नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम अर्जुन है। मैं दिल्ली का रहने वाला हूँ और 2010 के आसपास की बात है जब मैं 28 साल का था। उस समय मैं एक छोटी सी IT कंपनी में जॉब करता था और मेरा परिवार संयुक्त परिवार में रहता था। मेरी बड़ी बहन की शादी हो चुकी थी और उनके पति अक्सर बाहर रहते थे। लेकिन आज की कहानी मेरी पड़ोस वाली आंटी प्रिया के बारे में है, जिनकी उम्र 32 साल थी और जिनका रिश्ता हमारे परिवार से बहुत पुराना था। लोग उन्हें मेरी भाभी जैसा ही मानते थे क्योंकि वो अक्सर हमारे घर आती-जाती रहती थीं। यही वो रिश्ता था जिसका नाम “ये रिश्ता क्या कहलाता है” जैसा लगता था, लेकिन अंदर से ये कुछ और ही था।
प्रिया भाभी की शादी को पाँच साल हो चुके थे लेकिन उनके पति ज्यादातर समय ऑफिस के काम से बाहर रहते थे। वो बहुत सुंदर थीं – गोरी रंगत, भरे हुए स्तन जो 36D साइज के थे, पतली कमर और गोल-गोल नितंब जो चलते समय लहराते थे। मैं अक्सर उनकी छाती को घूरता रहता था जब वो हमारे घर कपड़े सुखाने आतीं। 2010 की गर्मियों में एक बार बारिश में उनका स्कूटर खराब हो गया और मैंने उन्हें लिफ्ट दी। उस दिन से ही कुछ बदल गया।
“अर्जुन, तुम्हारे घर में कोई नहीं है क्या?” उन्होंने पूछा जब मैं उन्हें मेरे फ्लैट में ले आया। “नहीं भाभी, सब शादी में गए हैं।” मैंने जवाब दिया। बारिश तेज हो रही थी और हम दोनों भीग चुके थे। उनकी साड़ी शरीर से चिपक गई थी और उनके स्तनों के निप्पल साफ दिख रहे थे। मेरी नजर वहीं टिक गई। “क्या देख रहे हो?” उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा। “कुछ नहीं भाभी, बस…” लेकिन उन्होंने मेरी तरफ बढ़कर कहा, “अगर तुम्हें इतना शौक है तो छू लो।”
मैं हैरान रह गया। लेकिन मेरी हिम्मत बढ़ गई। मैंने उनके गीले स्तनों को हाथ से दबाया। “आह्ह… अर्जुन, धीरे से। ये रिश्ता क्या कहलाता है, लेकिन आज कुछ नया कर लेते हैं।” उन्होंने कहा। मैंने उनकी साड़ी उतारी। उनके नीचे कुछ नहीं था। चूत पूरी गीली हो चुकी थी। मैंने उंगली डाली – “भाभी, तुम्हारी चूत तो बहुत गर्म है।” “चोदो मुझे अर्जुन, लंड डालो इस चूत में।” उन्होंने गंदी बातें शुरू कर दीं।
मैंने अपना 7 इंच का लंड निकाला। वो उसे हाथ में लेकर बोली, “कितना मोटा है, मेरे पति का तो पतला है।” मैंने उन्हें घुटनों के बल बिठाया और मुँह में डाल दिया। “चूसो भाभी, रस पी लो।” उन्होंने लंड को चाटा, चूसा, गले तक लिया। “ग्लक ग्लक” की आवाजें आने लगीं। मैंने उनके बाल पकड़कर जोर से चोदा।
फिर मैंने उन्हें बेड पर लिटाया। उनकी टाँगें फैलाईं और चूत चाटने लगा। “आह्ह्ह… अर्जुन, जीभ डालो अंदर। मेरी चूत का स्वाद लो।” उनका रस निकल रहा था। मैंने दो उंगलियाँ डालकर अंदर बाहर किया। “चोदो मुझे, अब और नहीं सहा जाता।”
मैंने लंड उनकी चूत पर रखा और एक जोरदार झटके से अंदर डाल दिया। “आह्ह्ह्ह… मर गई रे! इतना मोटा लंड!” उन्होंने चीख मारी। मैं धीरे-धीरे चोदने लगा। “भाभी, तुम्हारी चूत कितनी टाइट है।” “हाँ, चोदो, जोर से चोदो। मेरी गंदी चूत फाड़ दो।”
हम घंटे भर चोदते रहे। पोजीशन बदलते रहे – मिशनरी, डॉगी स्टाइल, काउगर्ल। डॉगी स्टाइल में उनकी गोल गोल गांड को थपथपाते हुए लंड मारता रहा। “थप थप” की आवाजें पूरे फ्लैट में गूंज रही थीं। “अर्जुन, मेरी गांड भी मारो।” उन्होंने कहा। मैंने थूक लगाकर गांड में लंड डाला। “आह्ह्ह… दर्द हो रहा है, लेकिन मजा आ रहा है।”
उनके स्तनों को चूसते चूसते मैंने अंदर झड़ दिया। “भाभी, रस भर रहा हूँ तुम्हारी चूत में।” “हाँ, भर दो। गर्भवती कर दो मुझे।”
ये रिश्ता 2010 में कई महीनों तक चला। हर बार नई जगह पर – बालकनी में, किचन में, कार में। प्रिया भाभी मुझे “मेरा छोटा सा लवर” कहती थीं। गंदी बातें, चूत चाटना, लंड चूसना, गांड मारना – सब कुछ होता था।
एक बार बारिश में छत पर हम नंगे होकर चोद रहे थे। “अर्जुन, ये रिश्ता क्या कहलाता है? लेकिन आज रात भर चोदना।” मैंने उनकी चूत में तीन बार झड़कर भी रुक नहीं पाया। उनका शरीर पसीने और रस से तरबतर था।
ये कहानी आज भी याद आती है। वो गंदी, गर्म, चिपचिपी चुदाई कभी भूल नहीं पाता। अगर तुम्हें और डिटेल चाहिए तो बताना, दोस्तों।