नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम रोहन है। मैं जयपुर में रहता हूँ। उम्र मेरी २८ साल है। दो साल पहले की बात है जब मेरी मुलाकात पौसराम देवासी भजन से हुई। पौसराम एक छोटे से गांव से आया था लेकिन शहर में नौकरी ढूंढ रहा था। वो मेरे ऑफिस के पास वाले PG में रहता था। नाम सुनकर लगता था कोई भजन गाने वाला साधु होगा लेकिन असल में वो एक जोशीला, मोटा तगड़ा जवान था। काले बाल, मोटी मूंछें, चौड़ी छाती और नीचे लंड इतना बड़ा कि देखकर डर लगता था।
पहली मुलाकात में ही उसकी आँखों में कुछ गंदी चमक थी। वो अक्सर मेरे फ्लैट आता, चाय पीता और बातें करता। धीरे धीरे बातें सेक्स पर आने लगीं। एक शाम बारिश में वो भीगकर आया। टीशर्ट चिपकी हुई थी, उसकी छाती के बाल दिख रहे थे। मैंने उसे कपड़े बदलने को कहा। वो नहाने गया और जब निकला तो सिर्फ तौलिए में था। तौलिया उसके मोटे लंड को मुश्किल से छुपा पा रहा था।
मैंने पूछा, “पौसराम, ये क्या हालत है?” वो हँसा और बोला, “रोहन भाई, अकेले रहने में मन नहीं लगता। कोई तो चाहिए जो लंड चूस ले।” मैं हैरान हुआ लेकिन मेरा लंड भी खड़ा हो चुका था। उसने तौलिया गिरा दिया। सामने था उसका मोटा, काला, नसों भरा लंड। सिरा लाल हो रहा था और नीचे से रस टपक रहा था। मैं घुटनों के बल बैठ गया और उसका लंड हाथ में लिया। गरम था, नसें फूल रही थीं। मैंने जीभ से चाटा, फिर पूरा मुँह में ले लिया। पौसराम चिल्लाया, “अरे रोहन, तेरी जुबान तो कमाल की है! पूरा चूस ले, मेरे लंड का रस पी ले!”
मैं जोर जोर से चूसने लगा। उसका लंड गले तक जा रहा था। लार निकल रही थी, मेरी ठोड़ी पर बह रही थी। पौसराम मेरे बाल पकड़कर धक्के मार रहा था। “हाँ, ऐसे ही, गला चोद डाल!” उसने १० मिनट तक मेरे मुँह चोदा। फिर बोला, “अब तेरी बारी।”
उसने मुझे खड़ा किया और मेरी पैंट उतारी। मेरा लंड उसके सामने खड़ा था। उसने उसे चूसा लेकिन ज्यादा देर नहीं, बोला, “मैं तेरी गांद मारना चाहता हूँ।” मैंने मेज पर झुककर गांद ऊपर उठा दी। पौसराम ने थूक लगाया और एक उंगली अंदर डाली। फिर दो उंगलियां। “तेरी गांद तो बहुत टाइट है भाई!” उसने लंड का सिरा गांद पर रखा और जोर से धक्का मारा। आधा लंड अंदर घुस गया। दर्द हुआ लेकिन मजा भी आ रहा था। वो धीरे धीरे और जोर से चोदने लगा। “ले, पूरा लंड ले ले! तेरी गांद फाड़ दूंगा!”
हर धक्के के साथ उसका लंड और गहरा जाता। गांद की दीवारें खिंच रही थीं। रस निकल रहा था। २० मिनट तक वो मुझे चोदता रहा। फिर बोला, “अब तू मुझे चोद।” हमने पोजीशन बदली। पौसराम चारों हाथ पैरों पर बैठ गया। उसकी गांद बड़ी और गोल थी, बालों से ढकी हुई। मैंने उसकी गांद चाटी, जीभ अंदर डाली। वो कराह रहा था, “रोहन, चाट ले मेरी गांद, लंड डाल दे!”
मैंने अपना लंड उसकी गांद में घुसाया। वो चीखा, “अरे मादरचोद, इतना मोटा है तेरा! धीरे!” लेकिन मैंने जोर से चोदना शुरू कर दिया। उसकी गांद लाल हो गई थी। हम दोनों पसीने से तर हो चुके थे। लंड और गांद की आवाजें पूरे कमरे में गूंज रही थीं। “फच फच” की आवाज, उसकी सांसें और मेरी चीखें।
हमने घंटे भर तक अलग अलग पोजीशन में चोदा। कभी वो मेरे ऊपर, कभी मैं उसके ऊपर। उसने मेरी छाती चूसी, निप्पल काटे। मैंने उसके मोटे लंड को हाथ से मसलते हुए चोदा। आखिर में वो बोला, “अब रस निकालता हूँ।” उसने मेरा मुँह खोला और अपना लंड अंदर डालकर झड़ गया। गरम गरम रस मेरे गले में उतरा। मैंने भी उसके मुँह में झड़कर रस पिलाया।
उस रात के बाद हम रोज मिलने लगे। कभी फ्लैट में, कभी कार में, कभी ऑफिस के बाद खाली कमरे में। पौसराम की भूख कभी खत्म नहीं होती थी। वो कहता, “रोहन, तेरी गांद और चूत जैसी है, मैं रोज चोदूंगा।”
एक बार मॉनसून में हम दोनों छत पर गए। बारिश गिर रही थी। हम नंगे हो गए। पौसराम ने मुझे दीवार से लगाकर पीछे से चोदा। बारिश की बूंदें हमारे शरीर पर गिर रही थीं, लंड अंदर बाहर हो रहा था। उसकी मोटी उंगलियां मेरी गांद में घुस रही थीं, साथ में लंड। दो लंड जैसा महसूस हो रहा था।
फिर हम फर्श पर लेट गए। वो मेरे ऊपर चढ़ा और लंड मेरी गांद में घुसा दिया। मैं उसके बाल पकड़कर चूम रहा था। हमारी जुबानें एक हो गईं। लंड और गांद का रस मिलकर बह रहा था। पौसराम बोला, “तेरी गांद मेरा घर है, रोज आऊंगा चोदने।”
हम दोनों थककर गिर गए। लेकिन सुबह फिर शुरू हो गया। पौसराम ने मेरे लंड को चूसा, फिर उल्टा लेटकर ६९ पोजीशन में हम एक दूसरे का रस पीने लगे। उसका लंड गले तक, मेरा उसके गले तक।
दो साल बीत चुके हैं। आज भी जब पौसराम आता है तो वही गंदी बातें, वही जोरदार चुदाई। उसकी भजन वाली आवाज अब सिर्फ चीखों में बदल जाती है जब वो कहता, “रोहन, चोद मुझे, फाड़ दे मेरी गांद!”
हमारी कहानी अभी खत्म नहीं हुई। हर रात नई पोजीशन, नया मजा। पौसराम देवासी भजन अब मेरे लिए सिर्फ नाम नहीं, बल्कि वो लंड है जो मेरी गांद का मालिक है।