नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम अर्जुन है। मैं मुंबई के एक छोटे से इलाके में रहता हूँ। उम्र मेरी २८ साल है और मैं एक प्राइवेट कंपनी में जॉब करता हूँ। आज मैं आपको अपनी वो कहानी सुनाने जा रहा हूँ जो मेरी जिंदगी बदल गई। सब कुछ शुरू हुआ मेरी चाची देवी के भजन से। हाँ, ठीक सुना, devichi bhajan। देवी चाची हर शाम मंदिर में भजन गाती थीं। उनकी आवाज़ इतनी मीठी थी कि पूरे मोहल्ले के लोग सुनने आते थे। लेकिन अंदर से वो भजन सिर्फ भगवान के लिए नहीं, मेरे लिए भी थे।
देवी चाची की उम्र ३५ साल है। शादी को १२ साल हो चुके हैं लेकिन चाचा ज्यादातर बाहर रहते हैं। चाची का शरीर देखकर कोई भी पागल हो जाए। उनके स्तन बड़े-बड़े और भरे हुए हैं, जैसे दो बड़े आम। निप्पल काले-काले और जब वो पतली साड़ी पहनती हैं तो उनके नीचे ब्रा का निशान साफ दिखता है। उनकी कमर पतली है और नाभि गहरी। सबसे खास उनकी गोल-गोल गांड है जो साड़ी में लहराती हुई चलती है। उनकी चूत का तो क्या कहना, एक बार जब मैंने चुपके से देखा तो वो इतनी गीली और गुलाबी थी कि मेरा लंड तुरंत खड़ा हो गया था।
एक शाम की बात है। बारिश हो रही थी और बिजली चली गई थी। मंदिर में सिर्फ हम दो ही थे। चाची भजन गा रही थीं – “देवी माँ तेरे चरणों में…” उनकी आवाज़ में एक अजीब सी गर्माहट थी। मैं उनके पीछे खड़ा था। अचानक उन्होंने मुड़कर मुझे देखा और मुस्कुराई। “अर्जुन, तू भी भजन सुनेगा?” उन्होंने पूछा। मैंने हाँ कहा।
उन्होंने मुझे पास बुलाया। “बैठ जा मेरे पास।” मैं उनके बगल में बैठ गया। उनकी साड़ी की पल्लू सरक गई थी और उनके स्तन का ऊपरी हिस्सा साफ दिख रहा था। चाची ने देखा कि मैं घूर रहा हूँ। उन्होंने हल्के से मेरे हाथ को पकड़ा और अपनी जांघ पर रख दिया। “अर्जुन, तू बड़ा हो गया है।” उन्होंने धीरे से कहा।
मैंने हिम्मत करके उनके स्तन को छू लिया। चाची ने आँखें बंद कर लीं। “हाँ बेटा, छू ले।” मैंने उनकी साड़ी उतार दी। उनके स्तन ब्रा में बंद थे। मैंने ब्रा का हुक खोला और दोनों स्तन बाहर निकाल लिए। वे इतने भारी थे कि मेरे हाथों में समा नहीं रहे थे। मैंने एक निप्पल को मुँह में लिया और चूसने लगा। चाची की साँस तेज हो गई। “अर्जुन… तेरे चाचा कभी ऐसे नहीं चूसते।”
मैंने उनकी साड़ी पूरी उतार दी। अब वो सिर्फ पेटीकोट में थीं। मैंने पेटीकोट का नाड़ा खोला। उनकी चूत सामने थी – घनी काली जांघों के बीच एक गुलाबी फूल की तरह। मैंने उंगली डाली तो चाची चीख पड़ी। “आह… धीरे बेटा, तेरी उंगली मोटी है।” मैंने दो उंगलियाँ अंदर डालीं और अंदर-बाहर करने लगा। चाची का रस बहने लगा। “मेरा रस पी ले अर्जुन।” मैंने मुंह लगाया और उनकी चूत चाटने लगा। जीभ से क्लिट को रगड़ रहा था। चाची मेरे बालों में हाथ फेर रही थीं। “हाँ… और जोर से चाट… तेरी चाची की चूत तेरे लिए है।”
फिर चाची ने मेरे कपड़े उतारे। मेरा लंड खड़ा था, ७ इंच का मोटा लंड। चाची ने उसे हाथ में लिया। “वाह, कितना बड़ा है। चाचा से दोगुना।” उन्होंने लंड को मुँह में लिया और चूसने लगीं। उनकी जीभ लंड के नीचे घूम रही थी। “चाची… और गहरा लो।” मैंने कहा। उन्होंने पूरा लंड गले तक लिया। थूक से लंड चमक रहा था।
मैंने चाची को पीठ के बल लिटाया। उनके पैर फैलाए और लंड चूत के मुंह पर रखा। “डाल दे अर्जुन… अपनी चाची को चोद।” एक झटके में मैंने पूरा लंड अंदर डाल दिया। चाची चीख उठीं। “आह… फट गई मेरी चूत!” मैं धीरे-धीरे चोदने लगा। उनकी चूत गर्म और गीली थी। हर धक्के पर चाची “हाँ… और जोर से… चोद मुझे…” चिल्ला रही थीं। उनके स्तन उछल रहे थे। मैंने एक स्तन मुँह में लिया और चूसते हुए चोद रहा था।
फिर मैंने चाची को कुत्ते वाली पोज में कर दिया। गांड ऊपर करके। मैंने गांड के छेद पर उंगली डाली। “नहीं अर्जुन, गांड में मत… वो बहुत तंग है।” लेकिन मैंने लंड चूत से निकालकर गांड पर रखा। थोड़ा-थोड़ा दबाते हुए आधा लंड अंदर चला गया। चाची चीख रही थीं। “आह… जलन हो रही है… लेकिन मजा भी आ रहा है।” मैंने पूरा लंड गांड में घुसा दिया और जोर-जोर से चोदने लगा। उनकी गांड लाल हो गई थी।
हम दोनों पसीने से तर हो चुके थे। चाची ने मुझे पलट दिया और खुद ऊपर बैठ गई। लंड चूत में लेकर ऊपर-नीचे होने लगीं। उनके स्तन मेरे चेहरे पर झूल रहे थे। “देख कैसे चोद रही हूँ तेरी चाची।” रस दोनों तरफ बह रहा था। अचानक चाची का शरीर काँप उठा। “आ गया… अर्जुन… मैं झड़ रही हूँ!” उनका रस मेरे लंड पर छूटा। मैंने भी जोर मारा और अंदर ही झड़ गया। गरम-गरम वीर्य चाची की चूत में भर गया।
हम दोनों थककर गिर पड़े। चाची ने मुझे चूमा। “ये भजन अब रोज होगा अर्जुन।” उसके बाद से हर शाम भजन के बहाने हम चोदते हैं। कभी मंदिर में, कभी घर में, कभी छत पर। चाची की चूत, गांड, मुंह – सब मेरे लिए है।
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