नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम राहुल है। मैं उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गांव का रहने वाला हूँ। उम्र मेरी अब पच्चीस साल है। बचपन से ही मैं गांव में ही बड़ा हुआ। खेतों में काम करता, बैलों को हांकता और शाम को नदी किनारे घूमता। गांव में सब कुछ धीमा और पुराना है, लेकिन प्यार और शारीरिक भूख कभी नहीं रुकती। मेरी कहानी शुरू होती है मेरी बचपन की सहेली प्रिया से। प्रिया मेरी उम्र की ही है, गोरी चमड़ी, मोटी-मोटी जांघें, भारी-भारी स्तन जो हर कदम पर उछलते लगते। उसकी गांड इतनी गोल और भरी हुई थी कि देखकर लंड अपने आप खड़ा हो जाता। हम दोनों बचपन से दोस्त थे लेकिन धीरे-धीरे दोस्ती प्यार में बदल गई और फिर वो प्यार इतना गंदा और गर्म हो गया कि हम दोनों रात-रात भर चोदते रहते।
गांव में सबकी नजरों से बचकर मिलना मुश्किल था। प्रिया का घर मेरे घर से दो खेत दूर था। उसके पिता खेतों में जाते और मां मंदिर। ऐसे मौकों पर हम मिलते। एक दिन दोपहर का समय था। बारिश हो रही थी। मैं प्रिया के घर के पीछे वाले खेत में छुपा बैठा था। प्रिया आई, सफेद साड़ी में, बाल खुले, पानी से भीगकर साड़ी उसके शरीर से चिपक गई थी। उसके स्तन साफ दिख रहे थे, काले-काले निप्पल साड़ी से उभर रहे थे। मैंने उसे देखते ही लंड तन गया।
“राहुल, आज कोई नहीं है घर पर,” प्रिया ने फुसफुसाते हुए कहा। उसकी आवाज में पहले से ही गर्माहट थी। मैंने उसे खींचकर अपने पास लिया। उसके होंठों पर अपना मुंह रख दिया। हम दोनों चूमने लगे, जीभें आपस में उलझ गईं। उसकी सांसें तेज हो गईं। मैंने उसकी साड़ी का पल्लू खींचा। उसके भारी स्तन बाहर आ गए, ब्रा नहीं पहनी थी। मैंने एक स्तन मुंह में लिया और चूसने लगा। प्रिया चीख पड़ी, “आह्ह्ह… राहुल, चूस ले, और जोर से… मेरे स्तन तेरे हैं आज।” मैं चूसता रहा, दांतों से काटता, जीभ से चाटता। उसका दूध जैसा रस मेरे मुंह में आ रहा था।
फिर मैंने उसकी साड़ी ऊपर उठाई। उसकी जांघें मोटी और मुलायम थीं। पैंटी नहीं थी, सीधे उसकी गीली चूत सामने आ गई। बालों से भरी, होंठ मोटे और गुलाबी। चूत से पानी टपक रहा था। मैं घुटनों के बल बैठ गया और उसकी चूत चाटने लगा। जीभ अंदर डालकर घुमाता, क्लिटोरिस को चूसता। प्रिया जोर-जोर से चीख रही थी, “हां… राहुल, मेरी चूत चाट, पूरी चाट डाल… तेरी जीभ इतनी गर्म है… आह्ह्ह चोद मुझे, अब और नहीं सहा जाता।” मैंने दो उंगलियां अंदर डाल दीं और तेजी से आंदोलन करने लगा। उसकी चूत का रस मेरे हाथ पर बह रहा था।
मैं खड़ा हुआ और अपना लंड निकाला। मेरा लंड सात इंच का मोटा और नसों से भरा था, लाल सिरा चमक रहा था। प्रिया ने उसे हाथ में लिया और सहलाने लगी। “कितना बड़ा है तेरा लंड… मेरी चूत फाड़ देगा आज,” उसने कहा। मैंने उसे घुमाया, पीठ मेरी तरफ कर दी। उसकी गांड ऊपर उठा दी। गांड के छेद से भी थोड़ा पानी निकल रहा था। मैंने लंड उसकी चूत पर रगड़ा, फिर एक जोरदार झटके से अंदर घुसा दिया। प्रिया चीख उठी, “आह्ह्ह मादरचोद… धीरे… पूरा लंड घुस गया… मेरी चूत फट गई।” लेकिन मैं रुका नहीं। जोर-जोर से चोदने लगा। थप-थप की आवाजें खेत में गूंज रही थीं। उसकी गांड के मांस मेरे पेट से टकरा रहे थे।
हम दोनों पसीने से तर हो गए थे। मैं झुककर उसके स्तन दबाता, निप्पल खींचता और लंड अंदर-बाहर करता। प्रिया बोल रही थी, “हां… और जोर से चोद… मेरी चूत तेरे लंड की गुलाम है… रस निकाल दे मेरी चूत से।” मैंने रफ्तार बढ़ा दी। दस मिनट तक ऐसे ही चोदा। फिर प्रिया झड़ गई, उसकी चूत ने मेरे लंड को निचोड़ लिया। रस बाहर निकल आया, मेरी जांघों पर बहने लगा।
लेकिन हम रुके नहीं। मैंने उसे लिटा दिया, पैर उसके कंधों पर रखे और मिशनरी पोजीशन में फिर घुसा। इस बार और गहराई से। प्रिया के मुंह से गंदी-गंदी बातें निकल रही थीं। “तेरा लंड मेरी चूत में आग लगा रहा है… चोदते रह, पूरी रात चोद… मेरी गांड भी मार ले अगर मन हो।” मैंने उसकी गांड की ओर उंगली डाली, धीरे से अंदर किया। प्रिया सिसकने लगी लेकिन मजा ले रही थी।
हमने तीन बार झड़ने तक चोदा। आखिरी बार मैंने उसकी चूत में ही झड़ दिया। गरम-गरम वीर्य अंदर भर दिया। प्रिया ने कहा, “आह्ह… कितना गरम माल भरा है… मेरी चूत अभी भी कांप रही है।”
बारिश रुक गई थी लेकिन हम दोनों अभी भी गर्म थे। अगली मुलाकात में हम खेत के कुएं के पास मिले। वहां भी वही गंदी चुदाई हुई। प्रिया ने मुझे चूसा, मेरा लंड उसके गले तक लिया। मैंने उसकी गांड मारी, उसका रोना और चीखना सुनकर और जोश आ गया। गांव की हवा, मिट्टी की खुशबू और हमारे शरीर की गर्माहट सब मिलकर वो पल यादगार बना रहे।
हमारी ये गांव वाली रोमांस आज भी जारी है। जब भी मौका मिलता है, हम चोदते हैं। प्रिया अब मेरी पत्नी बन चुकी है लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती। हर रात नई गंदी चुदाई होती है। उसकी चूत, मेरे लंड, हमारे रस और पसीने की कहानी कभी खत्म नहीं होगी।