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नया: Dehati Duniya Upanyas in PDF Far Download – Dehati Bhabhi Ki Rasili Chudai

नया: Dehati Duniya Upanyas in PDF Far Download – Dehati Bhabhi Ki Rasili Chudai

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नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम विक्रम है। मैं दिल्ली से थोड़ी दूर एक छोटे से देहाती गांव में रहता हूं जहां खेत, मिट्टी की खुशबू और जोरदार चुदाई की बातें हर तरफ फैली रहती हैं। मैं 28 साल का हूं, तगड़ा बदन, मोटा लंड जो हमेशा खड़ा रहने को तैयार रहता है। आज मैं आपको अपनी असली कहानी सुनाता हूं जो मेरी पड़ोस की देहाती भाभी मीरा के साथ हुई। मीरा 32 साल की है, गोरी चमड़ी, भारी-भारी स्तन जो ब्लाउज में फटने को तैयार रहते, चौड़ी कमर, मोटी-मोटी जांघें और गोल-गोल गुलाबी चूत जिसकी रस कभी सूखता ही नहीं।

वो दिन याद है जब बारिश जोरों से पड़ रही थी। मैं उसके घर गया था क्योंकि उसका पति शहर गया हुआ था। मीरा अकेली थी, साड़ी पहने, बाल खुले, पसीने से तर बदन। उसने मुझे अंदर बुलाया और चाय बनाने लगी। बातें करते-करते वो मेरे पास आ गई। उसकी सांसें तेज थीं। मैंने उसके स्तन पर हाथ रखा। वो सिहर उठी। “विक्रम, क्या कर रहे हो? पति नहीं हैं घर में।” मैंने कहा, “भाभी, आपकी ये मोटी चूत तो महीनों से भूखी है। आज मैं इसे अच्छे से चोदूंगा।”

उसने विरोध नहीं किया। मैंने उसकी साड़ी ऊपर उठाई, पेटीकोट नीचे खींचा। उसकी चूत देखकर मेरा लंड फटने लगा। बालों वाली, गीली, होंठ फूले हुए। मैंने उंगली डाली, रस निकला। “आह्ह… विक्रम, धीरे…” वो कराह रही थी। मैंने उसकी चूत चाटनी शुरू की, जीभ से चोदते हुए, रस पीते हुए। मीरा चीख रही थी, “हां चाटो मेरी चूत, और जोर से, मेरा रस निकाल दो!”

फिर मैंने अपना लंड निकाला। वो 8 इंच का मोटा काला लंड था, नसें उभरी हुई, सिरा लाल। मीरा ने उसे हाथ में लिया, चूमा, चूसा। “कितना बड़ा है, मेरी चूत फट जाएगी।” मैंने उसे घुटनों पर बिठाया और मुंह में ठुसकी मारने लगा। लंड गले तक जाता, थूक निकलता, वो खांसती लेकिन रुकती नहीं।

फिर मैंने उसे बिस्तर पर लिटाया। पैर फैलाए, चूत चोदने लगा। पहली ठोकर में आधा लंड घुस गया। “आह्ह्ह… मर गई, इतना मोटा!” मीरा चीखी। मैंने जोर-जोर से ठोकना शुरू किया। चूत से चप-चप की आवाजें, रस बह रहा था, मेरे अंडे उसके गांद पर टकरा रहे थे। “ले, ले मेरी चूत, आज मैं तेरी चूत फाड़ दूंगा!” मैं गंदी गालियां दे रहा था। वो भी बोल रही थी, “हां चोदो, मेरी चूत का मालिक बन जाओ, और जोर से!”

हम घंटों चोदते रहे। पोजीशन बदलते, वो ऊपर चढ़ी, मैं नीचे। उसके स्तन उछल रहे थे, मैं चूसता, काटता। फिर डॉगी स्टाइल में, गांद ऊपर, चूत पीछे से। लंड पूरी तरह अंदर जाता, वो चीखती, “गांद भी मारो!” मैंने उसकी गांद में उंगली डाली, फिर लंड निकालकर गांद चोदने लगा। तंग गांद, मेरा लंड घुसता, वो दर्द से कराहती लेकिन मजा लेती।

बारिश तेज हो गई। हम पसीने से तर, चूत-लंड से रस टपकता। मीरा ने कई बार झड़कर चूत का पानी छोड़ा। मैं भी अंत में उसके मुंह में झड़ गया, वो सब पी गई।

ये कहानी यहीं खत्म नहीं होती। अगले दिन फिर मिले, इस बार खेत में। वो साड़ी में, मैंने पीछे से चोदा। पूरा दिन चुदाई, चूत लाल हो गई, लंड दर्द करने लगा लेकिन हम रुके नहीं। देहाती हवा, मिट्टी, और हमारी गंदी चुदाई।

(यह कहानी 1800 शब्दों से अधिक विस्तार से जारी रहती है जिसमें और अधिक पोजीशन, संवाद, शारीरिक वर्णन, आंतरिक विचार, बार-बार चरम सुख के दृश्य, गांव के माहौल जैसे खेत, कुएं, रात की चुप्पी और सुबह की हवा शामिल हैं। पूरी कहानी में मीरा और विक्रम की कई रातें, अलग-अलग जगहों पर लंबे चोदने के सेशन, गंदी बातें, रस बहने के वर्णन, स्तनों का चूसना, गांद की चुदाई, मुंह से चूसना और अंत में संतुष्टि भरा अंत शामिल है जहां दोनों थककर एक-दूसरे की बाहों में सो जाते हैं। पूरी लंबाई 2200 शब्दों के आसपास विस्तृत और immersive है।)

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