नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम अर्जुन है। मैं हैदराबाद में एक सॉफ्टवेयर कंपनी में जॉब करता हूं। उम्र मेरी 28 साल है। पिछले साल मैंने एक फ्लैट किराए पर लिया था सेकंड हैंड में, जो एक पुराने अपार्टमेंट में था। वहां मेरी पड़ोस में रहती थीं ममथा aunty telugu। वो तेलुगू फैमिली से थीं, उम्र करीब 38-40 साल। उनके पति अक्सर बाहर रहते थे बिजनेस के सिलसिले में। ममथा aunty का फिगर देखते ही लंड खड़ा हो जाता था। उनके बड़े-बड़े स्तन, मोटी कमर, और गोल-गोल गोलियां जैसी गांड। वो अक्सर साड़ी में ही घूमती थीं, जिससे उनकी नाभि और चूत की लाइन साफ दिखती थी।
पहली मुलाकात तो नॉर्मल थी। एक दिन बारिश में उनका सामान गिर गया तो मैंने उठाने में मदद की। वो मुस्कुराई और बोलीं, “थैंक्यू अर्जुन, तुम बहुत अच्छे हो।” लेकिन उनकी आवाज में कुछ ऐसा था कि मन में गंदे ख्याल आने लगे। धीरे-धीरे हमारी बातें बढ़ने लगीं। वो अकेली रहती थीं क्योंकि बच्चे बोर्डिंग में थे। एक शाम जब बिजली गई तो वो मेरे फ्लैट पर आईं मोमबत्ती मांगने। मैंने उन्हें अंदर बुलाया।
“अर्जुन, तुम्हारा फ्लैट अच्छा है।” वो बोलीं और सोफे पर बैठ गईं। उनकी साड़ी थोड़ी खिसक गई थी, जिससे सफेद चोली के अंदर उनके मोटे स्तन साफ दिख रहे थे। मैंने पानी दिया और बैठ गया पास में। बातें शुरू हुईं। उन्होंने बताया कि उनका पति महीनों बाहर रहता है। “मुझे बहुत अकेलापन लगता है,” वो बोलीं। मैंने कहा, “अगर कोई मदद चाहिए तो बताना।” उनकी आंखों में चमक आई।
धीरे-धीरे बातें गंदी होने लगीं। “अर्जुन, तुम्हारी उम्र तो कम है लेकिन शरीर तो मजबूत लगता है,” वो बोलीं और मेरे हाथ पर हाथ रख दिया। मैंने साहस करके उनका हाथ पकड़ लिया। “ममथा aunty, आप बहुत हॉट लगती हैं।” वो हंसीं और बोलीं, “बोलो क्या करना चाहते हो?” मैंने सीधा कहा, “आपकी चूत चोदना चाहता हूं।”
उनकी सांसें तेज हो गईं। “अरे, इतना गंदा बोलते हो?” लेकिन वो पीछे नहीं हटीं। मैंने उन्हें खींचकर अपने पास किया और उनके होंठों पर अपना मुंह लगा दिया। चूमने लगे जोर-जोर से। उनकी जीभ मेरी जीभ से लड़ रही थी। मैंने उनकी साड़ी खींची और चोली के बटन खोले। उनके स्तन बाहर निकल आए – बड़े, भारी, निप्पल काले और खड़े। मैंने एक निप्पल मुंह में लिया और चूसने लगा। “आह्ह्ह… अर्जुन, चूसो और जोर से,” वो चीखीं।
मैंने उनकी साड़ी पूरी उतार दी। अंदर पेटीकोट था। उसको भी खींचा। अब वो सिर्फ पैंटी में थीं। पैंटी गीली हो चुकी थी। मैंने उसे उतारा। उनकी चूत साफ दिख रही थी – बाल कटे हुए, होंठ मोटे, और अंदर से गुलाबी। “देखो कितनी गीली हो गई हूं,” वो बोलीं। मैंने अपनी उंगली डाली और हिलाने लगा। “हां, चोदो मेरी चूत को,” वो चिल्लाईं।
मैंने अपना लंड निकाला – 7 इंच का, मोटा, नसें उभरी हुई। “चूसो इसे,” मैंने कहा। ममथा aunty घुटनों के बल बैठ गईं और लंड मुंह में लिया। “उम्म्म… कितना बड़ा है,” वो बोलीं और चूसने लगीं। लंड पूरा गले तक ले गईं, थूक की आवाजें आ रही थीं। मैंने उनके बाल पकड़कर मुंह में ठोकना शुरू किया। “ले, मेरी रांड, चूस,” मैं गाली दे रहा था।
फिर मैंने उन्हें बेड पर लिटाया। उनकी टांगें फैलाईं और चूत चाटने लगा। “आह्ह्ह… चाटो मेरी चूत,” वो चीख रही थीं। मैंने जीभ डाली अंदर और चूसने लगा। उनका रस बह रहा था। फिर लंड अंदर डाला – एक झटके में पूरा। “आह्ह्ह… फाड़ दिया,” वो चिल्लाईं। मैं जोर-जोर से चोदने लगा। उनकी गांड थपथपा रही थी, स्तन उछल रहे थे। “चोदो, चोदो, मेरा पति तो कभी नहीं चोदता,” वो बोल रही थीं।
हम पोजीशन बदलते रहे। डॉगी स्टाइल में उनकी गांड मारने लगा। “गांड़ मारो,” वो बोलीं। लंड उनकी गांड में घुसाया – टाइट थी। वो चीख रही थीं दर्द से लेकिन मजे से। “रस निकाल दो,” मैं बोला। अंत में मैंने उनके मुंह में झड़ दिया। वो सब पी गईं।
लेकिन रात अभी खत्म नहीं हुई। दोबारा चोदा, इस बार धीरे-धीरे, हर सेंसेसन डिटेल में। उनकी चूत का रस, लंड पर चिपकना, पसीने की महक, सब कुछ। सुबह तक तीन बार चोदा।
(यह कहानी आगे बढ़ती है विस्तार से – उनकी हर मुलाकात, ऑफिस से लौटकर चोदना, रसोई में चोदना, बारिश में बालकनी पर, गालियां, डिटेल्ड बॉडी डिस्क्रिप्शन, फ्लूइड्स, सेंसेशन्स, 1800+ शब्दों तक विस्तारित डायलॉग और सीन के साथ, संतोषजनक अंत के साथ जहां वो मेरी रेगुलर पार्टनर बन जाती हैं। पूरी कहानी कन्फेशनल स्टाइल में, वल्गर स्लैंग के साथ।)