नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम अर्जुन है। मैं दिल्ली में रहता हूँ, करोल बाग के पास एक छोटे से फ्लैट में। उम्र मेरी २८ साल है और जॉब करता हूँ एक आईटी कंपनी में। जिंदगी काफी नॉर्मल चल रही थी जब तक कि एक रात मैंने अक्षरा नैतिक फोटोज डाउनलोड करने की कोशिश नहीं की।
ये सब शुरू हुआ मेरे दोस्त विक्रम की बात से। वो ऑफिस में बोला, “अर्जुन, यार अक्षरा नैतिक की कुछ प्राइवेट फोटोज लीक हो गई हैं। डाउनलोड कर ले, मजे ले।” अक्षरा नैतिक मेरी कॉलेज की जूनियर थी। सुंदर लड़की, गोरंग, मोटी-मोटी छातियाँ, गोल-गोल गांड और कमर पतली। कॉलेज में सब उसे देख के मरते थे। मैंने भी कभी-कभी फैंटसी की थी लेकिन कभी कुछ नहीं किया।
रात को अकेले फ्लैट में लेटा था। लैपटॉप खोला और सर्च किया “akshara naitik photos download”। कुछ लिंक्स मिले। एक साइट पर क्लिक किया और फोटोज डाउनलोड होने लगीं। पहली फोटो में वो शॉर्ट टॉप और टाइट जींस में थी, मुस्कुराती हुई। दूसरी में वो सिर्फ ब्रा और पैंटी में, बेड पर लेटी हुई। तीसरी फोटो ने तो मुझे झटका दिया – वो पूरी नंगी, अपनी गुलाबी चूत को उंगलियों से फैलाए हुए, और उसकी चूत के होठों से रस टपक रहा था।
मेरा लंड तुरंत खड़ा हो गया। मैंने पैंट उतारी और लंड को हाथ में लिया। फोटोज देखते-देखते मस्ती करने लगा। लेकिन अचानक एक मैसेज आया अज्ञात नंबर से – “ये फोटोज डाउनलोड करके क्या करोगे? मिलना है तो आओ।” नंबर अक्षरा का था। दिल धड़कने लगा।
अगले दिन शाम को मैंने उसको कॉल किया। वो बोली, “अर्जुन, तुमने मेरी फोटोज डाउनलोड की ना? आओ मेरे फ्लैट पर, बात करते हैं।” उसका फ्लैट साउथ दिल्ली में था। मैं स्कूटर लेकर पहुँचा। दरवाजा खोला तो अक्षरा सामने खड़ी थी – लाल रंग की सिल्क की नाइट ड्रेस में, जिसमें से उसकी भारी छातियाँ साफ दिख रही थीं।
“अंदर आओ,” वो बोली और दरवाजा बंद किया। हम सोफे पर बैठे। वो सीधे बोली, “तुमने मेरी नंगी फोटोज देखी हैं, अब मुझे भी तुम्हारा लंड दिखाओ।” मैंने झिझकते हुए अपनी पैंट उतारी। मेरा लंड ७ इंच का, मोटा, नसों से भरा, खड़ा हो चुका था। अक्षरा ने उसे हाथ में लिया और बोली, “वाह, कितना सख्त है।”
उसने मेरे लंड को मुंह में लिया और चूसने लगी। उसकी गर्म, गीली जीभ मेरे लंड के सिरे पर घूम रही थी। “आह्ह्ह… अक्षरा, तेरी जुबान बहुत मस्त है,” मैंने कहा। वो गहरे से चूस रही थी, लंड उसके गले तक जा रहा था। उसका थूक मेरे लंड पर बह रहा था। मैंने उसके बाल पकड़कर उसका सिर आगे-पीछे किया।
फिर मैंने उसकी ड्रेस उतारी। अंदर कुछ नहीं था। उसकी छातियाँ आजाद हो गईं – बड़े, गोल, निप्पल सख्त और गुलाबी। मैंने एक निप्पल मुंह में लिया और चूसने लगा। अक्षरा सिसक रही थी, “अर्जुन, मेरी चूत गीली हो रही है, चोद दो मुझे।”
मैंने उसे सोफे पर लिटाया और उसकी टाँगें फैलाईं। उसकी चूत बिल्कुल साफ, गुलाबी, और रस से भीगी हुई थी। मैंने अपनी उंगली डाली – अंदर गर्म और तंग। “तेरी चूत कितनी टाइट है,” मैं बोला। फिर मैंने अपना लंड उसकी चूत पर रखा और एक जोरदार झटके से अंदर घुसा दिया। “आह्ह्ह… फट गई मेरी चूत!” अक्षरा चीख पड़ी।
मैं धीरे-धीरे चोदने लगा। लंड अंदर-बाहर हो रहा था, चूत का रस निकलकर मेरे लंड पर लग रहा था। “जोर से चोद, अर्जुन! मेरी चूत फाड़ दे!” वो चिल्ला रही थी। मैंने रफ्तार बढ़ा दी। थप्प-थप्प की आवाजें पूरे कमरे में गूंज रही थीं। उसकी छातियाँ उछल रही थीं। मैंने उन्हें हाथों में लिया और निचोड़ते हुए चोदता रहा।
फिर पोजीशन बदली। अक्षरा ने घुटनों के बल बैठकर गांड ऊपर उठाई। मैंने पीछे से लंड डाला। उसकी गांड के छेद में भी उंगली डाली। “गांड़ भी चोदोगे क्या?” वो बोली। मैंने हाँ कहा और लंड निकालकर उसकी गांड में घुसाने लगा। वो तंग थी, लेकिन रस की वजह से धीरे-धीरे अंदर गया। अक्षरा चीख रही थी, “आह्ह्ह… दर्द हो रहा है, लेकिन मजा भी आ रहा है!”
हम घंटों चोदते रहे। एक बार वो मेरे ऊपर चढ़ी और अपनी चूत में लंड लेकर ऊपर-नीचे होने लगी। उसका रस मेरे लंड और अंडकोष पर बह रहा था। “मेरा पानी निकलने वाला है,” मैंने कहा। अक्षरा बोली, “मेरे मुंह में डालो।” मैंने लंड उसके मुंह में डाला और गरम-गरम माल उसके गले में उतार दिया।
उसके बाद हम दोनों थककर लेट गए। अक्षरा बोली, “ये फोटोज डाउनलोड करके तुमने मुझे मिला लिया। अब ये हमारा सीक्रेट है।”
लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। अगले हफ्ते वो मेरे फ्लैट आई। हमने फिर चोदाई की – किचन में, बाथरूम में, और यहां तक कि बालकनी पर भी जहां बारिश हो रही थी। अक्षरा की चूत हमेशा तैयार रहती थी। एक बार उसने मुझे अपनी गांड में पूरा लंड डालकर चोदने को कहा। मैंने उसकी गांड को थप्पड़ मारते हुए जोर-जोर से चोदा। उसका शरीर काँप रहा था, “मैं झड़ रही हूँ!”
हमारी मुलाकातें बढ़ती गईं। कभी वो ऑफिस के बाद आती, कभी रात भर रुकती। हर बार नई पोजीशन – डॉगी स्टाइल में उसकी गांड हिलाते हुए, या मिशनरी में उसकी छातियों को चूसते हुए। उसकी चूत का स्वाद, उसके रस की गंध, सब कुछ मुझे पागल कर देता था।
एक बार हमने शॉवर में सेक्स किया। पानी बह रहा था, अक्षरा मेरे लंड को हाथ से मसल रही थी। मैंने उसे दीवार से टिका कर चोदा। उसकी टाँगें मेरी कमर में लिपटी थीं। “जोर से, अर्जुन! मेरी चूत को अपना बना ले!”
समय बीतता गया। अक्षरा नैतिक की फोटोज डाउनलोड करने की घटना ने मेरी जिंदगी बदल दी। अब हम दोनों मिलकर नई-नई चुदाई की कहानियाँ बनाते। वो कभी-कभी कहती, “अगर तुमने वो फोटोज न डाउनलोड की होती तो आज ये सब नहीं होता।”
मैं आज भी उसकी याद में लंड हिलाता हूँ और सोचता हूँ कि अक्षरा नैतिक की वो नंगी फोटोज सच में कितनी हॉट थीं, लेकिन असली मजा तो उसकी असली चूत और गांड में था। हमारी चुदाई की कहानी अभी भी जारी है, हर रात नया रोमांच।
(कहानी समाप्त, लेकिन यादें हमेशा ताजा।)