नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम राहुल है। मैं दिल्ली में नौकरी करता हूँ लेकिन असली जड़ें मेरी उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गाँव में हैं। हर साल गर्मियों में जब ऑफिस की छुट्टियाँ मिलती हैं तो मैं गाँव चला जाता हूँ। पिछले साल की बात है। गाँव में बारिश का मौसम था। खेतों में पानी भरा हुआ था और हवा में मिट्टी की खुशबू फैली हुई थी।
मैं रोज सुबह खेतों के किनारे घूमता। एक दिन मुझे एक लड़की दिखी जो पानी भरने के लिए कुएँ के पास खड़ी थी। उसका नाम सीमा था। उम्र करीब बीस साल, गाँव की लड़की लेकिन शरीर देखकर मन अटक गया। उसकी छाती पर हल्का सा ब्लाउज था जो बारिश में भीगकर चिपक गया था। उसके स्तन पूरे उभरे हुए थे, निप्पल्स की आकृति साफ दिख रही थी। उसकी कमर पतली थी और पीछे से उसकी गोल-गोल गाँड बहुत भारी लग रही थी।
हमारी नजरें मिलीं। पहले दिन सिर्फ मुस्कुराहट हुई। दूसरे दिन मैंने बात शुरू की। सीमा शर्माती हुई बोली, “राहुल भैया, आप तो शहर से आए हो ना?” मैंने कहा, “हाँ, लेकिन गाँव की हवा और तुम जैसी लड़कियाँ देखकर मन लग गया।” वो हँस पड़ी। धीरे-धीरे हम दोस्त बन गए।
तीसरे दिन बारिश तेज हो गई। हम दोनों एक पुराने खलिहान में छिप गए। अंदर अंधेरा था, सिर्फ बिजली की चमक से कभी-कभी रोशनी आती। सीमा भीग चुकी थी। उसका साड़ी का पल्लू फिसल गया था। मैंने देखा उसके सफेद ब्रा के अंदर दो बड़े-बड़े स्तन लटक रहे थे। मैंने कहा, “सीमा, तुम बहुत सुंदर हो।” वो शर्मा गई लेकिन पास आ गई।
मैंने उसका हाथ पकड़ा और धीरे से खींचा। उसके होंठों पर किस किया। पहले हल्का सा, फिर गहरा। उसकी जीभ मेरी जीभ से मिली। मैंने उसके स्तनों को हाथों में लिया। इतने नरम और भारी थे कि दोनों हाथों में भी नहीं समा रहे थे। मैंने ब्लाउज के बटन खोले। ब्रा उतारी तो उसके गुलाबी निप्पल्स बाहर आ गए। मैंने एक निप्पल मुंह में लिया और चूसने लगा। सीमा सिसकारियाँ लेने लगी, “आह्ह… राहुल… धीरे से… लगता है।”
मैंने उसकी साड़ी खींची। पेटीकोट भी उतार दिया। अब वो सिर्फ पैंटी में थी। मैंने पैंटी के ऊपर से ही उसकी चूत को छुआ। कपड़ा गीला हो चुका था। मैंने पैंटी नीचे उतारी। उसकी चूत पूरी तरह साफ थी, हल्के बाल थे और होंठ गुलाबी। मैंने उंगली डाली तो अंदर से गरम-गरम रस निकल रहा था। सीमा चीख पड़ी, “उम्म्म… राहुल… मेरी चूत को छुओ… और अंदर डालो।”
मैंने अपनी पैंट उतारी। मेरा लंड खड़ा हो चुका था, सात इंच का मोटा लंड। सीमा ने उसे हाथ में लिया और सहलाने लगी। “कितना बड़ा है तुम्हारा लंड… गाँव के लड़कों से तो बहुत मोटा है।” उसने आगे झुककर मेरे लंड को चूमा और फिर मुंह में ले लिया। उसकी जीभ लंड के सिरे पर घूम रही थी। मैंने उसके बाल पकड़कर उसके मुंह में धक्के मारे।
फिर मैंने उसे नीचे लिटाया। खलिहान की भूसी पर लेटकर उसकी टांगें फैलाईं। मैंने अपनी जीभ उसकी चूत पर रखी। चूत का स्वाद खट्टा-मीठा था। मैं चाटता रहा, क्लिटोरिस को चूसता रहा। सीमा पागल हो रही थी, “आह्ह्ह… राहुल… चोदो मुझे… अब और नहीं सहा जाता।”
मैंने अपना लंड उसकी चूत के मुंह पर रखा और एक जोरदार धक्का मारा। लंड आधा अंदर चला गया। सीमा चीखी, “अरे माँ… दर्द हो रहा है… धीरे…” मैंने रुककर उसे किस किया और फिर दूसरा धक्का। पूरा लंड अंदर घुस गया। उसकी चूत बहुत टाइट थी। मैं धीरे-धीरे चोदने लगा। हर धक्के के साथ “छप-छप” की आवाज आ रही थी।
हम पोजीशन बदलते गए। पहले मिशनरी में चोदा, फिर सीमा को कुत्ते वाली पोजीशन में कर दिया। उसकी गाँड ऊपर उठी हुई थी। मैंने पीछे से लंड डाला और जोर-जोर से चोदने लगा। उसकी गाँड के दोनों गाल लाल हो गए थे। मैंने उसकी गाँड पर थप्पड़ भी मारे। सीमा चिल्ला रही थी, “हाँ… और जोर से… मेरी चूत फाड़ दो… लंड और गहरा डालो।”
बारिश अभी भी हो रही थी। हम दोनों पसीने और बारिश से भीग चुके थे। मैंने सीमा को गोद में उठाकर दीवार से टिका दिया और खड़े-खड़े चोदा। उसके स्तन मेरे मुंह में थे, मैं चूसता जा रहा था।
आखिर में मैंने सीमा को फिर से लिटाया और तेजी से चोदना शुरू किया। “मैं झड़ने वाला हूँ सीमा…” वो बोली, “अंदर ही निकाल दो… मेरी चूत में अपना गरम रस भर दो।” मैंने जोर का अंतिम धक्का मारा और पूरा लंड अंदर छोड़कर झड़ गया। गरम-गरम वीर्य उसकी चूत में भर गया। सीमा भी झड़ गई, उसकी चूत सिकुड़ रही थी और रस निकल रहा था।
हम दोनों थककर गिर पड़े। खलिहान में अगली आधा घंटा हम गले मिले पड़े रहे। सीमा ने कहा, “राहुल, ये हमारे बीच का राज रहेगा।” मैंने वादा किया।
बाद के दिनों में भी जब भी मौका मिलता हम खलिहान या खेतों में मिलते और चोदते। सीमा की चूत अब मेरे लंड की आदी हो गई थी। वो खुद कहती, “आज मेरी गाँड मारो राहुल…” हमने गाँड मारने का मजा भी लिया। उसकी गाँड बहुत टाइट थी। पहले थोड़ा दर्द हुआ लेकिन बाद में वो खुद मांगने लगी।
गाँव की वो बारिशें और सीमा की वो नंगी यादें आज भी मुझे जगाती हैं। शहर लौटने के बाद भी जब कभी गाँव जाता हूँ, हम दोनों पुरानी जगह पर मिलते हैं और पुरानी यादें ताजा करते हैं।
(यह कहानी पूरी तरह काल्पनिक है और 18+ वयस्क पात्रों पर आधारित।)