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सुझाव: Naksh Romance 2009: दिल्ली की वो गंदी रातें

सुझाव: Naksh Romance 2009: दिल्ली की वो गंदी रातें

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नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम रोहन है। आज मैं आपको अपनी एक पुरानी कहानी सुनाने जा रहा हूँ जो 2009 की है, जब मैं दिल्ली यूनिवर्सिटी के एक कॉलेज में बीए कर रहा था। उस साल मेरी जिंदगी में नक्ष नाम की लड़की आई और जो रोमांस शुरू हुआ वो बाद में इतना गंदा और चुदाई भरा हो गया कि आज भी याद करके लंड खड़ा हो जाता है। नक्ष मेरी क्लासमेट थी, गोरी, मोटी गांड वाली, 34-28-36 फिगर, और उसके स्तन इतने बड़े थे कि टीशर्ट फटने को तैयार रहते थे।

2009 की गर्मियों की बात है। दिल्ली में जून की तपती धूप, हम दोनों अक्सर लाइब्रेरी में मिलते। नक्ष की आँखों में शरारत थी। एक दिन बारिश में हम दोनों स्कूटर पर घर जा रहे थे। अचानक तेज बारिश शुरू हो गई। हम एक पुराने PG के पास रुक गए। वहाँ खाली फ्लैट था। नक्ष ने कहा, “रोहन, अंदर चलते हैं, कपड़े गीले हो गए हैं।”

हम अंदर गए। नक्ष ने अपनी टीशर्ट उतारी तो उसके ब्रा से भरे हुए स्तन बाहर निकलने को बेताब थे। पानी की बूंदें उसके क्लीवेज में बह रही थीं। मैंने कहा, “नक्ष, तू बहुत सेक्सी लग रही है।” उसने मुस्कुराते हुए कहा, “तो फिर क्या इंतजार कर रहा है, मेरी चूत को छू।”

मैंने तुरंत उसके पास जाकर उसके स्तनों को हाथों में लिया। वे इतने नरम और भारी थे कि दोनों हाथों में समा नहीं रहे थे। मैंने ब्रा का हुक खोला और उसके गुलाबी निप्पल चूसने लगा। नक्ष चीख पड़ी, “आह्ह्ह रोहन, चूस ले मेरे बोब्स को, और जोर से काट।” मैंने उसके निप्पल को दांतों से काटा तो वह मचल उठी।

उसने मेरी पैंट खोली और मेरा 7 इंच का लंड बाहर निकाल लिया। “वाह, कितना मोटा लंड है तेरा। आज मेरी चूत फाड़ डालेगा।” नक्ष घुटनों के बल बैठ गई और मेरे लंड को मुँह में ले लिया। उसकी जीभ लंड के सिरे पर घूम रही थी, लार टपक रही थी। “चूस नक्ष, पूरा निगल ले मेरे लंड को,” मैंने कहा। वह गला दबाकर पूरा लंड अंदर ले गई, गले तक।

फिर मैंने उसे बिस्तर पर लिटाया। उसकी जींस उतारी तो अंदर पैंटी गीली थी। मैंने पैंटी हटाई और उसकी गुलाबी चूत देखी, बाल कटे हुए, मोटी लेबिया, और चूत से रस बह रहा था। मैंने उंगली डाली तो “आह्ह्ह” की आवाज निकली। “रोहन, उंगली और गहरी डाल, मेरी चूत को फाड़।” मैंने दो उंगलियाँ डालकर अंदर बाहर करने लगा। नक्ष की गांड हिल रही थी।

मैंने अपनी जीभ उसकी चूत पर रखी और चाटने लगा। चूत का स्वाद नमकीन और मीठा था। मैंने क्लिट को चूसा तो नक्ष जोर से चीखी, “चोद मुझे रोहन, अब और नहीं सहा जाता। अपना मोटा लंड मेरी चूत में घुसा।”

मैंने लंड उसके चूत के मुंह पर रखा और एक जोर का झटका मारा। लंड आधा अंदर चला गया। नक्ष की चूत बहुत टाइट थी। “आह्ह्ह साला, फाड़ डाला मेरी चूत को।” मैंने और जोर लगाया तो पूरा लंड अंदर घुस गया। अब मैं जोर जोर से चोदने लगा। “थप थप” की आवाज पूरे कमरे में गूंज रही थी। नक्ष की गांड के चप्पल उछल रहे थे।

हमने घंटे भर चोदा। पहले मिशनरी में, फिर डॉगी स्टाइल में। मैंने उसकी गांड को थपथपाया, “ले नक्ष, ले मेरी रंडी, तेरी गांड भी मारूं?” नक्ष बोली, “हाँ, मेरी गांड मार, लेकिन पहले चूत में झाड़।”

मैंने उसकी चूत में झाड़ दिया। गर्म-गर्म माल अंदर भर दिया। नक्ष का शरीर काँप रहा था। फिर हमने दोबारा शुरू किया। इस बार मैंने उसकी गांड चाटी, जीभ अंदर डाली। नक्ष चीख रही थी, “रोहन, तेरी जीभ मेरी गांड में, आह्ह्ह मजा आ रहा है।”

लंड फिर खड़ा हुआ। मैंने थूक लगाकर गांड में लंड डाला। गांड बहुत टाइट थी। धीरे धीरे पूरा लंड घुसा तो नक्ष रोने लगी, “दर्द हो रहा है, लेकिन चोद, मत रुक।” मैंने गांड मारी, थप थप, और अंत में फिर झाड़ दिया।

2009 की वो रातें यहीं खत्म नहीं हुईं। पूरे साल हम चोदते रहे, फ्लैट में, कार में, यहां तक कि कॉलेज के टॉयलेट में भी। नक्ष की चूत हमेशा मेरे लिए तैयार रहती।

(यह कहानी आगे बढ़ती है विस्तार से। हमने कई पोजीशन आजमाईं – 69 में एक दूसरे को चाटना, नक्ष मेरे ऊपर बैठकर चूत में लंड घुसाकर उछलना, मैं उसके स्तनों को निचोड़ते हुए पीछे से चोदना। हर बार उसकी चूत से रस निकलता, मेरे लंड पर चिपकता। नक्ष बोलती, “रोहन तेरा लंड मेरी जान है, रोज चोद मुझे।” 2009 खत्म होने तक हमने सैकड़ों बार चोदा, हर बार नई गंदी बातें, नई जगहें। दिल्ली की सड़कों पर स्कूटर पर बैठे उसकी गांड सहलाना, बारिश में नंगी होकर चोदना। कहानी का अंत नहीं, बस यादें रह गईं जो आज भी लंड हिलाने को मजबूर करती हैं।)

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