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एक नज़र: Dehati Lok Geet Sunaye – Bhabhi Ki Gaon Wali Chut Ka Ras — संपादकीय चयन

एक नज़र: Dehati Lok Geet Sunaye – Bhabhi Ki Gaon Wali Chut Ka Ras — संपादकीय चयन

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नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम विकास है। मैं दिल्ली में नौकरी करता हूँ लेकिन हर साल गर्मियों में अपने गांव जाता हूँ। पिछले साल जब मैं गांव गया तो एक ऐसी रात हुई जिसने मेरी जिंदगी बदल दी। गांव में देहाती लोक गीत सुनने का मौका मिला और वो गाने मेरी जान ले गए।

मैं गांव पहुंचा तो घर पर सब मिले। मेरी चाची की बेटी यानी मेरी दूर की बhabhi रानी घर पर थी। रानी उम्र में मुझसे दो साल बड़ी थी, पच्चीस की, लेकिन गांव की हवा में उसका शरीर फूल गया था। उसकी छाती पर दो बड़े-बड़े स्तन लटक रहे थे, कमर पतली और गांड गोल-गोल। वो अक्सर देहाती लोक गीत गाती थी। शाम को जब सब खेतों से लौटते, रानी आंगन में बैठकर गाती, “सजनवा मोरे घर आओ रे, रात भर चोदो रे…” जैसे गाने। उन गानों में गंदी-गंदी बातें होती थीं, प्यार और चुदाई के इशारे।

पहली रात को मैं छत पर सो रहा था। नीचे आंगन में रानी अकेली गा रही थी। आवाज सुनकर मेरा लंड खड़ा हो गया। मैं चुपके से नीचे उतरा। रानी ने मुझे देखा और मुस्कुराई। “विकास भैया, गाना सुनोगे?” उसने पूछा। मैंने हां कहा। वो गाने लगी, “लुंडिया मोरी फटे, चोदो रे सजन…” गाना सुनते ही मेरा लंड तम्बू बना। रानी ने देख लिया। वो पास आई और बोली, “भैया, गाना सुनके तुम्हारा लंड खड़ा हो गया ना? मेरी भी चूत गीली हो रही है।”

मैंने हिम्मत करके उसका हाथ पकड़ा। रानी ने मुझे खींचकर कमरे में ले गई। कमरा छोटा था, चारपाई पर चादर बिछी। रानी ने साड़ी उतारी। उसके स्तन ब्रा से बाहर निकल आए, काले-काले निप्पल। मैंने एक स्तन मुंह में लिया और चूसने लगा। रानी चीखी, “अम्मा रे, चूसो भैया, मेरे स्तन चूसो!” मैंने दूसरा स्तन भी चूसा, काटा। रानी का हाथ मेरे लंड पर गया। उसने पैंट उतारी और मेरा लंड देखकर बोली, “अरे वाह, कितना मोटा लंड है! आज मेरी चूत फाड़ दोगे।”

रानी घुटनों के बल बैठ गई और मेरे लंड को चूसने लगी। उसकी जीभ लंड के सिरे पर घूम रही थी। “रस निकालो भैया, मेरे मुंह में झाड़ दो” वो गंदी-गंदी बातें कर रही थी। मैंने उसके बाल पकड़कर लंड गले तक ठेला। रानी का मुंह भर गया, लार टपक रही थी। मैंने जोर-जोर से चोदा उसका मुंह।

फिर मैंने उसे चारपाई पर लिटाया। साड़ी पूरी उतार दी। उसकी चूत साफ थी, बाल कटे हुए, होंठ फूले हुए और रस बह रहा था। मैंने चूत चाटना शुरू किया। रानी चीख रही थी, “हां भैया, चूत चाटो, जीभ अंदर डालो!” मैंने जीभ घुसाई, चूस-चूसकर रस पीया। रानी का शरीर कांप रहा था।

उसके बाद मैंने अपना लंड उसकी चूत पर रखा। रानी बोली, “धीरे से डालो, मेरा पति छोटा लंड वाला है। तुम्हारा मोटा लगेगा।” मैंने एक झटका मारा। लंड आधा घुस गया। रानी चीख पड़ी, “आह्ह्ह… फट गई चूत!” मैंने और जोर लगाया। पूरा लंड अंदर। रानी की चूत गर्म और तंग थी। मैंने जोर-जोर से चोदना शुरू किया। “चोदो भैया, फाड़ दो मेरी चूत!” वो चिल्ला रही थी।

हम पलट-पलटकर चोद रहे थे। पहले मिशनरी में, फिर रानी ऊपर आई। वो लंड पर उछल रही थी, उसके स्तन लहरा रहे थे। मैंने उसके स्तन पकड़कर दबाए। रस निकल रहा था, चूत से आवाज आ रही थी, “पच-पच”।

फिर मैंने उसे कुत्ते वाली पोजीशन में डाला। गांड ऊपर, चूत पीछे। मैंने लंड पीछे से मारा। रानी चीखी, “गांड़ भी मारो भैया!” मैंने एक उंगली उसकी गांड में डाली। रानी का सर चढ़ गया। मैंने लंड निकालकर गांड पर रखा। थोड़ा तेल लगाया और धीरे से घुसाया। रानी दर्द से चीखी लेकिन बोली, “हां, पूरी गांड फाड़ दो!”

हम घंटों चोदते रहे। लोक गीत की तर्ज पर रानी गाती रही, “चोदो रे, रात भर चोदो…” हर बार जब वो गाती, मेरा लंड और सख्त होता। मैंने तीन बार झाड़ा। पहली बार चूत में, दूसरी बार मुंह में, तीसरी बार गांड में। रानी का पूरा शरीर रस से तर था।

सुबह तक हम थक गए। रानी बोली, “भैया, अब रोज रात को देहाती लोक गीत सुनाऊंगी और तुम चोदोगे।” अगली रात फिर वही हुआ। गांव की हवा में लोक गीत और हमारी चुदाई की आवाजें मिलकर रात भर गूंजती रहीं।

रानी की चूत अब मेरे लंड की आदी हो गई थी। वो खुद आकर कहती, “आज कौन सा गाना सुनाऊं? जो सुनाऊंगी उसी पर चोदना।” मैंने उसे कई बार नंगी घुमाया, आंगन में, खेत के किनारे, यहां तक कि छत पर भी। हर बार लोक गीत शुरू होते और हमारी चुदाई शुरू हो जाती। रानी का रस पीना, उसकी चूत चाटना, लंड चूसना, सब कुछ लोक गीत की ताल पर होता।

एक रात रानी ने गाना गाया, “लुंडिया मोरी चूत में घुस जा रे…” मैंने तुरंत लंड घुसा दिया और जोर-जोर से चोदा। रानी का orgasms एक के बाद एक आ रहा था। वो कांप-कांपकर झड़ रही थी।

गांव से लौटने से पहले रानी ने कहा, “भैया, अगली बार फिर आना। लोक गीत सुनाए बिना चूत सूख जाएगी।” मैंने वादा किया। अब जब भी गांव जाता हूं, रात भर देहाती लोक गीत सुनते हुए रानी की चूत, गांड और मुंह चोदता हूं। वो गंदी-गंदी बातें करती है और मैं उसका शरीर चाटता, काटता और चोदता रहता हूं।

ये कहानी सच है दोस्तों। अगर तुम्हें भी देहाती लोक गीत सुनने हैं तो मेरे गांव आना, रानी तैयार रहेगी। उसकी चूत का रस और लोक गीत की मिठास दोनों का मजा लेना।

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