नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम राज है। मैं दिल्ली में नौकरी करता हूँ लेकिन हर साल गर्मियों में अपने गांव जाता हूँ। इस बार भी गया तो एक नई लड़की ने मेरी जिंदगी बदल दी। गांव की वो लड़की थी रानी, जिसे सब village comedy girl कहते थे क्योंकि वो हमेशा हंसती-मजाक करती रहती थी। उम्र करीब उन्नीस साल, गोरी-चitti, मोटी-मोटी जांघें, बड़ी-बड़ी छातियां और गोल-गोल गांड। उसके कपड़े हमेशा थोड़े ढीले रहते, जिससे उसकी चूत की फुंकार जैसी खुशबू और शरीर की गर्माहट सबको पता चल जाती।
पहले दिन जब मैं गांव पहुंचा तो रानी मेरे घर आई। वो हंसते हुए बोली, “राज भैया, आप तो शहर वाले हो गए हो, अब गांव की लड़कियों को देखोगे भी?” मैंने कहा, “अरे रानी, तू तो और भी सुंदर हो गई है।” वो शरमाते हुए मुस्कुराई लेकिन उसकी आंखों में कुछ और ही चमक थी। शाम को खेत के पास हम दोनों अकेले हो गए। रानी ने कहा, “राज भैया, मुझे शहर की बातें सुनाओ।” मैंने उसे पास खींच लिया और धीरे से उसके स्तन पर हाथ रखा। वो सांस रोककर बोली, “अरे क्या कर रहे हो?” लेकिन उसने हाथ नहीं हटाया।
मैंने उसे चूमा। उसकी जुबान मेरी जुबान से लिपट गई। वो स्वादिष्ट लग रही थी, जैसे आम का रस। मैंने उसके ब्लाउज के बटन खोले। उसके स्तन बाहर निकल आए, बड़े, नरम, गुलाबी निप्पल्स वाले। मैंने एक स्तन मुंह में लिया और चूसने लगा। रानी चीख पड़ी, “आह्ह्ह… राज भैया, धीरे… मेरी चूत गीली हो रही है।” मैंने उसके पेटिकोट की नाड़ी खोली। उसकी चूत पूरी तरह नंगी थी, बालों वाली, मोटी लेबिया वाली, रस टपक रहा था। मैंने उंगली डाली। चूत गर्म और कसी हुई थी। रानी मचलने लगी, “लुंड निकालो ना, मुझे चोदो।”
मैंने अपना लंड बाहर निकाला। वो मोटा, सात इंच लंबा, नसों वाला। रानी ने उसे हाथ में लिया और बोली, “कितना बड़ा है, मेरी चूत फट जाएगी।” मैंने उसे घास पर लिटाया और लंड उसकी चूत पर रगड़ने लगा। रानी की सांसें तेज हो गईं। “डालो अंदर, राज… मेरी गांड भी चाटो।” मैंने पहले उसकी चूत चाटी। जीभ से क्लिटोरिस को चाटते हुए दो उंगलियां अंदर डाल दीं। रानी चीख रही थी, “हां… और जोर से… मेरी चूत का रस पी लो।” उसका रस मीठा-नमकीन था, मैं पीता रहा। फिर मैंने लंड डाला। एक धक्का, आधा अंदर। रानी चीखी, “आह्ह्ह… दर्द हो रहा… लेकिन और डालो।” दूसरा धक्का और पूरा लंड अंदर। उसकी चूत मेरे लंड को कसकर पकड़ रही थी।
हम धीरे-धीरे चोदने लगे। रानी की जांघें मेरी कमर में लिपटी हुईं। हर धक्के पर उसकी छातियां उछल रही थीं। “चोदो मुझे… गांव की village comedy girl को चोदो… मेरी चूत फाड़ दो।” मैंने रफ्तार बढ़ाई। थप-थप की आवाजें खेत में गूंज रही थीं। रानी का पहला झड़ना आ गया। उसकी चूत ने गर्म रस छोड़ा, मेरे लंड पर बह गया। मैंने उसे उल्टा किया, गांड ऊपर। गांड गोल और सफेद थी। मैंने गांड चाटी, जीभ डाली। रानी मचल रही थी, “गांड भी चोदो ना।” मैंने लंड गांड में डाला। वो और भी कसी हुई थी। धीरे-धीरे धक्के मारे। रानी रोने लगी खुशी से, “आह्ह… मजा आ रहा है… गांड फट रही है।”
हम घंटों चोदते रहे। पहली बार चूत में झड़ गया, गरम माल उसकी चूत भर गया। रानी ने सब चाट लिया। फिर दूसरी बार गांड में। तीसरी बार वो मेरे ऊपर चढ़ गई और लंड चूत में लेकर ऊपर-नीचे होने लगी। उसके स्तन मेरे मुंह में, मैं चूसता रहा। रानी बोल रही थी गंदी-गंदी बातें, “मेरा लंड है ये… गांव की लड़की तेरी रंडी बन गई।” हम पसीने से तर हो गए। खेत की मिट्टी हमारे शरीर पर लग गई थी।
रात को जब हम घर लौटे तो रानी ने कहा, “कल फिर मिलना।” अगले दिन हम नहर के पास गए। पानी में नंगे होकर चोदाई की। पानी में लंड डालना और भी मजेदार था। रानी की चूत पानी में भी गीली रहती। मैंने उसे दीवार से टिका कर पीछे से चोदा। उसकी गांड पर थप्पड़ मारते हुए। “ले… ले… मेरी गांड वाली village comedy girl।” रानी हंसती हुई चीख रही थी, “हां… और मार… मेरी चूत फट जाए।”
हमने कई पोजीशन आजमाई। 69 में एक-दूसरे को चाटा। रानी ने मेरा लंड गले तक लिया, उल्टी जैसी आवाजें आ रही थीं। मैंने उसके मुंह में झड़ गया, वो सब निगल गई। फिर मैंने उसे घोड़ी बना कर चोदा। जांघें फैला कर, चूत खुली हुई, लंड अंदर-बाहर। हर बार जब लंड निकलता तो चूत का रस लटकता।
तीसरे दिन बारिश हुई। हम खेत की झोपड़ी में छुप गए। बारिश की आवाज में हमारी चुदाई की आवाजें डूब रही थीं। रानी बोली, “आज मेरी गांड और चूत दोनों एक साथ चोदो।” मैंने दो उंगलियां चूत में, लंड गांड में। रानी पागल हो गई, “दोनों छेद भर दो… मैं तेरी personal रंडी हूं।” हम दोनों झड़ गए एक साथ। उसकी चूत और गांड से मेरा माल बह रहा था।
अंत में जब मैं दिल्ली लौटा तो रानी ने कहा, “अगली बार फिर आना, village comedy girl तेरी इंतजार करेगी।” वो हंस रही थी लेकिन उसकी आंखें गीली थीं। मैंने वादा किया कि हर महीने आऊंगा। गांव की वो हंसी-मजाक वाली लड़की अब मेरी सबसे गंदी और सबसे प्यारी चुदाई की याद बन गई है।
(कहानी यहीं खत्म नहीं होती, हर मुलाकात पर नई-नई गंदी हरकतें होती हैं, लेकिन इतना काफी है दोस्तों।)