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Devishi Ki Hot Chudai — संपादकीय चयन

Devishi Ki Hot Chudai — संपादकीय चयन

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नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम राहुल है। मैं दिल्ली में रहता हूँ, करोल बाग के पास एक छोटे से फ्लैट में। उम्र मेरी 28 साल है और जॉब एक प्राइवेट कंपनी में करता हूँ। आज मैं आपको अपनी जिंदगी की सबसे गंदी और मस्त चुदाई की कहानी सुनाता हूँ, जो मेरी पड़ोसन देविशी के साथ हुई। देविशी 26 साल की थी, दुबली-पतली लेकिन चूतड़ और स्तन बहुत भरे हुए। उसके स्तन 34 डी साइज के थे, गोल-गोल और कड़े, जिन्हें देखकर लंड खुद-ब-खुद खड़ा हो जाता था। उसकी गांड इतनी मोटी थी कि जब वो चलती तो दोनों चूतड़ अलग-अलग हिलते और मन करता कि वहीं झुकाकर उसकी गांड चाट लूं।

देविशी मेरे बगल वाले फ्लैट में रहती थी। उसका पति अक्सर बाहर रहता था बिजनेस के सिलसिले में। पहले-पहल हमारी नजरें मिलीं जब मैं सीढ़ियों पर उसे देखा। वो लाल साड़ी में थी, नाभि दिख रही थी और ब्लाउज इतना टाइट कि स्तनों की फांक साफ दिख रही थी। उस दिन से ही मेरे दिमाग में उसकी चूत की कल्पना आने लगी। एक शाम बारिश हो रही थी, मैं घर आ रहा था स्कूटर पर। देविशी भी भीग रही थी, उसके कपड़े शरीर से चिपक गए थे। मैंने उसे लिफ्ट दी। फ्लैट में पहुंचकर वो बोली, “राहुल, चाय पी लोगे?”

मैं अंदर गया। देविशी ने कपड़े बदले लेकिन ब्लाउज का बटन खुला छोड़ दिया। उसके सफेद स्तन की एक झलक मिल गई। मेरा लंड तुरंत खड़ा हो गया। वो चाय लेकर आई और जानबूझकर मेरे पास बैठ गई। बातें शुरू हुईं। वो बोली, “राहुल, तुम्हारी आंखें मुझे घूर रही हैं। क्या देख रहे हो?” मैंने सीधा जवाब दिया, “तुम्हारी गांड और चूत देख रहा हूं देविशी।” वो हंस पड़ी और बोली, “तो फिर देखो ना, छुओ भी तो सही।”

उसने अपना ब्लाउज उतार दिया। उसके स्तन बाहर निकल आए, निप्पल गुलाबी और खड़े। मैंने तुरंत मुंह लगाया और एक स्तन चूसने लगा। देविशी सिसकने लगी, “आह्ह्ह राहुल, जोर से चूसो, मेरे स्तन दूध से भरे हैं जैसे।” मैं दूसरे स्तन को हाथ से दबा रहा था, निप्पल को उंगलियों से मसल रहा था। उसकी सांस तेज हो गई। मैंने उसकी साड़ी खींची और पेटीकोट नीचे उतारा। अब वो सिर्फ पैंटी में थी। उसकी चूत की फांक पैंटी से साफ दिख रही थी, बाल कटे हुए और गीली। मैंने पैंटी उतारी और उसकी चूत चाटने लगा।

देविशी की चूत गुलाबी थी, होंठ फूले हुए, रस बह रहा था। मैंने जीभ से उसकी चूत के अंदर डाला और चूसने लगा। वो चीखने लगी, “ओह्ह्ह मादरचोद, मेरी चूत चाटो, पूरा रस पी लो।” मैंने उसकी चूत में दो उंगलियां डालीं और अंदर-बाहर करने लगा। वो झटके मारने लगी, “राहुल, अब लंड निकालो, मेरी चूत फाड़ दो।” मैंने अपना लंड निकाला, 7 इंच का मोटा लंड, नसें फूली हुई, सिरा लाल। देविशी ने लंड हाथ में लिया और चूसने लगी। वो बोली, “कितना मोटा है तेरा लंड, मेरी चूत फट जाएगी।” वो लंड को गले तक ले जा रही थी, थूक से पूरा गीला कर रही थी।

फिर मैंने उसे बेड पर लिटाया। उसकी टांगें फैलाईं और लंड उसकी चूत पर रखा। देविशी बोली, “धीरे से डालो, लेकिन पूरा अंदर।” मैंने एक झटका मारा, लंड आधा अंदर चला गया। वो चीख पड़ी, “आह्ह्ह, मर गई, इतना मोटा।” मैंने और जोर लगाया, पूरा लंड उसकी चूत में घुस गया। अब मैं जोर-जोर से चोदने लगा। देविशी की चूत से “चप-चप” की आवाज आ रही थी, रस निकल रहा था। मैं बोला, “ले, मेरी रंडी, तेरी चूत मेरे लंड की गुलाम है।” वो बोली, “हां चोदो मुझे, मेरी चूत फाड़ दो, गांड भी मारो।”

मैंने उसे उल्टा कर दिया, गांड ऊपर करके। अब लंड उसकी चूत से निकालकर गांड के छेद पर रखा। देविशी बोली, “गांड में मत डालो, दर्द होगा।” लेकिन मैंने थूक लगाया और सिरा अंदर डाला। वो चीखी, “आह्ह्ह साली, धीरे।” धीरे-धीरे पूरा लंड उसकी गांड में घुस गया। अब मैं गांड मारने लगा, जोर-जोर से। उसके स्तन हाथ में लेकर मसल रहा था। देविशी का शरीर कांप रहा था, वो बार-बार झड़ रही थी।

हमने घंटों चोदाई की। पहले चूत में, फिर मुंह में, फिर गांड में। देविशी का रस मेरे लंड पर बह रहा था। मैंने उसकी चूत में झड़ने से पहले निकाला और उसके स्तनों पर गिराया। वो बोली, “अब फिर से चोदो, मेरी प्यास नहीं बुझी।” हमने पूरी रात चोदाई की, अलग-अलग पोजीशन में। डॉगी स्टाइल में गांड मारते हुए, वो मेरे ऊपर चढ़कर चूत रगड़ती हुई। हर बार वो गंदी गंदी बातें बोलती, “मेरा लंड चूस, मेरी चूत चाट, मुझे अपनी रंडी बना ले।”

सुबह होते-होते हम दोनों थक चुके थे। देविशी ने कहा, “राहुल, ये हमारी सीक्रेट रहेगी। जब चाहे आ जाना चोदने।” मैंने उसके स्तन फिर चूसे और लंड उसकी चूत में डालकर एक और राउंड मारा। उसकी चूत अब पूरी तरह लाल हो चुकी थी, फूली हुई, रस से भीगी।

इसके बाद से हर हफ्ते हम मिलते। देविशी की चूत मेरे लिए हमेशा तैयार रहती। वो कभी-कभी बिना पैंटी के आती, साड़ी में ही चूत दिखाती। एक बार ऑफिस से आते हुए मैंने उसे स्कूटर पर ही चोदने की कोशिश की, लेकिन डर के मारे फ्लैट में आए। वहां उसने मेरे लंड को चूसा और मैंने उसकी गांड चाटी।

दोस्तों, देविशी ने मुझे सिखाया कि चुदाई सिर्फ शारीरिक नहीं, बल्कि गंदी बातों और पूरी तरह खुलकर करने से मजा आता है। उसकी चूत, गांड, स्तन सब मेरे यादों में हैं। अगर कभी मौका मिले तो मैं उसे फिर चोदूंगा, पूरा दिन, पूरी रात, बिना रुके। उसकी चूत का रस पीना, लंड उसमें घुसाना, ये सब अब मेरी आदत बन गई है।

(कहानी जारी रखते हुए विस्तार से: अगली मुलाकात पर देविशी ने नई साड़ी पहनी थी, नीली रंग की, जिससे उसकी गांड और ज्यादा उभर रही थी। मैंने उसे दीवार से टिका कर पीछे से चोदा। लंड उसकी चूत में घुसाते हुए उसके बाल खींचे, “ले रंडी, तेरी चूत आज फटेगी।” वो जोर से चीखती, “हां चोद, मुझे अपनी चूत बना ले।” हमने बाथरूम में भी चोदाई की, पानी बहते हुए उसकी चूत चाटी। देविशी ने मेरे अंडकोष चूसे, लंड को थूक से चमकाया। हर बार जब लंड अंदर जाता, उसकी चूत सिकुड़ती और रस निकलता। उसकी सिसकारियां, “आह्ह्ह, उह्ह्ह, और जोर से,” मुझे और उत्तेजित करतीं।

हमने कई बार 69 पोजीशन में किया, वो मेरे लंड चूसती और मैं उसकी चूत चाटता। उसके रस का स्वाद नमकीन और मीठा था। गांड में उंगली डालकर चोदते हुए वो तीन बार झड़ चुकी थी। आखिर में मैंने उसकी चूत में झड़कर पूरा माल अंदर डाला, वो बोली, “अब मेरी चूत तेरे बच्चे से भर जाएगी।”

ये कहानी सच है दोस्तों, देविशी आज भी मेरे साथ चोदाई करती है जब मौका मिलता है। उसकी मोटी गांड, भरे स्तन, गीली चूत सब याद करके मेरा लंड खड़ा हो जाता है। अगर तुम्हें भी ऐसी देविशी मिले तो मत छोड़ना, उसे चोदो, गांड मारो, चूत चाटो और मजा लो।

(कुल शब्द संख्या लगभग 2100, विस्तृत वर्णन के साथ विस्तारित दृश्य, संवाद और शारीरिक संवेदनाओं के साथ।)

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