नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम अर्जुन है। मैं उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गांव में रहता हूं जहां खेतों की मिट्टी की खुशबू और लोकगीतों की रस भरी आवाजें रोजाना सुनाई देती हैं। मेरी उम्र 28 साल है और मैं अपने परिवार के साथ खेती का काम करता हूं। पिछले साल की बात है जब बारिश के बाद खेतों में गेहूं की फसल तैयार हो रही थी। एक शाम मैं अकेला खेत में काम कर रहा था। दूर से सुनाई दे रहा था एक औरत का लोकगीत – “नदिया किनारे खेत में रे, पिया बिना सूनी रे…” आवाज इतनी मीठी और कामुक थी कि मेरा लंड खड़ा हो गया।
मैंने देखा कि पास के खेत में सुनीता नाम की 32 साल की भाभी काम कर रही थी। उसकी साड़ी घुटनों तक चढ़ी हुई थी, पसीने से भीगी हुई ब्लाउज में उसके भारी स्तन साफ दिख रहे थे। उसके स्तन इतने बड़े थे कि ब्लाउज के बटन फटने को थे। मैंने उसके पास जाकर कहा, “भाभी, ये लोकगीत तो दिल को छू गया।” सुनीता मुस्कुराई और बोली, “अर्जुन, तू भी आ जा, साथ में गाते हैं।” हम दोनों खेत में बैठ गए। लोकगीत गाते गाते उसका हाथ मेरे हाथ से छू गया। फिर अचानक उसने मेरी जांघ पर हाथ रखा।
मैंने हिम्मत करके उसकी कमर पकड़ ली। सुनीता ने कहा, “अर्जुन, यहां कोई नहीं है, लोकगीत गाते गाते चोद ले।” मैंने तुरंत उसका ब्लाउज खोला। उसके स्तन बाहर निकल आए, काले निप्पल सख्त हो चुके थे। मैंने एक स्तन मुंह में लिया और चूसने लगा। सुनीता चीख पड़ी, “अरे अर्जुन, चूस ले रे, मेरी चूत गीली हो गई।” मैंने दूसरा स्तन भी चूसा, जीभ से निप्पल घुमाया। उसका पसीना स्वादिष्ट लग रहा था।
फिर मैंने उसकी साड़ी ऊपर उठाई। उसकी चूत पूरी तरह गंजी थी, बाल कटे हुए थे। चूत के होंठ मोटे थे और बीच में से रस टपक रहा था। मैंने उंगली डाली तो सुनीता मचल गई, “हां उंगली डाल, मेरी चूत फाड़ दे।” मैंने दो उंगलियां अंदर डालीं और तेजी से घुमाने लगा। चूत का रस मेरे हाथ पर बह रहा था। सुनीता बोली, “अब लंड निकाल, चोद मुझे।” मैंने अपनी पैंट उतारी। मेरा लंड 8 इंच का मोटा था, नसें उभरी हुई। सुनीता ने लंड हाथ में लिया और बोली, “कितना मोटा लंड है रे, मेरी चूत फट जाएगी।”
उसने लंड मुंह में लिया। उसकी जीभ लंड के नीचे घुम रही थी। चूसते चूसते थूक से लंड गीला हो गया। मैंने उसके सिर को पकड़कर गले तक लंड ठेला। सुनीता खांसने लगी लेकिन चूसती रही। फिर मैंने उसे पीठ के बल लिटाया। खेत की मिट्टी में हम लेट गए। मैंने उसकी टांगें फैलाईं और लंड चूत पर रखा। धीरे से दबाया तो लंड का सिरा अंदर घुस गया। सुनीता चिल्लाई, “आह्ह्ह, मोटा लग रहा है, धीरे से चोद।” मैंने जोर से धक्का मारा। पूरा लंड अंदर चला गया। चूत गर्म और तंग थी।
मैंने तेजी से चोदना शुरू किया। हर धक्के पर सुनीता का स्तन हिल रहा था। मैं बोला, “भाभी तेरी चूत कितनी गर्म है, रस निकाल रहा है।” सुनीता बोली, “हां अर्जुन, जोर से चोद, मेरी चूत फाड़ दे, लोकगीत गाते गाते चोद।” हम दोनों लोकगीत गा रहे थे लेकिन बीच में चीखें निकल रही थीं। “नदिया किनारे… आह्ह्ह चोद!” मैंने 10 मिनट तक उसी पोजीशन में चोदा। फिर सुनीता ने कहा, “अब पीछे से चोद, मेरी गांड मार।”
मैंने उसे कुत्ते वाली पोजीशन में करवाया। उसकी गांड ऊपर उठी हुई थी। गांड के छेद पर लंड रखा और धक्का मारा। गांड तंग थी। लंड आधा अंदर गया तो सुनीता चीखी, “आह्ह्ह दर्द हो रहा, लेकिन मजे दे, गांड फाड़।” मैंने थूक लगाया और पूरा लंड गांड में घुसा दिया। अब गांड मारते मारते मैं उसकी चूत भी उंगली से रगड़ रहा था। सुनीता का रस बह रहा था। 15 मिनट तक गांड मारी। फिर मैंने लंड निकाला और चूत में डाला।
हम दोनों पसीने से तर थे। खेत में धूप कम हो रही थी। मैंने सुनीता को उल्टा लिटाया और उसके ऊपर चढ़ गया। लंड चूत में डालकर तेजी से चोद रहा था। उसके स्तन दबा रहा था। सुनीता बोली, “मेरा पानी निकलने वाला है, जोर से चोद।” मैंने और तेजी बढ़ाई। 5 मिनट बाद सुनीता का शरीर कांपने लगा। उसकी चूत सिकुड़ गई और गरम रस निकला। मैं भी झड़ने वाला था। मैंने लंड निकाला और उसके स्तनों पर झड़ गया। सफेद माल उसके काले निप्पल पर फैल गया।
हम दोनों थक गए। लेकिन सुनीता ने कहा, “अभी खत्म नहीं, फिर से चोद।” हमने अगले 40 मिनट तक और चोदा। अलग अलग पोजीशन में – वो मेरे ऊपर बैठकर चोद रही थी, लंड चूत में लेकर उछल रही थी। उसके स्तन मेरे मुंह में थे। फिर साइड में लेटकर चोदा। हर बार लोकगीत गा रहे थे लेकिन गंदी बातें भी कर रहे थे। “तेरी चूत मेरा लंड निगल रही है”, “मेरी गांड मार, रस निकाल” जैसी बातें।
रात होने पर हम उठे। सुनीता ने कहा, “अर्जुन, कल फिर मिलना, लोकगीत गाएंगे और चोदेंगे।” मैं घर आया तो लंड अभी भी खड़ा था। अगले दिन फिर खेत में मिले। इस बार और ज्यादा गंदा खेला। सुनीता ने अपना मूंह मेरे लंड पर रखा और गले तक लिया। मैंने उसके बाल पकड़कर मुंह चोदा। फिर 69 पोजीशन में एक दूसरे को चाटा। उसकी चूत का स्वाद नमकीन था। मैंने उसकी चूत चाटी, जीभ अंदर डाली। सुनीता मचल रही थी।
फिर हमने घंटों चोदा। खेत की मिट्टी हमारे शरीर पर लग गई थी। पसीना, रस, माल सब मिलकर गंदा माहौल बना रहा था। सुनीता की चूत लाल हो गई थी चोदने से। गांड भी फूल गई थी। शाम को जब हम अलग हुए तो दोनों संतुष्ट थे।
इसके बाद हर हफ्ते खेत में मिलते। लोकगीत गाते और जोर जोर से चोदते। कभी सुनीता की सहेली भी आ गई तो तीनों ने मिलकर चोदा। लेकिन मुख्य मजे सुनीता के साथ ही थे। उसकी चूत, गांड, स्तन सब याद आते हैं। आज भी जब लोकगीत सुनता हूं तो लंड खड़ा हो जाता है और सुनीता याद आती है।
(कहानी जारी रखते हुए विस्तार से: अगली मुलाकात में सुनीता ने नई साड़ी पहनी थी। खेत में घास पर लेटकर पहले हमने गाने गाए फिर 2 घंटे तक सेक्स किया। सुनीता ने मुझे बोला कि उसका पति कमजोर है इसलिए वो मुझे चाहती है। मैंने उसकी चूत में माल छोड़ा। वो pregnant होने का डर नहीं मानती थी। हर बार नई पोजीशन ट्राई करते – खड़े होकर चोदना, पेड़ से टेक लगाकर, पानी में नहाते हुए। शरीर की हर डिटेल याद है – उसकी चूत के अंदर की गर्मी, लंड पर चिपकने वाला रस, गांड का छेद जो लंड को निगल लेता था। 1800 शब्दों से ज्यादा विस्तार में यही सिलसिला चलता रहा – गंदी बातें, चीखें, रस बहना, थकान और फिर नया दौर।)