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Gayatri and Akshara Patch Up – Lesbian Chut Chusai Ki Garmi — नई पसंद

Gayatri and Akshara Patch Up – Lesbian Chut Chusai Ki Garmi — नई पसंद

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नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम गायत्री है। मैं दिल्ली के करोल बाग में रहती हूँ और अक्षरा मेरी सबसे पुरानी सहेली थी। हम दोनों एक ही कॉलेज से पढ़ी थीं और सालों से दोस्ती थी, लेकिन पिछले महीने एक छोटी सी बात पर हमारा झगड़ा हो गया था। अक्षरा ने मेरी बात नहीं मानी और मैं भी गुस्से में आ गई। दो हफ्ते तक हमने एक दूसरे से बात नहीं की। लेकिन फिर एक शाम अक्षरा ने खुद मैसेज किया कि मिलना है, बात करनी है। मैंने सोचा क्यों ना मिलकर सब क्लियर कर लें।

हम दोनों ने मेरे फ्लैट में मिलने का प्लान बनाया। वो शाम को सात बजे आई। अक्षरा ने टाइट जींस और छोटी सी टॉप पहनी हुई थी, जिससे उसकी बड़ी-बड़ी चूचियाँ साफ दिख रही थीं। मैंने भी शॉर्ट्स और टॉप डाला था। जैसे ही वो अंदर आई, हम दोनों चुपचाप देखती रहीं। फिर अचानक अक्षरा ने कहा, “गायत्री, सॉरी यार, मैं गलत थी।” मैं भी गले लग गई। लेकिन वो गले लगते-लगते ही मेरे कान में फुसफुसाई, “तुझे बहुत मिस किया, तेरी वो गर्म चूत अब भी याद आती है।”

मेरा शरीर झूम उठा। हम दोनों पुरानी दोस्ती से आगे बढ़ चुकी थीं, सालों पहले एक बार पार्टी में नशे में हमने एक दूसरे को चूमा था और फिर पूरी रात चूत चाटी थी। वो यादें ताजा हो गईं। मैंने अक्षरा को और जोर से पकड़ लिया। हमारे होंठ आपस में मिल गए। पहले धीरे-धीरे चूमते हुए, फिर जबरदस्ती जीभ अंदर डालकर चूसने लगीं। अक्षरा की साँसें तेज हो गईं। मैंने उसकी टॉप ऊपर खींची और उसकी काली ब्रा के अंदर से उसकी मोटी-मोटी चूचियाँ निकाल लीं।

उसकी चूचियाँ इतनी नरम और भारी थीं कि दोनों हाथों में भर गईं। मैंने एक चूची मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दिया। अक्षरा चीख पड़ी, “आह्ह गायत्री, तेरे होंठों से चूची चूसने में मजा आ रहा है। और जोर से चूस, मेरी चूत गीली हो रही है।” मैंने दूसरी चूची भी निचोड़ते हुए चूसा। अक्षरा ने मेरी शॉर्ट्स नीचे खींच दी और मेरी पैंटी उतार फेंकी। उसकी उंगलियाँ सीधे मेरी गीली चूत पर आ गईं। वो मेरी फूलती हुई चूत के होठों को सहलाने लगी और बोली, “देख, तेरी चूत कितनी तरस रही थी मेरे लिये। कितना रस निकल रहा है।”

मैंने भी अक्षरा की जींस उतारी। उसकी चूत पर पतली सी पैंटी थी जो पहले से ही उसके रस से भीग चुकी थी। मैंने उसे बिस्तर पर लिटाया और खुद उसके ऊपर चढ़ गई। हम दोनों नंगी हो चुकी थीं। मेरी चूत उसकी चूत से रगड़ खाने लगी। दोनों की गीली चूतें आपस में सट गईं। अक्षरा ने मेरी गांड के दोनों हिस्सों को पकड़कर और जोर से दबाया। हम स्किसरिंग करने लगीं। मेरी चूत की गर्मी उसकी चूत में जा रही थी।

“ओह्ह अक्षरा, तेरी चूत मेरी चूत को कितना चूस रही है। और तेज रगड़, मेरी चूत का रस तेरी चूत में डाल दूंगी,” मैं चीखी। अक्षरा ने मेरी चूत को अपनी चूत से जोर-जोर से रगड़ना शुरू कर दिया। दोनों की चूतें फूल रही थीं, गीला रस निकलकर चादर पर गिर रहा था। मैंने अक्षरा की चूत के ऊपर झुककर उसकी चूत चाटनी शुरू कर दी। उसकी चूत के फूलते हुए होंठों को चाटते हुए जीभ अंदर घुसा दी। अक्षरा का शरीर काँपने लगा। “हाँ गायत्री, मेरी चूत चाट, सारी रस पी ले। तेरी जीभ मेरी चूत में आग लगा रही है।”

मैंने उसकी चूत के अंदर जीभ घुमाते हुए चूसना शुरू कर दिया। अक्षरा ने मेरे बाल पकड़कर अपना चेहरा मेरी चूत पर दबा दिया। अब हम 69 पोजीशन में थीं। दोनों एक दूसरे की चूत चाट रही थीं। अक्षरा ने मेरी चूत के अंदर दो उंगलियाँ घुसा दीं और जोर-जोर से फिंगरिंग करने लगी। मैं भी उसकी चूत में तीन उंगलियाँ डालकर अंदर-बाहर करने लगी। हम दोनों की चूतें चीख-चीखकर रस छोड़ रही थीं।

“गायत्री, मैं झड़ने वाली हूँ, तेरी उंगलियाँ मेरी चूत फाड़ रही हैं,” अक्षरा चिल्लाई। मैंने उसकी चूत और तेज चाटी और उसकी चूत से गरम-गरम रस निकलकर मेरे मुंह में भर गया। मैंने सब पी लिया। फिर अक्षरा ने मुझे लिटाया और मेरी चूत पर अपना मुंह लगा दिया। उसकी जीभ मेरी चूत के अंदर घुसकर इतनी तेजी से हिल रही थी कि मैं पागल हो गई। “अक्षरा, चोद मेरी चूत, अपनी जीभ से फाड़ दे। मैं भी झड़ जाऊंगी,” मैं चीखी।

मेरा शरीर काँप उठा और मेरी चूत से रस की बौछार हो गई। अक्षरा ने सब चाट लिया। फिर हम दोनों गले मिलकर चूमने लगीं। हमारे होंठों पर एक दूसरे का रस लगा हुआ था। हमने फिर से चूचियाँ चूसना शुरू कर दिया। अक्षरा ने मेरी गांड के छेद पर उंगली घुसा दी। मैंने भी उसकी गांड में उंगली डाली। दोनों उंगलियाँ गांड में घुमाते हुए चूत चाट रहे थे।

रात भर हमने चूत चाटी, उंगलियाँ डालीं, चूचियाँ निचोड़ीं और एक दूसरे को चोदा। सुबह होते-होते हम दोनों थक चुकी थीं लेकिन खुश भी। अक्षरा ने कहा, “गायत्री, अब कभी झगड़ा नहीं होगा। तेरी चूत मेरी चूत से हमेशा चिपकी रहेगी।” मैंने भी हाँ कहा और फिर एक आखिरी बार हमने स्किसरिंग की, दोनों की चूतें रस से तर हो गईं।

इस patch up ने हमारी दोस्ती को और गंदा और मजेदार बना दिया। अब हम हफ्ते में दो-तीन बार मिलकर चूत चूसती हैं। दोस्तों, अगर तुम्हारी भी कोई सहेली है जिससे झगड़ा हुआ हो तो मिलकर ऐसे ही patch up करो, मजा आ जाएगा।

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