नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम राहुल है। मैं दिल्ली में एक इंजीनियरिंग कॉलेज में पढ़ता हूँ। उम्र इक्कीस साल है और शरीर कसकसा हुआ है क्योंकि रोज जिम जाता हूँ। कॉलेज में बहुत सी लड़कियाँ हैं लेकिन मेरी नजर हमेशा प्रिया और अनन्या पर टिकी रहती थी। दोनों बेहद खूबसूरत इंडियन गर्ल्स थीं। प्रिया की उम्र बीस साल, गोरी चमड़ी, मोटे मोटे स्तन जो टी-शर्ट में फटते लगते, पतली कमर और गोल-गोल गोलियाँ जैसी गांड। अनन्या भी कम नहीं, काली-भूरी लंबी बाल, मोटी जांघें और ऐसी चूत जिसकी कल्पना करके ही मेरा लंड खड़ा हो जाता।
हम तीनों एक ही प्रोजेक्ट ग्रुप में थे। एक शाम लाइब्रेरी बंद होने के बाद हम सब मेरे PG फ्लैट पर पढ़ने चले आए। बारिश हो रही थी, मोसम गर्म और नम। प्रिया ने कहा, “राहुल, थोड़ा पानी पिला दो ना, गला सूख रहा है।” मैंने पानी दिया और बैठे बातें करने लगे। बातें धीरे-धीरे सेक्स पर आ गईं। अनन्या हँसते हुए बोली, “राहुल, तूने कभी किसी इंडियन गर्ल को चोदा है?” मेरा लंड तुरंत खड़ा हो गया। मैंने सीधा जवाब दिया, “नहीं, लेकिन तुम दोनों को चोदने का सपना रोज देखता हूँ।”
प्रिया शरमा गई लेकिन उसकी आँखें चमक रही थीं। उसने अपनी टी-शर्ट थोड़ी ऊपर खींची और बोली, “फिर आज सपना पूरा कर ले।” मैंने प्रिया को खींचकर अपने पास बैठाया। उसके स्तन दबाते हुए मैंने उसके होंठों पर अपना मुँह लगा दिया। जीभ से जीभ लड़ाने लगे। अनन्या भी पास आ गई और मेरी जिप खोलकर मेरा मोटा लंड बाहर निकाल लिया। “वाह, कितना बड़ा है तेरा लंड!” उसने कहा और तुरंत मुँह में ले लिया। चूसने लगी, लार टपक रही थी।
प्रिया की टी-शर्ट उतार दी। उसके ब्रा के अंदर से बड़े-बड़े स्तन निकले। मैंने एक स्तन मुँह में लिया और चूसने लगा। निप्पल कड़े हो गए। प्रिया सिसकारियाँ ले रही थी, “आह्ह… राहुल, चूस ले मेरे स्तन… चूत में आग लग रही है।” मैंने उसकी जींस खोली। अंदर पिंक कलर की पैंटी थी, जो पहले से ही गीली हो चुकी थी। मैंने पैंटी उतारी और उसकी चूत देखी। बाल कटे हुए, होंठ फूले हुए, रस टपक रहा था। उंगली डाली तो प्रिया चीख पड़ी, “उंगली मत डाल, सीधा लंड घुसा दे!”
अनन्या अभी भी मेरा लंड चूस रही थी। मैंने उसे भी नंगा कर दिया। उसकी गांड बड़ी और गोल थी। मैंने दोनों लड़कियों को बिस्तर पर लिटाया। पहले प्रिया की चूत चाटने लगा। जीभ से क्लिटोरिस रगड़ रहा था। प्रिया चीख रही थी, “हाँ… चाट मेरी गीली चूत… और जोर से!” उसकी चूत से रस निकल रहा था, मैं पी रहा था। अनन्या ने मेरे लंड पर थूक लगाकर हिलाना शुरू कर दिया।
फिर मैंने प्रिया की टाँगें फैलाईं और अपना मोटा लंड उसकी चूत के मुंह पर रखा। एक जोरदार झटका मारा। लंड आधा अंदर घुस गया। प्रिया चीखी, “आह्ह… फट गई मेरी चूत! धीरे… मेरा पहला बार है!” मैंने धीरे-धीरे पूरा लंड घुसा दिया। चूत गर्म और टाइट थी। चोदने लगा, थाप-थाप की आवाजें आने लगीं। प्रिया के स्तन उछल रहे थे। मैंने उनको दबाते हुए जोर-जोर से चोदा। “ले, ले मेरे लंड की मार… इंडियन गर्ल की चूत कितनी टाइट होती है!”
अनन्या ने अपना मुँह प्रिया की चूत के पास लाया और मेरे लंड को चाटने लगी जबकि मैं चोद रहा था। लंड बाहर निकालता तो अनन्या चूस लेती, फिर फिर से प्रिया की चूत में घुसा देता। प्रिया का पहला झड़ने का समय आ गया। वो चीखी, “आ रहा है… मैं झड़ रही हूँ!” उसकी चूत ने रस छोड़ा, मेरे लंड पर बह गया।
अब बारी अनन्या की थी। मैंने उसे कुत्ते वाली स्टाइल में घुमाया। उसकी गांड ऊपर उठाई और लंड उसकी चूत में घुसा दिया। अनन्या की चूत और भी गीली थी। मैंने उसकी गांड के दोनों हाथों से पकड़कर जोर-जोर से चोदना शुरू किया। थाप-थाप, थाप-थाप… अनन्या चिल्ला रही थी, “चोद मुझे… मेरी गांड भी मार… पूरी तरह चोद डाल!” मैंने लंड निकालकर उसकी गांड में उंगली डाली। थोड़ा तेल लगाकर लंड गांड में घुसाने लगा। अनन्या दर्द से चीखी लेकिन फिर मजे लेने लगी।
प्रिया ने नीचे बैठकर अनन्या की चूत चाटनी शुरू कर दी। तीनों के शरीर पसीने से तर थे। मैंने अनन्या को पीछे से चोदा और प्रिया के मुँह में लंड डालकर चूसवाया। लंड से चूत का रस और लार मिलकर चिपचिपा हो रहा था।
घंटों चोदा। प्रिया को एक बार और चोदा, इस बार उसकी गांड मारकर। अनन्या को मिशनरी पोजीशन में लिटाकर उसके स्तन दबाते हुए लंड घुसाया। दोनों लड़कियाँ बारी-बारी से झड़ रही थीं। आखिर में मैं भी झड़ने वाला था। दोनों के सामने घुटनों के बल बैठ गईं और मैंने अपना लंड हिलाते हुए दोनों के स्तनों और मुँह पर गरम-गरम वीर्य छोड़ दिया। वे दोनों लंड चूसकर बचा हुआ रस पी गईं।
हम तीनों थककर बिस्तर पर गिर पड़े। प्रिया बोली, “राहुल, आज से तू हम दोनों का बॉयफ्रेंड है। रोज चोदना है हमें।” अनन्या हँसी, “हाँ, इंडियन गर्ल्स की रोमांस यही होती है… गंदी, गर्म और पूरी चुदाई वाली।”
रात भर हम चोदते रहे। सुबह तक तीनों नंगे पड़े थे, चूत और लंड दर्द कर रहे थे लेकिन मजे से। दिल्ली की इस गर्मी में हमारी देसी चुदाई की शुरुआत हो चुकी थी। अब हर हफ्ते नए-नए तरीकों से हम चोदते, चाटते और झड़ते। प्रिया और अनन्या दोनों मेरी बन चुकी थीं। उनका रोमांस अब सिर्फ किताबों में नहीं, मेरे लंड और उनकी चूत में था।
(कहानी जारी रखने के लिए सोचता हूँ कि अगली बार हम तीनों स्कूटी पर घूमते हुए जंगल में रुककर फिर चोदेंगे, लेकिन अभी इतना ही काफी है।)