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Indian Leader With His Girlfriend – Delhi Ki Secret Raat — अनुशंसित

Indian Leader With His Girlfriend – Delhi Ki Secret Raat — अनुशंसित

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नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम विक्रम सिंह है। मैं दिल्ली का एक उभरता हुआ राजनीतिक नेता हूं, लोकसभा चुनाव में टिकट मिलने वाला हूं। उम्र पैंतीस साल, कद छह फुट, शरीर कसरत से तना हुआ। मेरी गर्लफ्रेंड अनन्या, पच्चीस साल की, मॉडलिंग करती है। गोरी चमड़ी, भारी स्तन, चौड़ी कमर और गोल-गोल गांड। आज रात हम दोनों मेरे सरकारी फ्लैट में अकेले थे। बारिश हो रही थी, दिल्ली की सड़कें खाली। अनन्या ने दरवाजा बंद किया और मेरी तरफ मुड़कर बोली, “विक्रम, आज मुझे अपनी पूरी चूत चोद डालो।”

मैंने उसे दीवार से लगाकर चूमा। उसकी जुबान मेरी जुबान से लिपट गई। उसके होंठ नरम थे, लेकिन चूमा गंदा और भूखा था। मैंने उसकी टी-शर्ट ऊपर खींची। काले ब्रा में उसके स्तन फंसे हुए थे। ब्रा खोलते ही बड़े-बड़े स्तन बाहर निकल आए। निप्पल सख्त और गुलाबी। मैंने एक स्तन मुंह में लिया और जोर से चूसा। अनन्या चीख पड़ी, “आह्ह्ह विक्रम, और जोर से चूसो, मेरे स्तनों का रस पी लो।”

मैंने दूसरा स्तन भी हाथ में लिया और दोनों को मसलते हुए चूसने लगा। उसकी सांस तेज हो गई। मैंने उसकी जींस खोली। अंदर काली पैंटी थी, जो पहले से ही गीली हो चुकी थी। मैंने पैंटी उतारी। उसकी चूत बिल्कुल साफ, गुलाबी और फूली हुई थी। बाल कटे हुए थे। चूत के होठों से चमकदार रस टपक रहा था। मैं घुटनों के बल बैठ गया और उसकी चूत को सूंघा। खुशबू पागल कर देने वाली थी।

जीभ बाहर निकालकर मैंने उसकी चूत चाटनी शुरू की। पहले होठों को, फिर अंदर तक। अनन्या मेरे सिर को दबा रही थी, “विक्रम, चूत चाटो, मेरी चूत का सारा रस पी लो।” मैंने उसकी चूत के अंदर जीभ डाली और ऊपर-नीचे करने लगा। उसका क्लिट सूज गया था। मैंने क्लिट को दांतों से हल्का काटा और चूसा। अनन्या का शरीर कांप रहा था। “आह्ह्ह, विक्रम, मैं झड़ने वाली हूं।”

उसके शरीर से गर्म रस निकला और मेरी जीभ पर गिरा। मैंने सब चाट लिया। फिर मैं खड़ा हुआ। मेरी पैंट में लंड तना हुआ था। अनन्या ने खुद मेरी पैंट खोली। मेरा लंड बाहर आया, नौ इंच लंबा, मोटा, नसें उभरी हुई, सिरा लाल और चमकदार। अनन्या ने उसे हाथ में लिया और बोली, “वाह, इतना बड़ा लंड, आज मेरी चूत फाड़ डालेगा।”

उसने मेरे लंड को मुंह में लिया। गर्म और गीला मुंह। वह जोर-जोर से चूसने लगी। उसकी जीभ मेरे लंड के नीचे घूम रही थी। मैंने उसके बाल पकड़कर लंड उसके मुंह में और गहरा डाला। “ले अनन्या, पूरा लंड निगल ले।” वह गले तक ले गई। उसकी आंखों से आंसू आ गए लेकिन वह रुकी नहीं।

मैंने उसे उठाया और बेड पर लिटा दिया। उसकी टांगें फैलाईं। मैं ऊपर चढ़ा और लंड उसकी चूत पर रखा। सिरा चूत के होठों से रगड़ते हुए अंदर डाला। अनन्या चीखी, “आह्ह्ह, धीरे विक्रम, मोटा लग रहा है।” लेकिन मैंने एक झटके में आधा लंड अंदर घुसा दिया। उसकी चूत गर्म और तंग थी। रस से लथपथ।

मैं धीरे-धीरे आगे-पीछे करने लगा। हर धक्के में लंड और गहरा जाता। अनन्या चीख रही थी, “चोदो विक्रम, मेरी चूत को फाड़ दो, अपना नेता का लंड अंदर डालो।” मैंने रफ्तार बढ़ाई। बेड हिल रहा था। उसकी भारी गांड थपथपा रही थी। मैंने उसकी गांड को हाथों से दबाया और लंड और जोर से मारा।

हम पोजीशन बदलते रहे। पहले मिशनरी, फिर डॉगी स्टाइल। अनन्या घुटनों के बल खड़ी हुई, गांड ऊपर। मैं पीछे से लंड डाला। इस पोजीशन में लंड और गहरा जाता था। मैं उसकी गांड थपथपा रहा था, “ले, तेरी गांड लाल कर दूंगा।” अनन्या चीख रही थी, “हां विक्रम, गांड मारो, चूत भी चोदो।”

मैंने उसकी गांड में उंगली डाली। वह और जोर से चीखी। मैंने लंड निकालकर गांड में लगाया। पहले सिरा, फिर धीरे-धीरे पूरा। अनन्या का शरीर कांप रहा था। “आह्ह्ह, गांड फट रही है, लेकिन अच्छा लग रहा है।” मैंने दोनों छेदों में बारी-बारी से लंड डाला। चूत का रस और गांड का मक्खन मिलकर लंड चमक रहा था।

हम घंटों चोदते रहे। पसीना, रस, चीखें, गंदी बातें। अनन्या ने कई बार झड़कर मेरे लंड को गीला किया। आखिर में मैंने लंड निकाला और उसके स्तनों पर झड़ गया। गर्म-गर्म वीर्य उसके स्तनों पर फैल गया। अनन्या ने उसे उंगलियों से लगाकर मुंह में डाला।

हम दोनों थककर बिस्तर पर गिर गए। बारिश अभी भी हो रही थी। अनन्या मेरी छाती पर सिर रखकर बोली, “विक्रम, तुम्हारा लंड सबसे अच्छा है।” मैंने उसे चूमा और सोचने लगा कि अगली बार और क्या नया करेंगे।

(कहानी जारी रखने के लिए और डिटेल: अगली सुबह अनन्या ने मुझे नाश्ते में ही चूसना शुरू कर दिया। लंड फिर खड़ा हो गया। हम किचन में चोदे, सोफे पर, यहां तक कि बालकनी में जहां बारिश हमें भिगो रही थी। हर पोजीशन में उसकी चूत का रस बहता रहा। उसकी गांड लाल हो गई थप्पड़ों से। मैंने उसे दीवार से लगाकर खड़े होकर चोदा, उसकी एक टांग उठाकर। लंड की हर धड़कन पर वह चीखती, “और जोर से, नेता जी, मेरी चूत आपकी है।”

हमने शावर में भी सेक्स किया। पानी के नीचे उसकी चूत फिर तंग हुई। मैंने उसे पीछे से पकड़कर लंड अंदर डाला और पानी की बौछार में ही झड़ गया। अनन्या ने वीर्य को चाटकर साफ किया।

शाम को ऑफिस से लौटकर मैंने उसे नई पोजीशन सिखाई। वह मेरे ऊपर चढ़ी और लंड पर नाचने लगी। उसके स्तन उछल रहे थे। मैंने उन्हें पकड़कर चूसा। उसकी चूत मेरे लंड को निगल रही थी। हम दोनों एक साथ झड़े।

रात भर हम चोदते रहे। हर घंटे में एक नई पोजीशन। डॉगी, काउगर्ल, स्पूनिंग, स्टैंडिंग। अनन्या की चूत सूज गई लेकिन वह और मांगती रही। “विक्रम, मुझे अपनी गर्लफ्रेंड होने पर गर्व है। तुम्हारा लंड मेरी चूत का मालिक है।”

अगली सुबह जब हम अलग हुए तो अनन्या ने कहा, “कल फिर आना, मेरी चूत तुम्हारे बिना सूख जाएगी।” मैंने वादा किया कि अगली रात और लंबी चुदाई होगी।

यह थी मेरी और अनन्या की दिल्ली की वो गर्म रात। भारतीय नेता होने के नाते जिंदगी में बहुत दबाव है, लेकिन अनन्या की चूत में सब भूल जाता हूं।)

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