नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम विक्रम है। दिल्ली के एक पुराने इलाके में मैं रहता हूँ, एक छोटे से फ्लैट में। उम्र मेरी ३२ साल है और मैं एक प्राइवेट कंपनी में जॉब करता हूँ। मेरी जिंदगी में हमेशा से ही सेक्स की भूख रही है, लेकिन असली मजा तब आया जब मेरी पड़ोस में ममथा नाम की औरत आई। ममथा ३५ साल की थी, शादीशुदा लेकिन पति अक्सर बाहर रहता था। उसकी बॉडी देखकर ही मेरा लंड खड़ा हो जाता था। मोटी-मोटी गांड, भारी-भारी स्तन जो टीशर्ट में अटक से जाते थे, और चेहरा ऐसा कि देखते ही चोदने का मन करता था।
एक दिन बारिश में हम दोनों लिफ्ट में फंस गए। ममथा भीग चुकी थी, उसकी साड़ी शरीर से चिपक गई थी। उसके स्तनों के निप्पल साफ दिख रहे थे। मैंने कहा, “ममथा जी, बहुत भीग गई हो।” उसने शरारत से मुस्कुराते हुए कहा, “हां विक्रम, शरीर में आग लग रही है।” लिफ्ट में सिर्फ हम दोनों थे। मैंने हिम्मत करके उसकी कमर पकड़ ली। उसने रोका नहीं। उल्टे मेरे हाथ को अपनी गांड पर ले गई। “देखो, कितनी नरम है।” मैंने तुरंत उसकी साड़ी ऊपर खींची और उसकी चूत पर हाथ मार दिया। चूत पहले से ही गीली थी। “अरे विक्रम, कितना गरम है तेरा हाथ।”
हम उसके फ्लैट पहुंचे। दरवाजा बंद करते ही मैंने उसे दीवार से लगाया। उसके होंठों पर अपना मुंह मार दिया। जीभ से चाटते हुए हम दोनों सांस ले रहे थे। ममथा ने मेरी पैंट खोल दी और मेरा लंड बाहर निकाल लिया। “वाह रे, कितना मोटा लंड है।” उसने घुटनों के बल बैठकर मेरे लंड को चूसना शुरू कर दिया। उसकी जीभ लंड के नीचे घूम रही थी, लंड का सारा रस चाट रही थी। “चूस ममथा, तेरी चूत को भी चोदूंगा।” मैं उसके बाल पकड़कर लंड उसके मुंह में ठेल रहा था। गला भर गया उसका, लेकिन वो रुकी नहीं।
फिर मैंने उसकी साड़ी पूरी उतार दी। ब्रा खोलते ही उसके स्तन बाहर निकल आए। बड़े-बड़े, काले निप्पल। मैंने एक निप्पल मुंह में लिया और चूसने लगा। दूसरा हाथ उसकी चूत में डाल दिया। दो उंगलियां अंदर डालकर घुमाने लगा। “आह विक्रम, उंगलियां मत निकाल, चूत फट रही है।” ममथा चीख रही थी। मैंने उसे बिस्तर पर लिटाया और उसकी टांगें फैला दीं। चूत देखकर मेरा लंड और सख्त हो गया। बालों वाली, गुलाबी चूत, रस बह रहा था।
मैंने अपना लंड उसकी चूत पर रगड़ना शुरू किया। “डाल दे विक्रम, अब और मत सताना।” मैंने एक जोरदार झटका मारा। लंड आधा अंदर घुस गया। ममथा चीख पड़ी, “अरे माँ, कितना मोटा है। धीरे से।” लेकिन मैंने नहीं सुनी। दो-तीन झटके और मारा, पूरा लंड अंदर। चूत गर्म और तंग थी। मैं झटके मारने लगा। “ले ले ममथा, मेरा लंड तेरी चूत में।” वो चीख रही थी, “चोद मुझे, गांड भी मार।” मैंने उसकी गांड के नीचे हाथ डाला और उंगली डाल दी। दो जगह चोद रहा था।
हम पोजीशन बदलते रहे। पहले मिशनरी, फिर वो ऊपर आई। ममथा मेरे लंड पर चढ़कर कूदने लगी। उसके स्तन उछल रहे थे। मैं उन्हें दोनों हाथों से दबा रहा था। “रस निकाल दूंगा तेरी चूत का।” वो जोर-जोर से चीख रही थी, “हां चोद, मेरा पति कभी नहीं चोदता।” १५ मिनट तक चोदने के बाद मैंने अंदर झड़ दिया। गरम रस उसकी चूत भर गया।
लेकिन हम रुके नहीं। मैंने उसे कुत्ते वाली पोजीशन में कर दिया। गांड ऊपर करके। लंड फिर उसकी चूत में डाला। इस बार और जोर से। थप्पड़ मार रहा था उसकी गांड पर। “देख कितनी लाल हो गई गांड।” ममथा चीख रही थी, “मार और, चोद मेरी चूत फाड़ दे।” मैंने उसकी चूत से लंड निकाला और सीधा गांड में ठेल दिया। “आह, गांड फट गई।” लेकिन वो मना नहीं कर रही थी। मैं गांड चोदने लगा। तंग गांड, मेरा लंड अंदर-बाहर हो रहा था।
घंटे भर तक हम चोदते रहे। कई बार झड़ चुके थे। बिस्तर पर रस और पसीने से तर हो चुका था। ममथा की चूत सूज गई थी, लेकिन वो और मांग रही थी। “फिर डाल, विक्रम। तेरे बिना अब नहीं रह सकती।” हमने अगली सुबह तक चोदा। सुबह होते-होते ममथा ने कहा, “अब तो तू मेरा पति है। रोज चोदना।”
इसके बाद हमारी रोज की आदत बन गई। ऑफिस से लौटते ही उसके फ्लैट में जाना, कपड़े उतारना और घंटों चोदना। कभी किचन में, कभी बालकनी में, कभी बाथरूम में। एक बार बारिश में बालकनी पर ही चोदा। ममथा की साड़ी गीली, लंड अंदर, पानी गिर रहा था और हम दोनों चीख रहे थे। “चोद मुझे विक्रम, सबको पता चल जाए तो क्या।”
ममथा की चूत का स्वाद अब मेरी आदत बन चुका था। वो मेरे लंड को चूसती, मैं उसकी गांड चाटता। हम दोनों गंदी-गंदी बातें करते। “तेरी चूत में मेरा लंड ही रहेगा।” “हां, तेरे लंड के बिना मेरी चूत सूख जाती है।”
दो महीने बाद ममथा का पति लंबे समय के लिए विदेश चला गया। अब पूरा फ्लैट हमारा था। रोज नई-नई पोजीशन, नया मजा। एक दिन मैंने उसे बांधकर चोदा। हाथ-पैर बांधे, आंखों पर पट्टी, और लंड से चोदना। ममथा चीख-चीखकर मांग रही थी, “अंधेरा है, लेकिन चोदना बंद मत करना।”
हमारी ये ममथा रोमांस अब रोज की चुदाई बन चुकी थी। दिल्ली की गर्मी में भी हम दोनों नंगे लिपटे रहते। उसके स्तनों को चूसता, चूत को चाटता, गांड मारता। ममथा भी मेरे लंड को कभी मुंह से, कभी चूत से, कभी गांड से संभालती।
अब जब भी कोई नई कहानी सुननी हो तो याद करना, ममथा रोमांस की वो गंदी रातें। हम दोनों अभी भी चोदते हैं, और चोदते रहेंगे।