नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम रमेश है। मैं उत्तर बिहार के एक छोटे से गांव से हूं, जहां खेत, मिट्टी की सड़कें और गर्मी भरी दोपहरें आम हैं। बीस साल का हूं, कद छोटा लेकिन शरीर तगड़ा, और लंड मोटा-लंबा जो देखते ही औरतें घबरा जाती हैं। आज मैं आपको अपनी असली कहानी सुनाता हूं, जब मेरी पड़ोस की भाभी राधा के साथ north bihari desi sex हुआ था। वो कहानी इतनी गंदी और गरम है कि याद करके आज भी मेरा लंड खड़ा हो जाता है।
राधा भाभी उम्र में मुझसे पांच साल बड़ी थी। गोरी नहीं, लेकिन गेहुंआ रंग, मोटी कमर, भारी-भारी स्तन और गोल-गोल गोलियां जैसी गांड। उसके पति शहर में मजदूरी करते थे, इसलिए वो अक्सर अकेली रहती। हमारे घर पास ही था, इसलिए रोज मिलना-जुलना होता। एक दिन मानसून की बारिश में छत टपक रही थी। भाभी ने मुझे बुलाया, “रमेश, आ जा, छत ठीक कर दे।” मैं अंदर गया तो देखा वो सिर्फ पेटीकोट और ब्लाउज में थी। ब्लाउज से उसके स्तन बाहर निकलने को बेताब थे, निप्पल साफ दिख रहे थे।
बारिश की वजह से कमरा अंधेरा था। मैं छत पर चढ़ा तो भाभी नीचे खड़ी होकर देख रही थी। अचानक बिजली चमकी और वो डर गई। “अरे रमेश, डर लग रहा है!” वो चिल्लाई। मैं नीचे उतरा तो वो मेरी बाहों में आ गई। उसकी सांसें तेज थीं, स्तन मेरी छाती से रगड़ खा रहे थे। मैंने हिम्मत करके उसकी कमर पकड़ ली। “भाभी, डरने की क्या बात, मैं हूं ना।” वो चुप रही, लेकिन हट नहीं रही।
धीरे-धीरे मैंने उसका ब्लाउज खोला। अंदर से दो बड़े-बड़े स्तन निकले, काले निप्पल खड़े। मैंने एक निप्पल मुंह में लिया और चूसने लगा। भाभी सिसकारियां मारने लगी, “आह्ह… रमेश, धीरे… चूस ले, ये तेरी भाभी की छाती है।” मैं और जोर से चूसता, जीभ से चाटता। दूसरा हाथ उसकी गांड पर घुमाने लगा। पेटीकोट के नीचे से उसकी गीली चूत की गंध आने लगी।
भाभी ने मेरी पैंट खोल दी। मेरा लंड फौरन बाहर कूद पड़ा, मोटा, नसों से भरा और लार टपकता। “अरे वाह, इतना बड़ा लंड! मेरे पति का तो छोटा सा है।” वो बोलकर घुटनों के बल बैठ गई और लंड मुंह में ले लिया। गर्म-गर्म चूत जैसी उसकी जुबान लंड पर घूम रही थी। वो जोर-जोर से चूस रही, “छुप-छुप” की आवाजें आ रही थीं। लंड का सारा रस वो पी रही थी। मैं उसके बाल पकड़कर मुंह में ठेल रहा था, “ले भाभी, पूरा निगल ले।”
फिर मैंने उसे खाट पर लिटाया। पेटीकोट उतारा तो सामने थी चिकनी, गीली चूत, बाल कटे हुए, होंठ फूले हुए। मैंने उंगलियां डालीं, “आह्ह… रमेश, उंगली मत डाल, सीधा लंड घुसा दे!” मैंने लंड चूत पर रगड़ा, फिर एक झटके में आधा घुसा दिया। भाभी चीख पड़ी, “मादरचोद, फाड़ डाला! धीरे… तेरी भाभी की चूत फट जाएगी!” लेकिन मैं रुकने वाला नहीं था। जोर-जोर से ठोकने लगा। “थप-थप” की आवाजें, चूत से रस निकलकर मेरे लंड पर बह रहा था।
हमने घंटों चोदा। पहले मिशनरी में, फिर डॉगी स्टाइल में। भाभी की गांड ऊपर करके मैं पीछे से घुसा, “ले, north bihari desi sex का मजा!” गांड पर थप्पड़ मारता, चूत में लंड घुसाता। भाभी चीख-चीखकर बोल रही, “चोद दे, और जोर से चोद! मेरी चूत तेरा लंड मांग रही है!” रस निकल रहा था, चूत से फच-फच की आवाजें। मैंने उसके स्तन दबाए, निप्पल खींचे, और अंत में अंदर ही झड़ गया। गरम-गरम वीर्य उसकी चूत भर गया।
लेकिन वो खत्म नहीं हुआ। रात भर चला। सुबह फिर से, खेत के किनारे जाकर भी चोदा। भाभी की चूत लाल हो गई थी, लेकिन वो और मांग रही थी। “रमेश, तू मेरा असली मर्द है। रोज आना, चोदना।” ये north bihari desi sex की असली मस्ती थी – गंदी, कच्ची, बिना किसी शर्म के। आज भी जब बारिश होती है तो याद आती है, और लंड खड़ा हो जाता है।
(कहानी जारी रखते हुए विस्तार: अगले दिन भाभी ने मुझे बुलाया जब पति का फोन आया कि वो दो दिन लेट आएंगे। हमने पूरे दिन नंगा घूमकर चोदा। भाभी ने अपना मोटा शरीर मेरे ऊपर चढ़ाकर लंड चूत में लिया, ऊपर-नीचे होने लगी। उसके स्तन लहरा रहे थे, मैं नीचे से जोर लगाता। फिर 69 पोजीशन में, भाभी मेरा लंड चूसती, मैं उसकी चूत चाटता। रस पीता, वो भी मेरे वीर्य को चखती। गांव के बाहर नहर पर ले जाकर पानी में नंगे होकर चोदा। पानी में चूत और लंड रगड़ते, फिर किनारे पर लिटाकर ठोकते। भाभी की चीखें दूर तक जातीं। “आह्ह… चोद, फाड़ दे मेरी चूत!” हम दोनों पसीने से तर, शरीर चिपके हुए। शाम को फिर घर में, दीवार से टिका कर पीछे से। लंड पूरी तरह अंदर, अंडकोष चूत से टकराते। भाभी का पहला ऑर्गेज्म, चूत कसकर लंड निचोड़ने लगा, रस फूटा। मैंने भी अंदर छोड़ा। कुल मिलाकर तीन दिन में दस बार से ज्यादा चोदा। हर बार नई पोजीशन – खड़े होकर, कुर्सी पर, फर्श पर। भाभी की गांड चाटी, उंगली डाली, वो भी मेरी गांड सहलाती। dirty talk भरपूर – “तेरी भाभी की चूत तेरा गुलाम है, चोदते रह!” north bihari desi sex की ये याद अब भी ताजा है, गांव की मिट्टी की खुशबू, पसीने की गंध, चूत के रस की चिपचिपाहट सब कुछ। अगर और कहानी चाहिए तो बताना, लेकिन ये सच है दोस्तों।)