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जानिए: Yeh Naitik And Akshara Ki Mehndi – Mehndi Ki Raat Ki Chut-Chudai — संपादकीय चयन

जानिए: Yeh Naitik And Akshara Ki Mehndi – Mehndi Ki Raat Ki Chut-Chudai — संपादकीय चयन

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नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम रोहन है। मैं दिल्ली में रहता हूँ और एक सॉफ्टवेयर कंपनी में जॉब करता हूँ। ये कहानी मेरी असली जिंदगी की है, जब मेरी बहन अक्षरा की मेहंदी की रात हुई। अक्षरा की शादी नितिक से तय हुई थी, जो मेरा बचपन का दोस्त भी था। मेहंदी समारोह हमारे घर में ही लग रहा था, जयपुर स्टाइल में सजावट, हल्दी का रंग, और रात भर का म्यूजिक। लेकिन उस रात कुछ ऐसा हुआ जो मैं कभी नहीं भूल सकता।

मेहंदी शुरू हुई तो अक्षरा लाल रंग की लहंगा पहने बैठी थी। उसके स्तन थोड़े उभरे हुए थे, और उसकी कमर की नाभि दिख रही थी। नितिक भी आ गया था, सूट पहने। मैं और अक्षरा बचपन से बहुत करीब थे, लेकिन शादी के बाद सब कुछ बदल गया। रात के दस बजे के आसपास, मेहंदी वाले चले गए और परिवार वाले नीचे सो गए। अक्षरा की सहेलियाँ भी थककर सो गईं। मैं ऊपर अपनी रूम में था जब अक्षरा ने मुझे व्हाट्सएप किया – “रोहन भाई, ऊपर आ जा, मेहंदी सूख रही है।”

मैं ऊपर गया तो अक्षरा अकेली थी। उसने लहंगा उतार दिया था और सिर्फ चोली और पेटीकोट में थी। “रोहन, नितिक अभी आया नहीं, और मुझे बहुत गरम लग रहा है,” उसने कहा। उसकी आवाज में कुछ और था। मैंने पूछा, “क्या बात है?” अक्षरा ने मेरी तरफ देखा और बोली, “तू तो जानता है ना, मेरी शादी से पहले आखिरी मौका।”

उसने मेरी तरफ हाथ बढ़ाया। मैं हिल गया। “अक्षरा, ये गलत है,” मैंने कहा। लेकिन उसने मेरी कमर पकड़ ली। “रोहन, नितिक का लंड छोटा है, तू तो जानता है हम दोनों बचपन से कितने करीब थे। आज मेहंदी की रात, मेरी चूत गीली हो रही है।”

उसने अपना पेटीकोट खोल दिया। उसकी चूत साफ शेव की हुई थी, और होंठों से रस टपक रहा था। मैंने उसे दीवार से लगाया और उसके स्तनों को चोली के ऊपर से दबाया। “अक्षरा, तेरी मम्मे कितनी बड़ी हो गई हैं,” मैंने कहा। उसने मेरी पैंट खोली और मेरा लंड बाहर निकाला। “वाह रोहन, तेरा लंड तो नितिक से दोगुना मोटा है।”

उसने घुटनों के बल बैठकर मेरा लंड मुंह में लिया। उसकी जीभ मेरे लंड के सिरे पर घूम रही थी। “चूस अक्षरा, पूरा निगल ले,” मैंने कहा। वह जोर-जोर से चूस रही थी, थूक निकल रहा था। मैंने उसके बाल पकड़कर उसके मुंह में ठोकना शुरू किया। “गले तक ले, रांड।”

फिर मैंने उसे बिस्तर पर लिटाया। उसकी चूत चाटने लगा। उसकी चूत का स्वाद नमकीन था, और वह चिल्ला रही थी, “रोहन, मेरी चूत चाट, अंदर जीभ डाल।” मैंने उसकी चूत के होंठ चूसे और क्लिटोरिस को काटा। अक्षरा का शरीर काँप रहा था। “ओह भाई, तेरी जीभ से मेरी चूत पिघल रही है।”

मैंने अपना लंड उसकी चूत पर रगड़ा। “डाल दे रोहन, मेरी चूत फाड़ दे।” मैंने एक झटके में पूरा लंड अंदर घुसा दिया। अक्षरा चीख पड़ी, “आह्ह्ह, माँ! इतना मोटा लंड, मेरी चूत फट गई।” मैं धीरे-धीरे चोदने लगा। “ले, तेरी चूत में मेरा लंड।” उसकी चूत गर्म और तंग थी। हर धक्के में उसकी चूत से चप-चप की आवाज आ रही थी।

मैंने उसकी टाँगें अपने कंधों पर रखीं और जोर-जोर से चोदने लगा। “चोद मुझे रोहन, मेहंदी लगी हुई है लेकिन तू मेरी चूत में मेहंदी का रंग लगा दे।” अक्षरा के स्तन उछल रहे थे। मैंने उन्हें चूसा, निप्पल काटे। “तेरी मम्मे दूध से भरी हुई हैं,” मैंने कहा।

हम पोजीशन बदलते रहे। पहले डॉगी स्टाइल में। अक्षरा की गोल-गोल गाँड मेरे सामने थी। मैंने उसकी गाँड पर थप्पड़ मारे। “ले रंडी, तेरी गाँड लाल हो गई।” मेरा लंड उसकी चूत में अंदर-बाहर हो रहा था। अक्षरा चिल्ला रही थी, “और जोर से, मेरी चूत का रस निकाल दे।”

फिर मैंने उसे ऊपर बैठाया। अक्षरा मेरे लंड पर उछल रही थी। “रोहन, तेरा लंड मेरी चूत को फाड़ रहा है।” मैंने उसकी कमर पकड़कर ऊपर-नीचे किया। उसकी चूत से रस मेरे लंड पर बह रहा था।

हम घंटों चोदते रहे। अक्षरा का पहला ऑर्गेज्म आया तो उसकी चूत ने मेरे लंड को निचोड़ लिया। “आह्ह्ह रोहन, मैं झड़ गई!” मैंने भी रफ्तार बढ़ाई। “ले, मेरे लंड का रस तेरी चूत में भर दूँ?” “हाँ, अंदर ही निकाल, मेरी चूत प्यासी है।”

मैंने जोर का झटका मारा और अपना गरम-गरम वीर्य उसकी चूत में भर दिया। अक्षरा काँप गई। “ओह, इतना गरम रस, मेरी चूत भर गई।”

लेकिन हम रुके नहीं। मैंने उसे फिर चाटा, उसकी चूत से मेरा वीर्य चाटकर उसका मुंह चूम लिया। फिर उसने मेरे लंड को फिर खड़ा किया और ऊपर चढ़ गई। हम पूरी रात चोदते रहे। मेहंदी की महक, पसीने की बू, और चूत-लंड की आवाजें कमरे में गूंज रही थीं।

सुबह होने पर अक्षरा ने कहा, “रोहन, ये मेहंदी की रात मेरी जिंदगी की सबसे गंदी और मजेदार रात थी। नितिक को कभी पता नहीं चलेगा।” मैंने उसे गले लगाया। “अक्षरा, तेरी चूत अब मेरी है।”

ये कहानी यहीं खत्म नहीं होती, लेकिन मेहंदी की वो रात हम दोनों के लिए हमेशा यादगार रही।

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