नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम अमित है। मैं दिल्ली में एक छोटी सी जॉब करता हूँ। पिछले साल की बात है जब मेरे पापा बीमार पड़े तो मुझे उनके गाँव जाना पड़ा। गाँव छोटा सा था, हर तरफ खेत और मिट्टी की सड़कें। वहाँ एक लड़की रहती थी जिसका नाम था राधा। वो उम्र में उन्नीस साल की थी, लेकिन उसके शरीर में इतना जादू था कि देखते ही लंड खड़ा हो जाता। राधा को मंगा पढ़ने का शौक था। वो गाँव में छुपकर जापानी कार्टून वाली किताबें पढ़ती थी, जो किसी रिश्तेदार ने शहर से लाकर दी थीं।
मैं जब गाँव पहुँचा तो पहले दिन ही राधा मिली। वो कुएँ पर पानी भर रही थी। उसकी छोटी सी कमीज में उसके स्तन साफ दिख रहे थे। गोल-गोल, कड़े और भरे हुए। उसकी कमर पतली थी और गांड थोड़ी भारी, जैसे कोई गाँव की लड़की हो लेकिन शरीर शहर जैसा। मैंने नमस्ते किया तो वो शरमा गई। बातें हुईं तो पता चला कि वो मंगा पढ़ती है। उसकी आँखों में वो चमक थी जो बताती थी कि वो औरत बन चुकी है।
दूसरे दिन मैं उसके घर के पास गया। बारिश हो रही थी। राधा अकेली थी क्योंकि उसके माँ-बाप खेत में गए थे। मैंने कहा, “राधा, मंगा दिखाओ ना।” वो हँसी और मुझे अंदर बुला लिया। छोटे से कमरे में बिस्तर पर हम दोनों बैठ गए। वो किताब खोलकर दिखाने लगी। लेकिन मेरी नजर उसकी छाती पर थी। उसकी साँसें तेज हो रही थीं। अचानक बिजली गई और अंधेरा हो गया।
राधा ने कहा, “अमित भैया, डर लग रहा है।” मैंने उसके कंधे पर हाथ रखा। वो सिकुड़ गई लेकिन हटी नहीं। फिर मैंने उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए। वो चुप रही। मैंने उसकी जीभ चूसी। वो भी चूसने लगी। उसके मुंह से हल्की सी सांस निकली, “आह्ह…” मैंने उसकी कमीज ऊपर उठाई। उसके स्तन बाहर निकल आए। सफेद, नरम और निप्पल गुलाबी। मैंने एक निप्पल मुंह में लिया और चूसने लगा। राधा कराहने लगी, “अमित… धीरे… मेरा चूचू दर्द कर रहा है।”
मैंने उसकी साड़ी खोल दी। अंदर कुछ नहीं पहना था। उसकी चूत साफ, बिना बालों वाली, गुलाबी और चमकदार। मैंने उंगली डाली तो रस निकल रहा था। “राधा, तेरी चूत कितनी गीली है।” वो बोली, “तुम्हारे लंड से भर दो ना।” मैंने अपना लंड निकाला। सात इंच का मोटा लंड, नसें उभरी हुई। राधा ने उसे हाथ में लिया और सहलाने लगी। “कितना बड़ा है, अमित। मेरी छोटी सी चूत फट जाएगी।”
मैंने उसे लेटाया और लंड उसकी चूत पर रगड़ने लगा। फिर धीरे से दबाया। सिर अंदर गया। राधा चीखी, “आह्ह… दर्द हो रहा है!” लेकिन मैंने और जोर लगाया। आधा लंड अंदर चला गया। उसकी चूत गर्म और टाइट थी। मैंने धक्का मारा तो पूरा लंड घुस गया। राधा की आँखों से आंसू निकल आए लेकिन वो बोली, “चोदो मुझे… पूरी तरह चोदो।”
मैंने जोर-जोर से चोदना शुरू किया। थप-थप की आवाजें कमरे में गूंज रही थीं। राधा की गांड हिल रही थी। उसके स्तन उछल रहे थे। मैंने कहा, “ले राधा, मेरा लंड ले… तेरी गांव वाली चूत फाड़ दूंगा।” वो चिल्ला रही थी, “हाँ… और जोर से… मेरी चूत का रस निकाल दो।” पंद्रह मिनट तक मैं चोदता रहा। फिर राधा झड़ गई। उसकी चूत ने मेरे लंड को निचोड़ लिया। मैं भी झड़ने लगा। गरम गरम माल उसकी चूत में भर दिया।
लेकिन खत्म नहीं हुआ। राधा ने लंड मुंह में लिया। वो चूसने लगी जैसे मंगा की हीरोइन। “तेरा लंड स्वादिष्ट है।” मैंने उसके बाल पकड़कर मुंह चोदा। फिर उसे घुमाया और गांड पर लंड रखा। “नहीं अमित, गांड में मत डालो।” लेकिन मैंने थूक लगाकर दबाया। आधा लंड गांड में घुस गया। राधा चीख रही थी, “आह्ह… फट रही है मेरी गांड!” मैंने धीरे-धीरे चोदा। फिर तेज। उसकी गांड लाल हो गई।
दूसरी बार चोदते वक्त मैंने उसकी चूत चाटी। रस पीया। राधा ने कहा, “मेरा मुंह भी चोदो।” हम 69 पोजीशन में आ गए। वो मेरा लंड चूस रही थी और मैं उसकी चूत चाट रहा था। फिर मैंने उसे घोड़ी बना के चोदा। उसकी गांड थपथपाते हुए। “ले ले… गांव की रांड… मेरा लंड तेरी चूत में घुसा हुआ है।” राधा जोर-जोर से चीख रही थी।
तीसरी बार हमने बाथरूम में किया। पानी बह रहा था। मैंने उसे दीवार से लगाकर चोदा। उसकी चूत से रस बह रहा था। चार घंटे तक हम चोदते रहे। हर पोजीशन में। मिशनरी, डॉगी, काउगर्ल। राधा थक गई लेकिन मांगती रही, “एक बार और… मेरी चूत को शांत कर दो।”
आखिर में जब मैं झड़ा तो उसकी चूत और गांड दोनों में माल भर दिया। राधा बोली, “अमित, अब रोज आना। मंगा पढ़ते-पढ़ते चोदना।” मैंने वादा किया।
गाँव से लौटते वक्त राधा ने मुझे अलविदा कहा। उसकी आँखों में वो भूख थी जो अब भी याद आती है। वो छोटी सी गाँव की लड़की, मंगा पढ़ने वाली, मेरी सबसे गंदी और मजेदार चुदाई की याद बन गई।