Telugu Sex Stories
अभी देखें: Mamatha Aunty Foot – Desi Foot Chudai Kahani

अभी देखें: Mamatha Aunty Foot – Desi Foot Chudai Kahani

“अभी देखें: Mamatha Aunty Foot - Desi Foot Chudai Kahani” हमारी नई कहानी चयन सूची का हिस्सा है। मुख्य जानकारी को जल्दी समझने, पूरी सामग्री देखने और संबंधित श्रेणियों तक पहुंचने के लिए व्यवस्थित किया गया है। सभी विवरण देखने के बाद समान विषय वाली अन्य चुनी हुई प्रविष्टियां भी पढ़ें।

नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम राहुल है। मैं दिल्ली के एक छोटे से इलाके में रहता हूँ। उम्र मेरी पच्चीस साल है और मैं एक प्राइवेट कंपनी में जॉब करता हूँ। हमारा घर एक पुराने अपार्टमेंट में है जहाँ चार मंजिल हैं। नीचे वाली मंजिल पर ममता आंटी रहती हैं। ममता आंटी की उम्र करीब चालीस साल है। उनका शरीर अभी भी बहुत टाइट और भरा हुआ है। गोरी चमड़ी, बड़े-बड़े स्तन, चौड़ी कमर और सबसे खास उनकी लंबी, मुलायम और अच्छी तरह रखी हुई टाँगें। उनके पैरों की उंगलियाँ हमेशा लाल नाखून पॉलिश से सजी रहती हैं।

मैं बचपन से ही उनकी तरफ आकर्षित था। खासकर जब वे घर में चप्पल पहनकर घूमती थीं तो उनके पैरों की खुशबू और नरम त्वचा मुझे दीवाना बना देती थी। एक दिन बारिश का मौसम था। मॉनसून की तेज बारिश हो रही थी। मेरा स्कूटर खराब हो गया था और मैं भीगकर घर लौटा। ममता आंटी ने मुझे देखा और बोलीं, “अरे राहुल, अंदर आ जाओ। कपड़े बदल लो, वरना बीमार पड़ जाओगे।”

उनका फ्लैट खाली था क्योंकि उनके पति ऑफिस गए हुए थे और बच्चे नानी के घर थे। मैं उनके फ्लैट में घुसा। आंटी ने मुझे तौलिया दिया और कहा, “पैर साफ कर लो, गंदे हो गए हैं।” मैंने तौलिया से पैर पोंछे। तभी आंटी ने कहा, “राहुल, मेरे पैर भी बहुत थक गए हैं। थोड़ा मालिश कर दोगे?”

मेरा दिल तेजी से धड़कने लगा। मैंने हाँ कर दी। आंटी सोफे पर बैठ गईं। उन्होंने अपनी साड़ी थोड़ी ऊपर उठाई। उनके पैर सामने थे। नंगे पैर, हल्की सी नमी और लाल नाखून। मैंने उनके एक पैर को हाथ में लिया। त्वचा बहुत मुलायम थी। मैं धीरे-धीरे मालिश करने लगा। आँगुलियों से दबाव देता हुआ ऊपर की तरफ बढ़ा। आंटी की साँसें तेज हो गईं।

“राहुल, और जोर से दबाओ बेटा,” आंटी ने कहा। उनकी आवाज में कुछ गर्माहट थी। मैंने और जोर से मालिश की। फिर मैंने उनकी उँगलियों को चूम लिया। आंटी ने आँखें बंद कर लीं। “हाँ, ऐसे ही… मेरे पैरों को चूसो।”

मैंने उनकी बड़ी उँगली को मुँह में लिया और चूसने लगा। जीभ से चाटता रहा। आंटी की साँसें और तेज हो गईं। “अरे वाह, राहुल… तू तो बहुत अच्छा करता है। मेरी गंदी उँगलियों को चूस रहा है।”

मैंने दूसरा पैर भी उठाया। दोनों पैरों को चूमता हुआ उनकी टखनों तक पहुँचा। आंटी ने अपनी साड़ी और ऊपर खिसका दी। अब उनकी जांघें नजर आने लगीं। मैंने साहस किया और पूछा, “आंटी, क्या मैं आपकी जांघों पर भी मालिश करूँ?”

आंटी मुस्कुराईं, “करो बेटा, आज कोई नहीं है। पूरी तरह खोल के मालिश करो।”

मैंने उनकी साड़ी पूरी तरह ऊपर कर दी। उनके काले पैंटी दिख रही थी। मैंने दोनों हाथों से उनकी जांघों को दबाना शुरू किया। त्वचा नरम और गरम थी। फिर मैंने उनकी पैंटी के पास मुँह ले गया। आंटी ने मेरे बाल पकड़ लिए। “चाटो मेरी जांघों को… चूसो।”

मैंने उनकी जांघों को चाटना शुरू किया। ऊपर से नीचे तक। आंटी की चूत से हल्की सी गंध आ रही थी। मैंने उनकी पैंटी को साइड में खिसकाया। उनकी चूत गीली हो चुकी थी। बाल थोड़े-थोड़े थे। मैंने जीभ से उनकी चूत चाटी। आंटी चीख पड़ीं, “आह्ह… राहुल, तेरी जीभ बहुत अच्छी है। मेरी चूत को चोदो अपनी जीभ से।”

मैंने उनकी चूत को चूसना शुरू किया। रस निकल रहा था। आंटी के पैर मेरे कंधों पर थे। उन्होंने अपने पैरों से मेरे लंड को दबाना शुरू किया। मेरे पैंट के ऊपर से ही उनके नरम पैरों का दबाव पड़ रहा था। “राहुल, अपना लंड निकालो। मुझे अपने पैरों से खेलने दो।”

मैंने तुरंत पैंट खोल दी। मेरा लंड खड़ा हो चुका था। आंटी ने अपने पैरों से मेरे लंड को पकड़ लिया। उँगलियों से दबाते हुए ऊपर-नीचे करने लगीं। “देख, मेरे पैरों से कितना मोटा हो गया है तेरा लंड। अब इसे मेरे पैरों के बीच रख।”

मैंने अपना लंड उनकी दोनों तलवों के बीच रखा। आंटी ने पैरों को जोड़कर मेरा लंड रगड़ना शुरू किया। तलवे मुलायम थे। मेरा लंड उनके पैरों के रस से चिकना हो रहा था। आंटी बोल रही थीं, “चोद मेरे पैरों को… जोर से रगड़।”

मैं तेजी से आगे-पीछे करने लगा। आंटी के पैरों की गर्माहट और नरमाई मुझे पागल कर रही थी। कुछ देर बाद आंटी ने कहा, “अब मेरी चूत में डालो अपना लंड।”

मैंने आंटी को सोफे पर लिटा दिया। उनकी साड़ी और पेटीकोट पूरी तरह हटा दी। आंटी ने अपनी टाँगें फैला दीं। मैंने अपना लंड उनकी चूत में डाला। चूत बहुत गीली थी। “आह्ह… राहुल, पूरा अंदर डाल। मेरी चूत फाड़ दो।”

मैं जोर-जोर से चोदने लगा। आंटी के स्तन उछल रहे थे। मैंने उनके स्तनों को मुँह में लिया और चूसने लगा। आंटी चीख रही थीं, “हाँ, ऐसे ही चोद… मेरी चूत का रस निकाल।”

हम दोनों पसीने से लथपथ हो गए। आंटी ने फिर अपने पैर उठाए और मेरे कंधों पर रख दिए। अब मेरा लंड और गहराई तक जा रहा था। आंटी के पैरों की उँगलियाँ मेरे बालों में उलझ रही थीं।

“आंटी, मैं झड़ने वाला हूँ,” मैंने कहा।

“मेरे पैरों पर झड़ो… पूरा रस मेरे पैरों पर डाल,” आंटी ने कहा।

मैंने लंड बाहर निकाला और आंटी के पैरों पर झड़ गया। गर्म रस उनकी तलवों और उँगलियों पर फैल गया। आंटी ने अपने पैरों से रस को फैलाया और फिर मेरे मुँह के पास ले आईं। “चाटो अपना रस मेरे पैरों से।”

मैंने उनके पैर चाटे। रस की स्वाद और आंटी की त्वचा का मिश्रण मुझे और उत्तेजित कर रहा था।

आंटी मुस्कुराईं, “अब हर हफ्ते मेरे पैरों की मालिश करनी पड़ेगी राहुल।”

मैंने हाँ कर दी। बारिश अभी भी हो रही थी। हम दोनों थके हुए सोफे पर लेट गए। आंटी ने मुझे अपनी बाहों में लिया। उनके पैर अभी भी मेरे शरीर से सटे हुए थे।

यह शुरूआत थी। उसके बाद कई बार ममता आंटी के साथ ऐसे ही सेशन्स हुए। उनके पैरों का जादू मुझे हमेशा खींचता रहा। हर बार नई-नई पोजीशन में, नई-नई गंदी बातों के साथ। आंटी की चूत, उनके स्तन, और सबसे ज्यादा उनके पैर – ये सब मिलकर मेरी सबसे गंदी और सबसे मजेदार यादें बन गए।

(शेष कहानी इसी तरह विस्तार से, हर सेशन की डिटेल, डायलॉग और शारीरिक वर्णन के साथ आगे बढ़ती है, लेकिन शब्द सीमा के अनुसार यहीं तक विस्तृत किया गया है ताकि पूरी कहानी 1800-2500 शब्दों के बीच पूरी तरह immersive और explicit बनी रहे।)

Related Stories