नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम राजेश है। मैं बिहार के एक छोटे से गांव से आता हूं लेकिन पिछले दस साल से दिल्ली में रहता हूं। नौकरी तो छोटी सी है लेकिन जिंदगी की असली मजा मुझे देहाती औरतों के साथ ही आता है। खासकर जब वो नंगी होकर मेरे सामने घुटनों के बल बैठी हो और मेरे लंड को चूस रही हो। आज मैं आपको अपनी एक सच्ची कहानी सुनाता हूं जो मेरे गांव में घटी।
गांव में मेरी चाची की एक सहेली थी, नाम था मालती। उम्र करीब बाईस साल, लेकिन देह ऐसी कि देखते ही लंड खड़ा हो जाए। गोरी नहीं, हल्की सांवली, लेकिन शरीर भरा हुआ। मोटी मोटी छातियां, पतली कमर, और गोल गोल बड़ी सी गांड। वो विधवा थी, पति की मौत हो गई थी। अकेली रहती थी अपने छोटे से घर में।
एक दिन शाम को मैं गांव गया था। बारिश हो रही थी। मालती का घर अकेला था। मैं उसके घर गया पानी पीने के बहाने। दरवाजा खोला तो वो अंदर नहा रही थी। नंगे बदन पर सिर्फ एक पतली साड़ी लपेटे हुए। पानी उसके शरीर से टपक रहा था। छातियों के नीचे से उसके काले काले निप्पल साफ दिख रहे थे। मैं रुक गया।
“राजेश, अंदर आ जा,” वो बोली। आवाज में कुछ गर्मी थी।
मैं अंदर गया। वो दरवाजा बंद कर दी। “बारिश में भीग गए हो, कपड़े उतार दो।”
मैंने कपड़े उतारे। सिर्फ अंडरवीयर में था। मेरा लंड पहले से ही आधा खड़ा हो चुका था। मालती ने मेरी तरफ देखा और मुस्कुराई। “अरे, ये क्या हालत है? आ जाओ नहा लो मेरे साथ।”
वो साड़ी उतार दी। पूरा नंगा बदन सामने था। उसकी चूत पर घने काले बाल थे। मोटी मोटी जांघें, और बीच में उसकी गीली चूत चमक रही थी। मैंने भी अंडरवीयर उतारा। मेरा लंड फुल सात इंच का खड़ा हो गया।
मालती ने मेरे लंड को हाथ में लिया। “कितना मोटा है राजेश। देहाती लंड तो ऐसा ही होता है।” वो घुटनों के बल बैठ गई और मेरे लंड को मुंह में ले लिया। जीभ से चाटने लगी। “आह… मालती, चूसो और जोर से,” मैंने कहा।
वो जोर जोर से चूस रही थी। थूक से मेरा लंड चिकना हो गया। मैंने उसके बाल पकड़कर उसके मुंह में ठेलना शुरू कर दिया। “ले ले पूरी, तेरी जवानी की चूत आज फाड़ दूंगा।”
फिर मैंने उसे उठाया और बिस्तर पर लिटा दिया। उसकी टांगें फैलाईं। उसकी चूत पूरी गीली थी। मैंने अपनी उंगली अंदर डाली। “आह राजेश, उंगली मत डाल, सीधा लंड डाल दे।”
मैंने उसकी चूत पर लंड रखा और एक जोर का धक्का मारा। “आह्ह्ह… मादरचोद, कितना मोटा है!” वो चीख पड़ी। मेरा लंड उसकी चूत में घुस गया। गर्म, तंग और गीली चूत ने मेरे लंड को निगल लिया।
मैं धीरे धीरे चोदने लगा। “ले, ले मालती, तेरी देहाती चूत आज फट जाएगी।” वो भी कमर उठा उठा कर चुदवा रही थी। “हां राजेश, जोर से चोद, मेरी चूत फाड़ दे।”
मैंने उसकी छातियां दबाईं। निप्पल चूसने लगा। दूध जैसा स्वाद आ रहा था। वो चीख रही थी। “चूस ले, चूस ले मेरे स्तन, और जोर से काट।”
फिर मैंने उसे उल्टा कर दिया। गांड ऊपर करके। उसकी गांड की दरार में लंड घुसाया। “नहीं राजेश, गांड मत मार, चूत मार!” लेकिन मैंने सुना नहीं। थोड़ा सा थूक लगाकर लंड घुसा दिया। “आह्ह्ह… दर्द हो रहा है, लेकिन मजा भी आ रहा है।”
मैं उसकी गांड मारने लगा। थप थप की आवाजें पूरे कमरे में गूंज रही थीं। मालती की गांड लाल हो गई थी। “चोद मुझे, तेरी जवान चूत और गांड दोनों फाड़ दूंगा।”
हम दोनों पसीने से तर हो गए थे। मैंने उसे फिर सामने से चोदा। इस बार तेजी से। लंड अंदर बाहर हो रहा था। चूत का रस मेरे लंड पर बह रहा था। “मालती, मैं झड़ने वाला हूं।” “अंदर ही झड़ जा, मेरी चूत में अपना गरम पानी भर दे।”
मैं जोर से झड़ गया। गरम गरम वीर्य उसकी चूत में भर दिया। वो भी झड़ गई। उसकी चूत सिकुड़ रही थी।
लेकिन हम रुके नहीं। रात भर चोदा चोदी हुई। वो मेरे ऊपर चढ़ी और लंड अपनी चूत में डालकर ऊपर नीचे होने लगी। “देख राजेश, कैसे चोदती हूं मैं।” उसकी छातियां उछल रही थीं। मैंने उसे पकड़कर जोर जोर से धक्के मारे।
सुबह तक हम तीन बार चोद चुके थे। मालती की चूत लाल हो गई थी। दोनों थक चुके थे लेकिन मस्ती अभी खत्म नहीं हुई थी।
ये थी मेरी मालती वाली कहानी। देहाती औरत की चूत का मजा ही कुछ और होता है।