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अभी देखें: Village Boy Friend Romance: गाँव में छुपकर गर्लफ्रेंड को चोदा — संपादकीय चयन

अभी देखें: Village Boy Friend Romance: गाँव में छुपकर गर्लफ्रेंड को चोदा — संपादकीय चयन

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नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम रोहन है। मैं उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गाँव का रहने वाला हूँ। उम्र मेरी इक्कीस साल है और मैं पढ़ाई के लिए शहर जाता था लेकिन छुट्टियों में हमेशा गाँव आता। गाँव में मेरा बचपन का दोस्त अनन्या है जो मेरी गर्लफ्रेंड भी बन गई। अनन्या उम्र में मेरे बराबर ही है, गोरी चमड़ी, मोटे-मोटे स्तन, चौड़ी कमर और गोल-गोल गांड वाली लड़की। उसके स्तन इतने बड़े थे कि जब वो चलती तो उछलते रहते और मुझे देखकर शरमाती।

हम दोनों बचपन से ही एक-दूसरे को पसंद करते थे लेकिन असली बात शुरू हुई जब मैं कॉलेज से वापस आया। गाँव में खेतों के पास एक पुराना कुआं था जहां हम मिलते। एक शाम बारिश हो रही थी। अनन्या ने मुझे बुलाया। वो लाल सूट पहने खड़ी थी, बाल बिखरे हुए, पानी में भीगकर कपड़े चिपक गए थे। उसके स्तनों के निप्पल साफ दिख रहे थे। मैंने उसे देखते ही लंड खड़ा हो गया।

“रोहन, आज कोई नहीं है घर पर, आ जा खेत वाले कमरे में,” उसने फुसफुसाते हुए कहा। मैं उसके साथ चल पड़ा। कमरा छोटा था, अंधेरा, सिर्फ एक चारपाई। बारिश की आवाज बाहर आ रही थी। अनन्या ने दरवाजा बंद किया और मेरे पास आकर खड़ी हो गई। “बहुत दिनों से मन कर रहा था तेरे लंड को छूने का,” वो बोली और सीधे मेरी जांघ पर हाथ रख दिया।

मैंने उसे दीवार से लगाया और उसके होठों पर अपना मुंह मार दिया। हम दोनों जोर से चूमने लगे। उसकी जीभ मेरे मुंह में घुस रही थी। मैंने उसके सूट का नाड़ा खींचा और हाथ अंदर डाल दिया। उसकी चूत पहले से ही गीली थी। दो उंगलियां अंदर डाली तो वो सिसक उठी, “आह्ह रोहन, धीरे… तेरी उंगलियां मोटी हैं।”

मैंने उसके स्तन बाहर निकाले। दोनों स्तन भारी थे, निप्पल गुलाबी और खड़े। मैंने एक निप्पल मुंह में लिया और चूसने लगा। दूसरा हाथ उसकी चूत में उंगलियां घुमाता रहा। अनन्या चीख रही थी, “चूस ले और जोर से, मेरे स्तन तेरे हैं आज।” उसने मेरी पैंट खोली और मेरा लंड बाहर निकाल लिया। लंड नौ इंच का मोटा था, नसें उभरी हुई। “वाह, कितना बड़ा है तेरा लंड, गाँव में सब लड़कियां तुझे चाहेंगी,” वो बोली और घुटनों के बल बैठकर लंड चूसने लगी।

उसकी जीभ लंड के सिरे पर घुम रही थी, थूक लगा-लगाकर चूस रही थी। “गले तक ले ले,” मैंने कहा और उसके सिर को दबाया। वो आधा लंड गले में ले ली, आंखों से आंसू आ गए लेकिन रुक नहीं रही थी। “तेरी चूत चाटूं?” मैंने पूछा। वो चारपाई पर लेट गई, टांगें फैला दीं। उसकी चूत साफ शेव की हुई थी, होंठ मोटे, अंदर से गुलाबी। मैंने मुंह लगाया और चाटने लगा। उसका रस मीठा था। जीभ अंदर डाली तो वो उछल गई, “आह्ह्ह रोहन, चूत फट जाएगी, और जोर से चाट!”

मैंने उसकी गांड के नीचे हाथ डाला और उंगली गांड में डाल दी। वो और जोर से चीखी। “अब चोद मुझे, बहुत देर हो गई,” वो बोली। मैं ऊपर चढ़ा। लंड उसकी चूत के मुंह पर रखा और एक झटके में आधा अंदर कर दिया। अनन्या चीख पड़ी, “मादरचोद, इतना मोटा! धीरे!” लेकिन मैंने नहीं सुनी। दूसरा झटका मारा तो पूरा लंड अंदर घुस गया। उसकी चूत गरम और तंग थी।

मैं धीरे-धीरे चोदने लगा। “तेरी चूत कितनी टाइट है, गांव की सब लड़कियों से बेहतर,” मैं बोलता रहा। वो मेरी कमर पकड़कर और अंदर खींच रही थी। “जोर से चोद, मेरी चूत फाड़ दे!” हम दोनों पसीने से तर हो गए थे। लंड बाहर निकालता तो चूत का रस लंड पर चिपक जाता, फिर अंदर धकेलता।

मैंने उसे कुत्ते वाली पोज में कर दिया। गांड ऊपर, चेहरा नीचे। लंड पीछे से घुसाया। गांड के छेद को देखकर मन हुआ लेकिन पहले चूत ही चोदी। एक हाथ से उसके स्तन निचोड़ता, दूसरा हाथ उसकी गांड पर थप्पड़ मारता। “थप्पड़ मार और जोर से, मैं तेरी रंडी हूं आज!” वो चिल्ला रही थी।

लगभग बीस मिनट बाद मैंने कहा, “अब मुंह में निकालूं?” वो बोली, “नहीं, चूत में ही डाल, आज सुरक्षित दिन है।” मैंने और तेज चोदा। लंड फड़फड़ा रहा था। आखिर में जोर का झटका मारा और सारा माल उसकी चूत में छोड़ दिया। गर्म-गर्म वीर्य भर गया। वो भी झड़ गई, चूत कस गई।

हम दोनों थककर लेट गए। लेकिन रात अभी लंबी थी। अनन्या ने फिर लंड हाथ में लिया, “एक बार और, गांड में डालना इस बार।” मैं हैरान हुआ लेकिन राजी हो गया। थोड़ा तेल लगाया जो पास में था। लंड गांड के छेद पर रखा। पहले सिरा अंदर गया तो वो दर्द से कराह उठी। धीरे-धीरे पूरा लंड गांड में घुसा। गांड और भी तंग थी।

मैं गांड मारने लगा। वो चीख रही थी, “आह्ह आह्ह, फट रही है गांड, लेकिन रुक मत!” पंद्रह मिनट बाद फिर झड़ गया। इस बार गांड में।

सुबह होने तक हम तीन बार चोद चुके थे। अनन्या की चूत और गांड दोनों लाल हो गई थीं। रस और वीर्य से भीग गई थी चारपाई।

अगले दिन भी हम मिले। खेत में जाकर फिर वही सब हुआ। अनन्या अब मेरी पक्की गर्लफ्रेंड बन गई। गाँव में किसी को पता नहीं चला लेकिन हमारी चुदाई का सिलसिला चलता रहा। हर बार नई पोज, नया मजा। उसके स्तन चूसते-चूसते, चूत चाटते-चाटते, लंड गले तक लेते-लेते हम दोनों पागल हो जाते।

ये मेरी पहली और सबसे गंदी, सबसे मजेदार romance थी। आज भी जब गाँव जाता हूं तो अनन्या इंतजार में होती है, चूत गीली करके।

(कहानी यहीं खत्म नहीं होती, हर छुट्टी में नई कहानी जुड़ती जाती है।)

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