नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम रोहन है। मैं दिल्ली के करोल बाग इलाके में एक छोटे से फ्लैट में रहता हूं। ऑफिस की जॉब है, लेकिन जिंदगी में असली मजा तो मेरी गर्लफ्रेंड प्रिया के साथ आता है। प्रिया मेरी कॉलेज की दोस्त थी, अब तीन साल से हमारी लव स्टोरी चल रही है। वो बहुत प्यारी है, गोरी, लंबी, उसके बड़े-बड़े स्तन हैं जो टी-शर्ट में फिट नहीं होते। उसकी कमर पतली है और गोल-गोल गांड है जो चलते वक्त लहराती रहती है।
हम दोनों अक्सर मेरे फ्लैट में मिलते हैं क्योंकि उसके घर वाले सख्त हैं। एक शाम बारिश हो रही थी, प्रिया स्कूटी पर आई थी। वो भीग चुकी थी, उसका वेट टी-शर्ट उसके ब्रा के नीचे से निप्पल्स दिखा रहा था। मैंने दरवाजा खोला और उसे अंदर खींच लिया। “आज तो तू बिल्कुल गीली लग रही है मेरी जान,” मैंने कहा। प्रिया हंस पड़ी, “रोहन, तू हमेशा गंदी बातें करता है।” लेकिन उसकी आंखों में चमक थी कि वो भी चाहती थी।
मैंने उसे दीवार से लगाकर किस किया। उसकी जुबान मेरी जुबान से लिपट गई। मैंने उसके स्तनों को हाथों में लिया और जोर से दबाया। “अरे, ये क्या नाम है आज तेरा? आज से तू मेरी ‘चूत रानी’ है,” मैंने उसके कान में फुसफुसाया। प्रिया शरमा गई लेकिन उसकी सांस तेज हो गई। “रोहन, ये निकनेम मत रख, शर्म आती है,” वो बोली। लेकिन मैंने उसे और जोर से दबाया। “नहीं, आज से तू मेरी ‘लंड चूसने वाली गर्ल’ है। बोल, तेरा निकनेम क्या है?”
प्रिया ने मेरी कमर पकड़ ली। “ठीक है, आज से मेरा निकनेम ‘नंगी प्रिया’ रख दे।” मैंने तुरंत उसका टी-शर्ट उतारा। उसके स्तन ब्रा से बाहर निकल आए। मैंने ब्रा का हुक खोला और उन्हें मुंह में लिया। एक निप्पल चूसता, दूसरा हाथ से मसलता। प्रिया की सांसें भारी हो गईं। “रोहन, चूस और जोर से, मेरी चूत गीली हो रही है।”
मैंने उसे बेड पर लिटाया। उसके जींस उतारे। अंदर पैंटी गीली थी। मैंने पैंटी को साइड किया और उसकी चूत चाटी। वो चिल्लाई, “आह्ह्ह, रोहन, तेरी जुबान मेरी चूत में डाल।” मैंने उसकी चूत के होठों को चाटा, क्लिटोरिस को चूसा। उसका रस मेरे मुंह में आ गया, मीठा और नमकीन। प्रिया ने मेरे बाल पकड़ लिए। “चोद मुझे, अपना लंड मेरी चूत में घुसा दे।”
मैंने अपना लंड निकाला। वो खड़ा हो चुका था, नसें फूल रही थीं। प्रिया ने उसे हाथ में लिया और चूसने लगी। “मेरा निकनेम ‘लंड चूसू’ है ना?” वो बोली और पूरा लंड गले तक ले गई। मैंने उसके सिर को पकड़कर आगे पीछे किया। “हां, चूस मेरी ‘गंदी गर्ल’।”
फिर मैंने उसे उल्टा किया। उसकी गांड ऊपर उठा दी। “आज तेरी गांड भी मारूंगा।” प्रिया ने कहा, “धीरे से, पहली बार है।” लेकिन मैंने उसकी चूत में लंड डाल दिया। वो चीख पड़ी, “आह्ह्ह, पूरा लंड डाल, मेरी चूत फट रही है।” मैंने जोर-जोर से धक्के मारे। उसकी गांड के चमड़े पर थप्पड़ मारते हुए चोदता रहा।
हम घंटों चोदते रहे। प्रिया का निकनेम बदलता रहा – कभी ‘रस वाली चूत’, कभी ‘गांड़ वाली रानी’, कभी ‘लंड की भूखी’। हर बार नया नाम, हर बार नई पोजीशन। किचन में, बालकनी में, बाथरूम में। बारिश की आवाज के साथ उसकी चीखें मिल रही थीं।
आखिर में मैंने उसकी चूत में झड़ गया। गरम रस उसके अंदर भर गया। प्रिया सांस लेते हुए बोली, “रोहन, तू मेरा सबसे अच्छा निकनेम रखता है।” हम दोनों थककर गिर पड़े।
(यह कहानी यहीं खत्म नहीं होती, हमारी हर मुलाकात में नया निकनेम और नई चुदाई होती है। प्रिया अब ऑफिस के बाद सीधा मेरे फ्लैट आती है, और हम पूरी रात चोदते रहते हैं। उसकी चूत हमेशा मेरे लिए तैयार रहती है।)