नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम नितिक सिंहानिया है। आज मैं आपको अपनी शादी की उस रात की पूरी कहानी सुनाता हूँ जो यही रिश्ता क्या कहलाता है शो के वेडिंग एपिसोड जैसी लगती थी, लेकिन असल में वो रात मेरी पत्नी अक्षरा के साथ इतनी गंदी, इतनी गर्म और इतनी चुदाई भरी थी कि आज भी याद करके मेरा लंड खड़ा हो जाता है। हम दोनों दिल्ली के एक बड़े जॉइंट फैमिली वाले घर में रहते थे। अक्षरा मेरी दूर की रिश्तेदार थी, लेकिन शादी के बाद वो मेरी बीवी बन गई। शादी के दिन का वो पूरा माहौल अभी भी आँखों के सामने है। मंडप में फूलों की मालाएँ, लाल चुनरी, अक्षरा का वो हल्का सा मुस्कुराना और मेरी तरफ देखती हुई शर्मीली निगाहें। लेकिन रात को जब सब सो गए और हम दोनों सूट में अकेले रह गए, तब असली खेल शुरू हुआ।
अक्षरा ने शादी की लाल लहंगा उतार दिया था और सिर्फ एक पतली सी सिल्क की नाइट ड्रेस पहनी हुई थी। उसके बड़े-बड़े स्तन ड्रेस के अंदर से साफ दिख रहे थे, निप्पल्स खड़े होकर कपड़े को छू रहे थे। मैंने दरवाजा बंद किया और उसे दीवार से लगाकर चूमने लगा। “अक्षरा, आज रात तू मेरी है। तेरी ये नरम सी चूत मेरे लंड का स्वाद चखेगी,” मैंने कान में फुसफुसाया। वो शरमा गई लेकिन उसकी साँसें तेज हो गईं। मैंने उसकी ड्रेस ऊपर खींची और उसके गोल-गोल स्तनों को हाथ में लिया। दूध जैसे सफेद, नरम और भारी। मैंने एक निप्पल को मुँह में लिया और चूसने लगा। अक्षरा की “आह्ह्ह” की आवाज निकली। “नितिक जी, धीरे… परिवार वाले सुन लेंगे,” वो बोली। मैं हँसा, “कोई नहीं सुनेगा, आज तेरी चूत चोदने का मूड है।”
मैंने उसे बिस्तर पर लिटाया और उसकी टाँगें फैलाईं। उसकी चूत पूरी तरह गीली हो चुकी थी। बालों वाली, गुलाबी और रस से तर। मैंने उंगली डाली तो “चपाक” की आवाज आई। “कितनी गीली है तेरी चूत, अक्षरा। शादी के दिन से ही भूखी लग रही है,” मैंने कहा और अपनी उंगली अंदर-बाहर करने लगा। अक्षरा की कमर उछलने लगी। “नितिक… और जोर से… उँगली से ही चोद दो,” वो बोली। मैंने दो उँगलियाँ डाल दीं और तेजी से फिंगरिंग करने लगा। उसका रस मेरे हाथ पर बह रहा था। फिर मैंने अपना मोटा, काला और नसों भरा लंड निकाला। सात इंच लंबा, मोटाई इतनी कि अक्षरा की आँखें फटी की फटी रह गईं। “ये ले, आज रात ये लंड तेरी चूत फाड़ देगा,” मैंने कहा और उसके मुँह में ठूंस दिया। अक्षरा ने लंड चूसना शुरू कर दिया। उसकी जीभ मेरे लंड के सिरे पर घूम रही थी, लार टपक रही थी। “बहुत स्वादिष्ट है तेरा लंड, नितिक,” वो बोली और गले तक ले गई। मैं उसके बाल पकड़कर मुँह चोदने लगा। “ले, ले पूरा… तेरी शादी की पहली रात है, गला चोद रहा हूँ,” मैं गरजा।
फिर मैंने उसे उल्टा कर दिया। उसकी गोल-गोल, सफेद और मोटी गाँड मेरे सामने थी। मैंने गाँड के छेद पर उंगली घुमाई। “आज तेरी गाँड भी मारूँगा,” मैंने कहा। अक्षरा डर गई, “नहीं नितिक, पहली बार है… दर्द होगा।” लेकिन मैंने उसकी चूत में लंड घुसा दिया। “आह्ह्ह… धीरे… पूरा भर गया,” वो चीखी। मैंने जोर-जोर से धक्के मारने शुरू कर दिए। “चूत कितनी टाइट है तेरी… चोद-चोद के ढीली कर दूँगा,” मैं बोलता रहा। हर धक्के पर “थप-थप” की आवाज, उसकी चूत का रस मेरे लंड पर चमक रहा था। मैंने उसके स्तनों को पीछे से पकड़ लिया और निप्पल निचोड़ते हुए चोदता रहा। अक्षरा चीख रही थी, “नितिक… और जोर से चोदो… मेरी चूत फट रही है… रस निकाल दो!”
हमने पोजीशन बदली। अक्षरा ऊपर चढ़ गई। उसकी चूत मेरे लंड पर बैठ गई और वो ऊपर-नीचे होने लगी। उसके स्तन उछल रहे थे, पसीने से तर। “देख, तेरी बीवी कैसे चोद रही है,” वो बोली और मेरे लंड को अपनी चूत में घुमाने लगी। मैंने उसकी गाँड थपथपाई, “ऐसे ही चोद, रानी… तेरी चूत का मालिक मैं हूँ।” फिर मैंने उसे नीचे लिटाया और मिशनरी पोजीशन में घुसा। लंड पूरा अंदर, अंडकोष तक। “ले… ले… आज पूरी रात चोदूँगा,” मैं बोलता रहा। अक्षरा का पहला झड़ना आ गया। उसकी चूत ने मेरा लंड निचोड़ लिया और गरम रस निकला। “नितिक… आ गया… चूत से रस निकल रहा है,” वो चीखी।
मैंने लंड निकाला और उसकी गाँड में लगाया। थोड़ा सा दबाव डाला तो सिरा घुस गया। “आह्ह्ह… दर्द… लेकिन अच्छा लग रहा है,” अक्षरा बोली। मैंने धीरे-धीरे पूरी गाँड मार ली। अब दोनों छेदों में बारी-बारी से लंड घुसा रहा था। चूत और गाँड दोनों का रस मिलकर बिस्तर गीला कर रहा था। “तेरी गाँड भी चूत जितनी टाइट है… मजा आ रहा है,” मैं बोला। अक्षरा ने मुझे चूमते हुए कहा, “नितिक, आज रात तू मुझे अपनी रखैल बना ले… जितना चाहे चोद।” हमने घंटों चोदा। अलग-अलग पोजीशन में – डॉगी स्टाइल में उसकी गाँड लाल हो गई, काउगर्ल में उसके स्तन मेरे मुँह में, और स्टैंडिंग में दीवार से टिका कर। हर बार जब वो झड़ती, चूत का रस मेरे लंड पर बहता। आखिर में मैंने भी झड़ने का इशारा किया। “अक्षरा, अंदर ही निकालूँ?” “हाँ, भर दो मेरी चूत को,” वो बोली। मैंने जोर का धक्का मारा और गरम-गरम वीर्य उसकी चूत में भर दिया। “ले… ले सब… तेरी चूत अब मेरी है,” मैं गरजा।
रात भर हम चोदते रहे। सुबह होने तक अक्षरा की चूत और गाँड दोनों लाल और सूज गई थीं। रस से तर बिस्तर, हमारे शरीर पसीने से चिपके हुए। अक्षरा ने मुझे गले लगाया, “नितिक, ये रिश्ता सच में क्या कहलाता है… इतना गंदा और इतना मजेदार।” मैं हँसा, “ये रिश्ता पति-पत्नी का है, लेकिन चुदाई वाला।” दोस्तों, ये थी हमारी शादी की पहली रात की सच्ची कहानी। अक्षरा आज भी जब याद करती है तो चूत गीली हो जाती है और हम फिर से चोदने लगते हैं। अगर आपको ये कहानी पसंद आई तो कमेंट में बताना, अगली बार और भी गंदी डिटेल के साथ सुनाऊँगा।