नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम राहुल है। मैं दिल्ली में रहता हूँ और ये कहानी मेरी असली गर्लफ्रेंड अनन्या के साथ की है। अनन्या मेरी कॉलेज की दोस्त थी, लेकिन धीरे-धीरे हमारी दोस्ती प्यार में बदल गई। वो बहुत सेक्सी है – गोरी चमड़ी, 34 साइज की भारी-भरी छातियाँ, पतली कमर और गोल-गोल गोलियाँ जैसी गांड। उसकी चूत हमेशा गीली रहती थी जब मैं उसके पास होता। एक शाम हमने डिसाइड किया कि इंडिया गेट के पास वाले पार्क में मिलेंगे। शाम के 7 बजे का टाइम था, थोड़ी अंधेरी हो रही थी और पार्क में कम लोग थे।
मैं स्कूटर पर पहुंचा तो अनन्या पहले से ही बेंच पर बैठी थी। उसने टाइट जींस और छोटी टॉप पहनी हुई थी जिससे उसकी छातियाँ साफ दिख रही थीं। हम दोनों मुस्कुराए और एक-दूसरे को गले लगाया। उसकी खुशबू मुझे पागल कर रही थी। हमने थोड़ी बातें कीं, लेकिन उसकी आँखों में वो चिंगारी थी जो कह रही थी कि आज कुछ खास होने वाला है। पार्क के कोने में एक अंधेरा सा इलाका था जहाँ पेड़ ज्यादा थे। हम धीरे-धीरे वहाँ चल पड़े।
अनन्या ने मेरे कान में फुसफुसाया, “राहुल, आज मैं बहुत horny हूँ। तू मुझे यहाँ चोद दे।” मैंने तुरंत उसकी कमर पकड़ी और उसे पास खींच लिया। हमने चूमना शुरू किया। उसके होंठ नरम थे, जीभ से हम एक-दूसरे की लार पी रहे थे। मैंने उसकी टॉप के अंदर हाथ डाला और उसकी ब्रा के ऊपर से उसकी मोटी छातियाँ दबाईं। “अह्ह्ह… राहुल, और जोर से दबा,” वो सिसक रही थी। मैंने ब्रा ऊपर खिसकाई और उसके निप्पल चूसने लगा। वो कड़वे-मीठे थे, मैं जीभ से घुमा-घुमा कर चाट रहा था।
हमने एक पेड़ के पीछे छुपकर खड़े हो गए। अनन्या ने मेरी जिप खोली और मेरा लंड बाहर निकाला। वो 7 इंच का मोटा लंड था, नसें उभरी हुई। उसने उसे हाथ में लिया और ऊपर-नीचे करने लगी। “तेरा लंड कितना गरम है यार, आज मेरी चूत फाड़ दे,” वो गंदी बातें कर रही थी। मैंने उसकी जींस का बटन खोला और हाथ अंदर डालकर उसकी चूत छुई। वो पूरी गीली थी, बालों वाली चूत से रस टपक रहा था। मैंने दो उंगलियाँ अंदर डालीं और जोर-जोर से फिंगरिंग करने लगा। “आह्ह्ह… हाँ, उँगलियाँ और गहरी डाल, मेरी चूत जल रही है,” अनन्या चीख रही थी।
हमने कपड़े थोड़े और खिसकाए। अनन्या ने मुझे दीवार से लगाकर घुटनों के बल बैठ गई और मेरा लंड मुंह में ले लिया। वो चूस रही थी जैसे कोई आइसक्रीम चूस रही हो। उसकी जीभ मेरे लंड के नीचे वाली नस पर घूम रही थी, लार से मेरा लंड चमक रहा था। “तेरी चूत चूसने का मन कर रहा है,” मैंने कहा। मैंने उसे खड़ा किया, उसकी जींस और पैंटी नीचे उतारी। उसकी चूत सामने थी – गुलाबी, फूली हुई, रस से भीगी हुई। मैंने घुटनों के बल बैठकर उसकी चूत चाटनी शुरू कर दी। जीभ से क्लिट को रगड़ रहा था, फिर अंदर तक जीभ डालकर चूस रहा था। अनन्या के पैर काँप रहे थे, “राहुल, और चाट, मेरी चूत का सारा रस पी ले।”
फिर मैंने उसे पेड़ से टेक लगाकर खड़ा किया। उसकी गांड मेरी तरफ थी। मैंने अपना लंड उसकी चूत पर रगड़ा, फिर एक जोर का झटका मारा। “आह्ह्ह… लंड अंदर घुस गया!” अनन्या चीख पड़ी। मैंने जोर-जोर से चोदना शुरू कर दिया। थप-थप की आवाजें पार्क में गूँज रही थीं। उसकी चूत मेरा लंड कसकर पकड़ रही थी, गर्म-गर्म रस निकल रहा था। मैंने उसकी छातियाँ पीछे से पकड़ लीं और निप्पल मरोड़ते हुए चोद रहा था। “तेरी चूत कितनी टाइट है, आज फाड़ दूंगा,” मैं गंदी बातें बोल रहा था।
हमने पोजीशन बदली। अनन्या ने मुझे नीचे लिटाया और ऊपर चढ़ गई। वो मेरे लंड पर बैठकर ऊपर-नीचे होने लगी। उसकी छातियाँ उछल रही थीं, मैं उन्हें हाथों से दबा रहा था। “हाँ, घोड़ी बनकर चोद, मेरी जान,” मैं बोल रहा था। वो तेजी से कूद रही थी, उसकी चूत से “चप-चप” की आवाजें आ रही थीं। रस मेरे लंड और अंडों पर बह रहा था। मैंने उसकी गांड पर थप्पड़ मारे, “गांड लाल हो गई तेरी।”
हम 20-25 मिनट तक ऐसे ही चोदते रहे। मैंने उसे कुत्ते वाली पोजीशन में कर दिया – वो झुक गई, गांड ऊपर, मैं पीछे से लंड घुसा रहा था। गहरे-गहरे वार, लंड पूरी तरह अंदर तक जाता, फिर बाहर निकालकर फिर घुसाता। अनन्या की सांस फूल रही थी, “राहुल, और जोर से, मेरी चूत फट रही है, मेरा पानी निकलने वाला है।” मैंने उसकी कमर पकड़ी और रफ चोदाई की।
आखिर में मैंने कहा, “अनन्या, मैं झड़ने वाला हूँ।” वो बोली, “अंदर ही निकाल, मेरी चूत में अपना गरम माल भर दे।” मैंने आखिरी जोरदार झटके मारे और उसकी चूत में झड़ गया। मोटा-मोटा वीर्य उसकी चूत में भर गया, कुछ बाहर निकलकर जांघों पर बहने लगा। अनन्या भी झड़ गई, उसकी चूत सिकुड़ रही थी। हम दोनों थककर वहीं बैठ गए, एक-दूसरे को चूमते रहे।
पार्क से निकलते समय वो मुस्कुरा रही थी। ये हमारी सबसे गंदी और मजेदार चुदाई थी। उसके बाद भी हम कई बार पार्क गए, लेकिन ये पहली बार सबसे यादगार रही।