नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम नितिक है। मैं दिल्ली का रहने वाला हूँ और आज मैं आपको अपनी शादी की उस रात की पूरी कहानी सुनाने जा रहा हूँ जो कभी भूल नहीं सकती। ये रिश्ता क्या कहलाता है वाली सीरीज में अक्षरा और मेरा रोल देखा होगा, लेकिन असली जिंदगी में हमारी शादी के बाद जो हुआ वो टीवी से कहीं ज्यादा गंदा, गर्म और चूत-लंड भरा था। अक्षरा मेरी नई दुल्हन थी, पच्चीस साल की, गोरी चमड़ी, मोटे-मोटे स्तन जो शादी के लहंगे में फिट नहीं हो रहे थे, और गोल-गोल गोलियाँ जैसी गांड। शादी के बाद हम दोनों मुंबई के एक होटल में सूहागरात मनाने गए थे। रात का वक्त था, बारिश हो रही थी और कमरे में सिर्फ हम दोनो।
अक्षरा ने लाल रंग की सिल्क की साड़ी पहनी हुई थी, लेकिन अब वो सिर्फ ब्लाउज और पेटीकोट में थी। उसके स्तन ब्लाउज से बाहर निकलने को बेताब थे, निप्पल्स सख्त हो चुके थे। मैंने उसे दीवार से लगाया और उसके होंठों पर अपना मुंह मार दिया। हमारा चुम्बन गहरा था, जीभें एक-दूसरे के मुंह में घुस रही थीं। अक्षरा सांस लेते हुए बोली, “नैतिक, आज रात मुझे अपनी रंडी बना लो। मेरी चूत को अपनी लंड से फाड़ दो।”
मैंने उसका ब्लाउज फाड़ा, बटन उड़ गए। उसके बड़े-बड़े स्तन बाहर आ गए, गोरे और मुलायम, निप्पल्स गुलाबी। मैंने एक स्तन को मुंह में लिया और जोर से चूसने लगा। अक्षरा चीख पड़ी, “आह्ह्ह… नैतिक, चूसो मेरे मम्मे, काटो निप्पल्स को।” मैंने दांतों से निप्पल को काटा तो उसकी चूत से पहला रस निकल आया। मैंने हाथ नीचे डाला, उसकी पेटीकोट ऊपर खिसकाई और सीधे उसकी चूत पर उंगली मार दी। चूत पूरी गीली थी, बाल छोटे-छोटे कटे हुए, होंठ फूले हुए। उंगली अंदर डाली तो अक्षरा कांप गई, “हाँ, उंगली डालो मेरी गीली चूत में, दो उंगली डालो।”
मैंने दो उंगली अंदर घुसा दीं और जोर-जोर से आंदोलन करने लगा। चूत से चप-चप की आवाज आने लगी। अक्षरा ने मेरी पैंट खोली और मेरा लंड बाहर निकाला। लंड सात इंच का, मोटा, नसों से भरा, सिरा लाल। उसने तुरंत मुंह में ले लिया और चूसने लगी। “चूसो रंडी, पूरा लंड गले तक ले लो,” मैंने कहा। अक्षरा गले तक ले गई, लार टपक रही थी, उसकी जीभ मेरे लंड के नीचे घूम रही थी। मैंने उसके बाल पकड़े और मुंह में चोदने लगा।
फिर मैंने उसे बिस्तर पर लिटाया। पेटीकोट उतार दिया। अब वो पूरी नंगी थी। उसकी चूत साफ दिख रही थी, गुलाबी होंठ, अंदर गुलाबी मांस, रस बह रहा था। मैंने उसके पैर फैलाए और मुंह लगा दिया। जीभ से चूत चाटने लगा, क्लिटोरिस को चूसा। अक्षरा चीख रही थी, “नैतिक, चाटो मेरी चूत, जिह्वा अंदर डालो, मैं झड़ने वाली हूँ।” उसका रस मेरे मुंह में आया, मीठा और गर्म।
अब मैंने अपना लंड उसकी चूत पर रखा। सिरा घुसाया तो अक्षरा चीखी, “आह्ह्ह… धीरे, मोटा है तेरा लंड।” लेकिन मैंने जोर लगाया और आधा लंड अंदर घुस गया। चूत टाइट थी, गर्म। मैंने जोर से धक्का मारा, पूरा लंड अंदर। अक्षरा की आँखें बंद हो गईं, “फाड़ दिया मेरी चूत को, अब जोर से चोद।”
मैं चोदने लगा। लंड अंदर-बाहर, चप-चप आवाज, अक्षरा के स्तन उछल रहे थे। मैंने उसके स्तन पकड़े और जोर-जोर से दबाते हुए चोदता रहा। “ले रंडी, मेरी चूत की रानी, आज तेरी चूत फट जाएगी,” मैं बोलता रहा। अक्षरा भी गंदी बातें कर रही थी, “हाँ नैतिक, मेरी गांड भी मारना, मेरी चूत का रस पियो।”
हमने पोजीशन बदली। अक्षरा ने घोड़ी बनकर घुटनों के बल बैठ गई, गांड ऊपर। मैंने पीछे से लंड घुसाया। गांड के छेद को भी उंगली से छेड़ा। अक्षरा बोली, “गांड में उंगली डालो, दो उंगली।” मैंने दो उंगली गांड में डालीं और लंड चूत में। दोनों छेद भर गए। अक्षरा चीख रही थी, “दोनों छेद भर दो, मैं तुम्हारी पूरी रंडी हूँ।”
लगातार दस मिनट चोदा। फिर अक्षरा ने मुझे लिटाया और ऊपर चढ़ गई। उसने लंड पकड़ा और अपनी चूत में उतारा। वो ऊपर-नीचे होने लगी, स्तन उछल रहे थे। मैंने उसके कूल्हे पकड़े और ऊपर से धक्के मारे। “चूत का पानी निकाल दो मेरी,” वो बोली।
हम दोनों झड़ गए। अक्षरा का रस मेरे लंड पर बहा, मेरा वीर्य उसकी चूत में भर गया। लेकिन रात अभी खत्म नहीं हुई। हमने फिर शुरू किया। इस बार अक्षरा ने मेरे लंड को चूसा, लार से सना हुआ लंड उसकी गांड के छेद पर रखा। “गांड मारो,” वो बोली। मैंने धीरे से सिरा घुसाया। गांड टाइट थी। आहिस्ता-आहिस्ता पूरा लंड अंदर। अक्षरा चीख रही थी दर्द से लेकिन मजा भी ले रही थी। “जोर से मारो गांड, फाड़ दो।”
मैंने गांड मारी, हाथों से उसके स्तन दबाए। फिर हमने साइड में लेटकर चोदा। लंड चूत में, उंगली गांड में। पूरी रात हम चोदते रहे। सुबह तक अक्षरा की चूत और गांड लाल हो चुकी थी, रस और वीर्य से तर।
ये थी हमारी असली शादी की रात। अक्षरा अब मेरी पत्नी है और हम रोज ऐसी गंदी चुदाई करते हैं। अगर आपको ये कहानी पसंद आई तो बताना, अगली किस्त में और ज्यादा डिटेल दूंगा।