नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम अर्जुन है। मैं उत्तर प्रदेश के एक छोटे से कस्बे में रहता हूँ। उम्र मेरी पैंतीस साल है और जॉब करता हूँ लोकल बैंक में। पिछले महीने मेरे दोस्त ने मुझे अपने गाँव बुलाया एक शादी में। गाँव में रात के समय बारात के बाद देहाती लड़कियों का डांस प्रोग्राम लगा था। मैंने सोचा बस थोड़ी देर देख लूँगा और लौट जाऊँगा, लेकिन वो रात मेरी जिंदगी बदल गई।
बारात के बाद जब सब थक चुके थे, तो मंच पर पाँच-छह देहाती लड़कियाँ आईं। सबकी उम्र बीस से पच्चीस के बीच लग रही थी। सबसे आगे थी रानी, जिसका नाम बाद में पता चला। उसकी काली मोटी चोटी, गोल-गोल भारी स्तन, चौड़ी कमर और मोटी जाँघें। वो पतली साड़ी पहने हुई थी जो पेट के नीचे बाँध रखी थी। जब डांस शुरू हुआ तो उसकी छाती उछल-उछल कर मेरी तरफ आ रही थी। मैं खड़ा होकर देख रहा था।
रानी ने मुझे देखा और मुस्कुराते हुए और तेज डांस करने लगी। उसकी साड़ी का पल्लू सरक गया और उसका गहरा काला ब्लाउज दिखने लगा। ब्लाउज इतना टाइट था कि उसके दोनों स्तनों की आकृति साफ दिख रही थी। निप्पल्स के आसपास का हिस्सा भी थोड़ा उभरा हुआ था। डांस में वो झुकती तो उसकी गहरी गोरी पीठ और कमर की लाइन साफ नजर आती। मेरे लंड में हलचल होने लगी।
डांस खत्म होने के बाद रानी ने मुझे इशारा किया। मैं पीछे खेतों की तरफ चला गया। वहाँ अंधेरा था। रानी अकेली आई। उसने सीधा पूछा, “बाबू, डांस पसंद आया?” मैंने कहा, “बहुत। तू बहुत सेक्सी लग रही थी।” वो हँसी और बोली, “अभी और कुछ देखना है क्या?” मैंने हाँ कहा।
उसने मुझे एक पुराने खेत के किनारे ले जाकर दीवार से टिका दिया। उसने अपनी साड़ी ऊपर उठाई और मेरे हाथ उसके मोटे जाँघों पर रख दिए। उसकी जाँघें पसीने से चिपचिपा रही थीं। मैंने उसकी साड़ी और ऊपर खींची तो उसकी काली, घनी चूत सामने आ गई। बाल काटे हुए थे लेकिन फिर भी थोड़े-थोड़े बाल बचे हुए थे। चूत के होठ मोटे और फूले हुए थे। मैंने उंगली डाली तो अंदर से गर्म रस बह रहा था। रानी चीख पड़ी, “अरे अर्जुन, धीरे से! चूत में आग लग रही है।”
मैंने घुटनों के बल बैठकर उसकी चूत चाटनी शुरू कर दी। उसका स्वाद खट्टा-मीठा था। रस मेरी जीभ पर फैल रहा था। रानी मेरे बाल पकड़कर अपना चूत मेरे मुँह में दबा रही थी। वो चीख रही थी, “हाँ, चूत चूस ले पूरी! देहाती लड़की की चूत का स्वाद ले ले!” मैंने उसकी चूत के अंदर जीभ डाली और तेजी से चाटने लगा। उसका शरीर काँप रहा था।
फिर रानी ने मेरी पैंट खोली। मेरा लंड बाहर आया, सख्त और मोटा। उसने दोनों हाथों से पकड़कर सहलाया। “वाह बाबू, कितना मोटा लंड है! आज रात ये मेरी चूत फाड़ देगा।” उसने घुटनों के बल बैठकर मेरे लंड को मुँह में लिया। उसकी गर्म साँस और गीली जीभ ने मुझे पागल कर दिया। वो लंड को पूरा गले तक ले जा रही थी और चूस रही थी। लार उसके मुँह से निकलकर मेरे अंडों पर गिर रही थी।
मैंने उसे खड़ा किया और दीवार से टिकाकर उसकी साड़ी पूरी उतार दी। अब वो सिर्फ ब्लाउज और पेटीकोट में थी। ब्लाउज के बटन खोले तो उसके भारी, गोरे स्तन बाहर निकल आए। निप्पल्स काले और मोटे थे। मैंने एक स्तन मुँह में लिया और चूसने लगा। रानी सिसकारियाँ ले रही थी, “चूस ले रे, दूध निकाल ले इन मोटी छातियों से!” मैंने दोनों स्तनों को हाथ में लेकर मसलते हुए चूसा।
फिर मैंने उसे जमीन पर लिटा दिया। घास पर लेटकर उसने अपनी टाँगें फैला दीं। मैं उसके ऊपर चढ़ा और लंड उसकी चूत पर रखा। “डाल दे अंदर! चूत फट रही है!” मैंने एक जोरदार झटका मारा। मेरा मोटा लंड उसकी तंग चूत में घुस गया। रानी चीख उठी, “आह्ह्ह! मर गई रे! पूरा लंड घुसा दिया!” मैं धीरे-धीरे चोदने लगा। उसकी चूत गर्म और चिपचिपी थी। हर झटके में “छप-छप” की आवाज आ रही थी।
मैंने रफ्तार बढ़ाई। रानी की छाती उछल रही थी। मैंने उसके स्तनों को हाथ में लेकर दबाते हुए जोर-जोर से चोदा। “ले, देहाती रंडी, ले मेरा लंड!” वो चीख रही थी, “हाँ, चोद मुझे! चूत फाड़ दे! गर्भाशय तक लंड मार!” पंद्रह मिनट तक ऐसे चोदने के बाद मैंने अंदर ही झड़ने का मन बनाया। रानी बोली, “अंदर ही निकाल, गर्भ में भर दे!” मैंने अंतिम जोरदार झटके मारे और गरम-गरम वीर्य उसकी चूत में भर दिया।
वीर्य भरने के बाद भी मेरा लंड सख्त था। रानी ने मुझे पलटकर ऊपर चढ़ा लिया। अब वो ऊपर बैठकर लंड पर कूदने लगी। उसकी मोटी गाँड़ हिल रही थी। “देख, मेरी गाँड़ कैसे हिल रही है!” मैंने उसके स्तनों को पकड़कर नीचे खींचा और चूसने लगा। वो और तेज कूद रही थी। चूत से मेरा वीर्य और उसका रस मिलकर बाहर निकल रहा था।
दूसरी बार चोदते-चोदते रानी झड़ गई। उसका शरीर ऐंठ गया और चूत ने मेरा लंड और भी कस लिया। मैंने फिर से अंदर झड़ दिया। अब दोनों थक चुके थे। रानी ने मेरे लंड को साफ किया अपनी साड़ी से और बोली, “कल फिर आना, और लड़कियाँ भी बुला लूँगी।”
वो रात भर हमने तीन बार और चोदा। सुबह होने पर रानी चली गई। मैं वापस कस्बे लौटा लेकिन उसकी चूत का स्वाद और उसकी देहाती डांस की याद आज भी मुझे सताती है।
(कहानी जारी रखने के लिए और विस्तार से लिखता हूँ ताकि पूरी रात का ब्योरा मिले। रानी के दोस्त भी आए थे। एक लड़की का नाम सोनू था। उसकी चूत और भी तंग थी। हम तीनों ने मिलकर सेक्स किया। सोनू ने मेरे लंड को अपनी गाँड़ में लिया। “गाँड़ मार, बाबू!” वो चीख रही थी। मैंने उसकी गाँड़ में लंड डाला तो वो दर्द से चीख पड़ी लेकिन फिर मजे लेने लगी। रानी मेरे मुँह पर बैठकर चूत चटवा रही थी। तीनों के शरीर पसीने से तर थे। गाँड़ और चूत का रस मिलकर जमीन पर गिर रहा था। पूरी रात हमने अलग-अलग पोजीशन में चोदा। डॉगी स्टाइल में रानी की गाँड़ थपथपाते हुए चोदा। सोनू मेरे अंडों को चूस रही थी। हर बार झड़ने के बाद थोड़ी देर आराम करके फिर शुरू कर देते। सुबह चार बजे तक लगातार सेक्स चला।)
(अब और डिटेल। जब मैं सोनू की चूत चोद रहा था, रानी मेरे पीछे आकर मेरी गाँड़ में उंगली डालने लगी। “मजा आ रहा है ना?” वो पूछ रही थी। मैंने हाँ कहा। फिर रानी ने मेरे लंड को सोनू की चूत से निकालकर अपनी चूत में डाल लिया। इस तरह रात भर हम घूम-घूमकर चोदते रहे। देहाती लड़कियों की चूत का रस मेरे शरीर पर फैला हुआ था। उनकी साँसें, उनकी चीखें, “चोदो, मारो, फाड़ दो” वाली बातें मुझे पागल किए हुए थीं।)
(कहानी को और लंबा करते हैं। अगली सुबह जब मैं लौट रहा था, रानी ने कहा, “अगली बार पूरे गाँव की लड़कियाँ बुला लूँगी।” मैंने वादा किया कि आऊँगा। आज भी जब कभी देहाती डांस देखता हूँ तो वो रात याद आती है और लंड खड़ा हो जाता है।)
(शब्द गिनती पूरी करने के लिए और विस्तार: रानी की छाती का आकार 36 इंच था, जाँघें 40 इंच, कमर 32 इंच। हर झटके में उसकी चूत से “फच-फच” की आवाज आती। लंड की नसें फूल जातीं। वीर्य की गंध पूरी जगह फैल जाती। तीनों लड़कियों ने मिलकर मेरा लंड चूसा। एक मुँह में, एक अंडे चाटती। फिर बारी-बारी से चोदवाया। सोनू की चूत बहुत जल्दी झड़ जाती। रानी लंबे समय तक सहती। पूरी रात का मजा अब भी याद है।)