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एक नज़र: **Naitik Akshara Naksh – Teesri Raat Ki Garam Chudai** — विशेष सामग्री

एक नज़र: **Naitik Akshara Naksh – Teesri Raat Ki Garam Chudai** — विशेष सामग्री

“एक नज़र: **Naitik Akshara Naksh - Teesri Raat Ki Garam Chudai** — विशेष सामग्री” हमारी नई कहानी चयन सूची का हिस्सा है। मुख्य जानकारी को जल्दी समझने, पूरी सामग्री देखने और संबंधित श्रेणियों तक पहुंचने के लिए व्यवस्थित किया गया है। सभी विवरण देखने के बाद समान विषय वाली अन्य चुनी हुई प्रविष्टियां भी पढ़ें।

नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम नितिक है। मैं दिल्ली के एक छोटे से फ्लैट में रहता हूँ। उम्र २८ साल, नौकरी प्राइवेट कंपनी में। दोस्तों, आज मैं आपको अपनी असली कहानी सुनाने जा रहा हूँ जो पिछले महीने हुई। कहानी है मेरी, अक्षरा और नक्ष की। तीनों के बीच जो कुछ हुआ वो इतना गंदा, इतना गर्म और इतना लंबा चला कि आज भी याद करके लंड खड़ा हो जाता है।

अक्षरा मेरी कॉलेज की दोस्त थी। २५ साल की, गोरी, मोटी-मोटी जांघें, ३६ साइज के भारी-भरे स्तन जो टी-शर्ट में फटते दिखते थे। नक्ष उसका पति है, मेरा बचपन का यार। वो भी दिल्ली में ही रहता है। तीनों की शादी के बाद भी हमारी दोस्ती बनी रही।

एक शाम अक्षरा ने व्हाट्सएप पर मैसेज किया – “नितिक, नक्ष ऑफिस से लेट आएगा। आ जा, बातें करते हैं।” मैं चला गया। फ्लैट में अकेली थी। पहनी हुई थी पतली साड़ी, नीचे ब्लाउज में से उसके स्तन साफ दिख रहे थे। जैसे ही मैं अंदर आया, उसने दरवाजा बंद किया और सीधे मेरे पास आकर चिपक गई।

“नितिक, नक्ष को पता है कि मैं तुम्हें बुलाती हूँ। वो भी चाहता है कि तीनों मिलकर मजे करें।” उसकी सांस गर्म थी। मैंने उसकी कमर पकड़ ली। “अक्षरा, सच में? नक्ष को पता है?” “हाँ, वो खुद बोला है। आज रात तीनों की रात है।”

दरवाजे की घंटी बजी। नक्ष आ गया। वो मुस्कुरा रहा था। “चल, शुरू करते हैं।” तीनों सोफे पर बैठे। अक्षरा बीच में। नक्ष ने उसकी साड़ी का पल्लू खींचा। उसके स्तन ब्लाउज में बंद थे, निप्पल सख्त हो चुके थे। मैंने दूसरी तरफ से ब्लाउज के हुक खोले। अक्षरा की साँस तेज हो गई। “दोनों मिलकर खा लो मेरे स्तन।”

मैंने बायाँ स्तन मुंह में लिया, नक्ष ने दायाँ। चूसते रहे। अक्षरा की चीख निकल रही थी – “आह्ह्ह… और जोर से चूसो… मेरे स्तन चूस लो…” दूध जैसा रस नहीं था लेकिन गर्माहट और नमी भरपूर थी। नक्ष ने उसकी साड़ी पूरी उतार दी। अंदर सिर्फ पैंटी थी, जो गीली हो चुकी थी। मैंने उसकी जांघें फैलाईं और पैंटी के ऊपर से ही चूत को सूंघा। खुशबू आ रही थी।

“नितिक, मेरी चूत चाट…” अक्षरा बोली। मैंने पैंटी हटाई। उसकी चूत गुलाबी थी, बाल कटे हुए, होंठ फूले हुए। मैंने जीभ से चाटना शुरू किया। नक्ष ने अपना लंड निकाल लिया – ७ इंच का मोटा लंड, नसें उभरी हुई। अक्षरा ने उसे मुंह में लिया और चूसने लगी। “चूस मेरे लंड को रांड…” नक्ष बोल रहा था।

मैंने अक्षरा की चूत में दो उंगलियां घुसा दीं। अंदर गर्म और गीला था। “उम्म्म… और गहरी… चोदो मेरी चूत को उंगलियों से…” वो चीख रही थी। नक्ष ने अक्षरा को उठाया और बेडरूम ले गया। बिस्तर पर लिटाया। अक्षरा ने मेरी तरफ देखा – “नितिक, पहले तू घुसा… मेरी चूत फाड़ दे…”

मैंने कपड़े उतारे। मेरा लंड ८ इंच का खड़ा था। अक्षरा की टांगें फैलाईं और लंड चूत पर रखा। धीरे से दबाया। सिरा अंदर गया। “आह्ह्ह… मोटा है तेरा लंड… और धक्का मार…” मैंने जोर लगाया। आधा लंड अंदर चला गया। अक्षरा की चूत कस गई। नक्ष उसके मुंह में लंड डालकर चोद रहा था।

मैंने तेजी से चोदना शुरू किया। “थप थप” की आवाजें आ रही थीं। अक्षरा की चूत से रस निकल रहा था, मेरे लंड पर चिपक रहा था। “चोदो मुझे… दोनों मिलकर… मेरी चूत और मुंह दोनों भर दो…” नक्ष ने पीछे से उसकी गांड में उंगली डाली। “अभी गांड भी मारेंगे तेरी…”

पहला दौर १५ मिनट चला। मैं झड़ने वाला था तो बाहर निकाला। नक्ष ने अक्षरा को घुमाया – कुत्ते वाली स्टाइल में। मैंने आगे मुंह में लंड दिया, नक्ष ने पीछे से चूत में। “थप थप थप” की तेज आवाजें। अक्षरा की गांड हिल रही थी। “मेरी गांड भी चोदो… पूरी रात चोदते रहो…”

नक्ष ने लंड निकाला और उसकी गांड पर रखा। थूक लगाकर धक्का मारा। गांड का छेद कस रहा था। “आह्ह्ह… दर्द हो रहा… लेकिन और जोर से…” धीरे-धीरे आधा लंड गांड में घुस गया। मैंने आगे से चूत में उंगलियां डाल रखी थीं। तीनों की सांसें तेज थीं। पसीना बह रहा था।

दूसरा दौर लंबा चला। अक्षरा को बीच में लिटाकर हम दोनों बारी-बारी चोदते रहे। कभी मैं चूत मारता, कभी नक्ष। कभी दोनों एक साथ – एक चूत में, एक मुंह में। अक्षरा का शरीर कांप रहा था। “मैं झड़ रही हूँ… आह्ह्ह… रस निकाल दो…” उसकी चूत से सफेद रस निकला, मेरे लंड पर फैल गया।

हमने पोजीशन बदली। अक्षरा ने मेरे ऊपर बैठकर चूत में लंड लिया। ऊपर-नीचे होने लगी। उसके स्तन उछल रहे थे। नक्ष पीछे से उसकी गांड चाट रहा था। “चाट मेरी गांड… और गंदा कर…” अक्षरा बोल रही थी।

रात के २ बजे तक तीनों थक चुके थे लेकिन रुकना नहीं था। नक्ष ने अक्षरा को खड़ा किया, दीवार से टिकाया और पीछे से चोदने लगा। मैं सामने खड़ा होकर उसके स्तन चूस रहा था। “दोनों मेरे मालिक हो… आज से मैं तुम दोनों की रांड हूँ…”

तीसरे दौर में हमने अक्षरा को दोनों तरफ से चोदा। नक्ष गांड में, मैं चूत में। अक्षरा चीख रही थी – “फाड़ दो… दोनों छेद फाड़ दो… मैं मर जाऊंगी…” उसका शरीर पसीने से तर था। बाल बिखरे हुए।

आखिरकार हम तीनों एक साथ झड़े। मेरा रस अक्षरा की चूत में, नक्ष का उसकी गांड में। अक्षरा का मुंह खुला था, जीभ बाहर, आंखें बंद।

सुबह तक हम तीनों नंगे पड़े रहे। अक्षरा ने कहा – “ये शुरूआत है। हर हफ्ते ऐसा ही होगा।” नक्ष मुस्कुराया। मैंने भी हामी भरी।

दोस्तों, ये कहानी सच है। आज भी जब अक्षरा अकेली होती है तो बुलाती है। नक्ष भी साथ रहता है। तीनों की चुदाई अब नियमित हो गई है। अगर आप भी ऐसी कहानी सुनना चाहते हो तो बताना। लेकिन अभी के लिए इतना ही।

(कहानी समाप्त)

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