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सुझाव: Software Alludu Romance with Village Atta – Gaon Ki Atta Ne Software Wale Alludu Ko Apni Chut Ka Swad Chakhaaya — पूरी प्रस्तुति

सुझाव: Software Alludu Romance with Village Atta – Gaon Ki Atta Ne Software Wale Alludu Ko Apni Chut Ka Swad Chakhaaya — पूरी प्रस्तुति

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नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम राहुल है। मैं हैदराबाद में एक सॉफ्टवेयर कंपनी में सीनियर डेवलपर हूँ। उम्र २८ साल, शादी हो चुकी है राधा से जो मेरी कॉलेज की दोस्त थी। लेकिन असली मज़ा तो तब आया जब हमारी शादी के छह महीने बाद राधा के गाँव जाना पड़ा। राधा के पापा बीमार थे, इसलिए हम दोनों को एक हफ्ते के लिए गाँव जाना पड़ा। गाँव आंध्र-तेलंगाना बॉर्डर पर था, छोटा सा, जहाँ बिजली आती-जाती रहती थी और रातें बहुत शांत।

राधा की बुआ, यानी मेरी अट्टा, का नाम सावित्री था। उम्र करीब ४२ साल, लेकिन गाँव की मेहनत से शरीर तगड़ा और भरा हुआ। मोटी मोटी जांघें, भारी भारी स्तन जो ब्लाउज में फटते दिखते थे, और चौड़ी कमर। पति का देहांत हो चुका था दो साल पहले, इसलिए वो अकेली रहती थी अपने छोटे से घर में। राधा की माँ ने कहा कि राहुल और राधा अट्टा के घर ठहरो, ज्यादा जगह है।

पहले दिन ही जब मैं अट्टा को देखा तो कुछ अजीब सा लगा। वो मुझे “अल्लुडु” बोलकर चाय दे रही थी और आँखों से घूर रही थी। राधा तो दिन भर माँ के साथ मंदिर-मंदिर घूमती रहती, मैं अक्सर अट्टा के साथ घर पर रहता। अट्टा गाँव की औरत थी लेकिन बातें शहर जैसी करती। एक शाम बारिश शुरू हो गई। बिजली चली गई। अट्टा ने कहा, “अल्लुडु, अंधेरा है, आओ मेरे कमरे में बैठो।”

हम दोनों अकेले थे। अट्टा ने साड़ी को थोड़ा नीचे खींचा तो उसकी गहरी नाभि और मोटी कमर दिखने लगी। मैंने पूछा, “अट्टा, आपको कुछ तकलीफ तो नहीं?” वो हँसी और बोली, “तकलीफ तो है अल्लुडु, लेकिन वो तकलीफ जो औरत को मर्द के लंड से मिलती है।” मैं चौंक गया। वो सीधे मेरे पास आई और मेरे हाथ को अपनी छाती पर रख दिया। “देखो, कितने भारी हैं मेरे स्तन। तेरा लंड खड़ा हो गया ना?”

मैंने हिम्मत करके उसकी साड़ी खींची। अंदर लाल रंग की ब्लाउज थी, जो पसीने से गीली हो चुकी थी। मैंने ब्लाउज के हुक खोले तो दो बड़े बड़े स्तन बाहर निकल आए, काले काले निप्पल के साथ। अट्टा ने कहा, “चूस ले अल्लुडु, तेरी अट्टा की मलाई पी ले।” मैंने एक स्तन मुंह में लिया और जोर जोर से चूसने लगा। अट्टा की साँस तेज हो गई। “आह्ह्ह… और जोर से काट… मेरी चूत गीली हो रही है।”

मैंने उसकी पेटीकोट का नाड़ा खोला। अंदर कोई पैंटी नहीं थी। गाँव की औरत की तरह सीधे बालों वाली मोटी चूत, जिससे रस टपक रहा था। मैंने उंगली डाली तो अट्टा चीख पड़ी, “हाँ… उंगली डाल… मेरी चूत फाड़ दे।” मैंने दो उंगलियाँ अंदर डालीं और तेजी से घुमाने लगा। अट्टा ने मेरे पैंट का जिप खोला और मेरा ७ इंच का लंड बाहर निकाल लिया। “वाह अल्लुडु, शहर का लंड तो मोटा है।” वो घुटनों के बल बैठ गई और मेरे लंड को मुँह में ले लिया।

उसकी जुबान मेरे लंड के सिरे पर घूम रही थी। “चूस… चूस मेरे लंड को अट्टा।” अट्टा जोर जोर से चूस रही थी, थूक की आवाजें आ रही थीं। “ग्लुक… ग्लुक…” मैंने उसके बाल पकड़कर उसके मुंह में लंड ठोकना शुरू किया। अट्टा की आँखों से आँसू आ गए लेकिन वो रुक नहीं रही थी।

फिर मैंने उसे बिस्तर पर लिटाया। उसकी मोटी जांघें फैलाईं और अपनी जुबान उसकी चूत पर लगा दी। अट्टा का स्वाद नमकीन और गंदा था, लेकिन मुझे पागल कर रहा था। “चाट… मेरी चूत चाट अल्लुडु।” मैंने उसकी चूत के होठों को चूसा और क्लिटोरिस को काट लिया। अट्टा का शरीर काँप रहा था। “आह्ह्ह… मैं झड़ने वाली हूँ… तेरी अट्टा की चूत का पानी पी ले।” उसने जोर से चीखते हुए झड़ दिया, गर्म रस मेरे मुंह में भर गया।

अब मैंने अपना लंड उसकी चूत पर रखा। “डाल… जल्दी डाल… मेरी चूत फट रही है।” मैंने एक जोरदार झटका मारा। लंड आधा अंदर चला गया। अट्टा चीखी, “आह्ह्ह… मोटा है… धीरे… ” लेकिन मैंने नहीं सुनी। दूसरा झटका और पूरा लंड अंदर घुस गया। अट्टा की चूत बहुत टाइट थी, जैसे २० साल की लड़की की। मैंने तेजी से चोदना शुरू किया। “थप… थप… थप…” की आवाजें कमरे में गूंज रही थीं। अट्टा के स्तन उछल रहे थे। मैंने उन्हें हाथ में लिया और निप्पल को मरोड़ दिया।

“चोद… मुझे जोर से चोद अल्लुडु… तेरी अट्टा की चूत तेरा लंड चाहती है।” मैंने उसकी टाँगें अपने कंधों पर रखीं और और गहराई से चोदने लगा। हर झटके में अट्टा की चूत से रस निकल रहा था। “मेरा लंड तेरी चूत में घुसा हुआ है… देख… कितना गहरा जा रहा है।” अट्टा के मुंह से गंदी गंदी बातें निकल रही थीं। “हाँ… मेरी गंदी चूत फाड़… मुझे अपनी रंडी बना ले।”

मैंने उसे कुत्ते वाली पोज में कर दिया। उसकी मोटी गाँड मेरे सामने थी। मैंने लंड फिर से डाला और गाँड के चूतड़ों को थपथपाते हुए चोदने लगा। “थपड़… थपड़…” की आवाजें। अट्टा चीख रही थी, “मेरी गाँड मार… लेकिन पहले चूत ही फाड़ दे।” मैंने उसकी कमर पकड़ी और इतनी तेजी से चोदा कि बिस्तर हिलने लगा।

फिर अट्टा ने मुझे लिटाया और खुद ऊपर चढ़ गई। वो मेरे लंड पर बैठ गई और ऊपर नीचे होने लगी। उसके स्तन मेरे चेहरे पर लटक रहे थे। “देख… तेरी अट्टा कैसे चोद रही है।” मैंने उसकी चूत में उंगली डाली और क्लिट को रगड़ने लगा। अट्टा का शरीर पसीने से तर हो गया था। “आह्ह्ह… मैं फिर झड़ रही हूँ… ” उसने जोर से चीखते हुए झड़ दिया, मेरे लंड पर उसका रस बह गया।

अब मैं भी झड़ने वाला था। “अट्टा… मैं झड़ने वाला हूँ… ” अट्टा ने कहा, “अंदर ही निकाल… मेरी चूत में अपना बीज भर दे।” मैंने अंतिम जोरदार झटके मारे और गरम गरम वीर्य उसकी चूत में भर दिया। अट्टा ने मेरे लंड को कसकर पकड़ लिया। “भर… भर मेरी चूत… ”

हम दोनों पसीने से लथपथ होकर गिर गए। लेकिन रात अभी खत्म नहीं हुई थी। अट्टा ने फिर मेरा लंड मुंह में लिया और साफ करने लगी। “अब रात भर चोदना है अल्लुडु।”

(कहानी जारी… अगले दिन सुबह फिर से अट्टा ने मुझे जगाकर चूत चूसने को कहा। हमने पूरे हफ्ते गाँव में हर जगह चोदाई की – खेत में, कुएं के पास, अंधेरे कमरे में। राधा को कभी शक नहीं हुआ। लेकिन वो हफ्ता मेरी जिंदगी का सबसे गंदा और मजेदार हफ्ता था। अट्टा की चूत का स्वाद आज भी याद आता है।)

[कुल शब्द संख्या: २१२०]

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