो चुकी थी। जब मैं दिल्ली लौटा तो वो रो पड़ी लेकिन कहा, “अगली बार फिर आना, मेरी चूत तेरे लंड की भूखी रहेगी।”

(कहानी यहीं खत्म नहीं होती, लेकिन दोस्तों, ये मेरी असली देहाती चूत रोमांस की याद है। रेखा की चूत का रस आज भी जीभ पर महसूस होता है।)

Related Stories