नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम नितिन है। मैं दिल्ली के एक मिडिल क्लास इलाके में रहता हूँ। उम्र मेरी २८ साल की है। ऑफिस की जॉब है, लेकिन जिंदगी में असली मजा तब आया जब मेरी जिंदगी में नायतिक, अक्षरा और नक्स नाम के तीन लोग आए। नायतिक मेरा पुराना कॉलेज फ्रेंड है, अक्षरा उसकी बीवी है और नक्स उसका छोटा भाई। तीनों एक ही फ्लैट में रहते थे। मैं अक्सर उनके घर जाता था। शुरू में सब नॉर्मल था, लेकिन एक बार मॉनसून की रात में सब कुछ बदल गया।
वो रात बारिश बहुत तेज हो रही थी। मैं उनके घर रुका हुआ था। अक्षरा किचन में चाय बना रही थी। उसकी उम्र २५ साल थी, गोरी चमड़ी, भारी भरे स्तन जो टीशर्ट में साफ दिख रहे थे, और गोल-गोल गांड जो जींस में फिट होकर और भी सेक्सी लग रही थी। नायतिक ऑफिस से लेट आ रहा था। नक्स २२ साल का, फिट बॉडी वाला लड़का, सोफे पर बैठा मोबाइल देख रहा था।
अक्षरा चाय लेकर आई और मेरे पास बैठ गई। उसकी जांघ मेरी जांघ से छू गई। मैंने महसूस किया कि वो आज कुछ अलग लग रही है। उसकी सांसें थोड़ी तेज थीं। “नितिन, बारिश में बहुत ठंड लग रही है ना?” वो बोली। मैंने कहा, “हां, लेकिन तुम्हारी चाय से गर्मी मिल रही है।” वो हंस पड़ी और जानबूझकर मेरी जांघ पर हाथ रख दिया।
धीरे-धीरे बातें सेक्सुअल होने लगीं। अक्षरा ने बताया कि नायतिक उसे संतुष्ट नहीं कर पाता। “उसका लंड छोटा है, जल्दी झड़ जाता है। मैं भूखी रह जाती हूँ।” मैं चौंक गया लेकिन मेरी लंड खड़ा हो गया। नक्स भी सुन रहा था। वो उठा और अक्षरा के पीछे खड़ा हो गया। “भाभी, भाई तो ऐसा है, लेकिन मैं तो हूं ना।” अक्षरा मुस्कुराई और नक्स के हाथ अपनी छाती पर ले गई।
मैंने देखा नक्स अक्षरा के स्तनों को जोर से दबा रहा था। अक्षरा की आंखें बंद हो गईं। “हां नक्स, ऐसे ही दबा, मेरी चुचियां तोड़ डाल।” मैं भी शामिल हो गया। अक्षरा ने मेरी तरफ देखा, “नितिन, आज हम तीनों मिलकर चोदेंगे।” मैंने उसका मुंह अपने लंड पर लगा दिया। वो चूसने लगी, “आह्ह, कितना मोटा लंड है, चूसूं क्या?”
अक्षरा घुटनों के बल बैठ गई। उसने मेरे लंड को मुंह में लिया और जोर-जोर से चूसने लगी। लार टपक रही थी। नक्स ने उसकी गांड के कपड़े उतारे और उसकी गीली चूत में उंगली डाल दी। “भाभी की चूत तो बिल्कुल तर है।” अक्षरा चीखी, “हां नक्स, उंगली और गहरी डाल, मेरी चूत फाड़ डाल।”
हम तीनों बेडरूम में चले गए। अक्षरा नंगी हो गई। उसके स्तन बड़े और काले निप्पल वाले थे। चूत पर बाल थोड़े थे, लेकिन गीली थी। नक्स ने उसकी चूत चाटनी शुरू कर दी। “भाभी का रस कितना मीठा है।” अक्षरा मेरा लंड हाथ में लेकर हिलाने लगी, “नितिन, मेरे मुंह में अपना गरम लंड डाल।”
मैंने उसका मुंह चोदा। नक्स ने अपना लंड निकाला जो काफी लंबा था और अक्षरा की चूत में घुसा दिया। “आह्ह्ह, नक्स, पूरा लंड डाल, मेरी चूत फट रही है।” वो जोर-जोर से चोदने लगा। अक्षरा की चीखें निकल रही थीं। “चोदो मुझे, दोनों मिलकर मेरी चूत और गांड मारो।”
नक्स ने पीछे से उसकी गांड में उंगली डाली। अक्षरा का शरीर कांप रहा था। “मेरा रस निकल रहा है।” वो झड़ गई। लेकिन हम रुके नहीं। मैंने अक्षरा को घोड़ी बना कर चोदा। उसकी गांड थप्पड़ मारते हुए लंड अंदर बाहर कर रहा था। “ले, अक्षरा, मेरी रंडी, तेरी चूत मेरे लंड की गुलाम है।”
नक्स ने आगे से उसका मुंह चोदा। अक्षरा दोनों लंड ले रही थी। “दोनों लंड मेरे अंदर, आह्ह, मजा आ रहा है।” हमने पोजीशन बदली। अक्षरा मेरे ऊपर बैठ गई और लंड अपनी चूत में लिया। वो ऊपर नीचे होने लगी। उसके स्तन उछल रहे थे। नक्स ने पीछे से उसकी गांड में लंड डाल दिया। अब अक्षरा डबल पेनेट्रेशन ले रही थी। “दोनों लंड एक साथ, मेरी जान निकल जाएगी।”
हम तीनों पसीने से तर हो गए थे। अक्षरा की चूत से रस बह रहा था। नक्स ने कहा, “भाभी, अब मेरी गांड चाट।” अक्षरा ने नक्स की गांड चाटी जबकि मैं उसकी चूत चोद रहा था। सब कुछ बहुत गंदा और गर्म हो रहा था।
घंटों चोदने के बाद हम झड़े। नक्स ने अक्षरा की चूत में झड़ दिया। मैंने उसके मुंह में। अक्षरा सब निगल गई। “दोनों का रस पी लिया, अब और चाहिए।”
रात भर हम चोदते रहे। सुबह तक अक्षरा की चूत और गांड लाल हो गई थी। नायतिक को कभी पता नहीं चला। अब हम तीनों मिलकर हफ्ते में कई बार मिलते हैं और नंगी चुदाई करते हैं।
(यह कहानी यहीं खत्म नहीं होती। आगे भी कई रातें ऐसी आईं जहां हम तीनों ने नई-नई पोजीशन ट्राई की, अक्षरा की चूत को और भी ज्यादा फाड़ा, गांड में लंड डाला, स्तनों पर लंड रगड़ा, और हर बार नया मजा आया। दिल्ली की गर्मी में हमारी चुदाई और भी तीखी हो गई। अक्षरा अब हमारी पर्सनल रंडी बन गई है, जो रोज नायतिक के जाने के बाद हमें बुलाती है और कहती है, “आज मेरी चूत और गांड दोनों मारो, मैं भूखी हूं।” हम दोनों लंड लेकर जाते और उसे घंटों चोदते। उसकी चीखें, उसके रस, हमारे लंड का स्वाद, सब कुछ यादगार बन गया।)