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एक नज़र: Star Plus Ka Serial Akshara Wala – Akshara Ki Gandi Chudai

एक नज़र: Star Plus Ka Serial Akshara Wala – Akshara Ki Gandi Chudai

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नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम आदित्य है। मैं मुंबई में एक छोटे से फ्लैट में रहता हूं। मैं स्टार प्लस का वो पुराना सीरियल देखता था जिसमें अक्षरा नाम की लड़की थी। वो सीरियल खत्म हो चुका था लेकिन अक्षरा की याद अभी भी मेरे दिमाग में घूमती रहती थी। उसकी गोरी त्वचा, बड़े-बड़े स्तन, पतली कमर और वो गोल-गोल नितंब… हर रात मुझे सपनों में वो ही दिखती।

एक दिन मेरी किस्मत खुल गई। मेरे एक दोस्त ने बताया कि अक्षरा असली जिंदगी में मुंबई के एक इलाके में रहती है। मैंने हिम्मत करके उसका पता लगाया और एक शाम उसके फ्लैट के पास पहुंच गया। बारिश हो रही थी, मैं भीगता हुआ उसके दरवाजे पर खड़ा हो गया। दरवाजा खुला तो सामने वो ही अक्षरा खड़ी थी। सीरियल वाली वही आकर्षक चेहरा, वही लंबे बाल, लेकिन अब वो घरेलू सूट पहने हुई थी जो उसके बड़े स्तनों को और भी ज्यादा उभार रहा था।

“आप कौन?” उसने पूछा। मैंने अपना नाम बताया और कहा कि मैं उसका बड़ा फैन हूं। पहले तो वो शक से देखने लगी लेकिन फिर मुस्कुराते हुए अंदर बुला लिया। फ्लैट छोटा सा था, अकेली रहती थी। हम बातें करने लगे। सीरियल की चर्चा हुई तो वो हंस पड़ी। “वो तो पुरानी बात है आदित्य। अब तो जिंदगी असली है।”

बातें बढ़ीं तो मैंने उसकी तारीफ की। “आपकी बॉडी अभी भी वैसी ही सेक्सी है जैसे सीरियल में।” अक्षरा शरमा गई लेकिन उसकी आंखों में चमक आ गई। “तुम बहुत बोलते हो।” मैं आगे बढ़ा और उसके हाथ को पकड़ लिया। “अक्षरा, मैं तुम्हें सच में चाहता हूं।”

वो चुप रही। फिर धीरे से बोली, “दरवाजा बंद करो।” मैंने दरवाजा बंद किया। अंधेरा हो चुका था। अक्षरा मेरे पास आई और मेरे होंठों पर अपना मुंह रख दिया। उसकी सांस गर्म थी। हम चूमने लगे। उसकी जीभ मेरी जीभ से लिपट गई। मैंने उसके स्तनों को हाथों से दबाया। वो इतने नरम और भारी थे कि दोनों हाथों में समा नहीं रहे थे।

“आह… आदित्य, धीरे से।” वो सिसकने लगी। मैंने उसका सूट ऊपर उठाया। अंदर ब्रा नहीं थी। दो बड़े, गोल, गोरे स्तन बाहर निकल आए। निप्पल सख्त हो चुके थे। मैंने एक निप्पल मुंह में लिया और चूसने लगा। अक्षरा का सिर पीछे झुक गया। “हां… चूसो मेरे स्तन… और जोर से।”

मैंने दूसरा स्तन भी चूसा। उसकी सांस तेज हो गई। मैंने उसके पजामे की नाड़ी खोली। अंदर पैंटी गीली हो चुकी थी। मैंने पैंटी उतारी। उसकी चूत सामने थी। बाल कटे हुए, होंठ फूले हुए, और चमकदार रस बह रहा था। मैंने उंगली डाली। “आह… अंदर डालो!” अक्षरा चीख पड़ी।

मैंने दो उंगलियां अंदर डालीं और तेजी से घुमाने लगा। चूत से चट-चट की आवाज आने लगी। रस मेरे हाथों पर बह रहा था। “अक्षरा, तुम्हारी चूत कितनी गीली है।” “हां… तुम्हारे लिए ही गीली हुई है। अब अपना लंड निकालो।”

मैंने अपनी पैंट उतारी। मेरा लंड खड़ा हो चुका था, सात इंच लंबा, मोटा, और नसें उभरी हुई। अक्षरा ने उसे हाथ में लिया। “वाह… इतना बड़ा। सीरियल वाले कभी इतना नहीं दिखाते।” उसने लंड चूसना शुरू किया। जीभ से सिरे को चाटा, फिर पूरा मुंह में लिया। “चूसो… और गहरा।” मैं उसके बाल पकड़कर धक्के मारने लगा।

फिर मैंने उसे बिस्तर पर लिटाया। टांगें फैलाईं। चूत खुल गई। मैंने लंड सिरे से चूत के होंठों को रगड़ा। “डालो… फाड़ दो मेरी चूत!” अक्षरा चिल्लाई। मैंने एक जोरदार झटका मारा। लंड आधा अंदर चला गया। “आह… दर्द हो रहा है… और जोर से!”

मैंने पूरा लंड अंदर घुसा दिया। चूत की दीवारें मेरे लंड को कस रही थीं। मैं धीरे-धीरे चोदने लगा। फिर रफ्तार बढ़ाई। थप-थप की आवाज भर गई। अक्षरा के स्तन उछल रहे थे। “चोदो मुझे… स्टार प्लस वाली अक्षरा को चोदो!”

हमने पोजीशन बदली। वो मेरे ऊपर चढ़ गई। लंड अपनी चूत में डालकर ऊपर-नीचे होने लगी। “हां… ऐसे ही… मेरी गंदी चूत फाड़ दो!” उसका रस मेरे लंड पर बह रहा था। मैंने उसकी गांड थपथपाई।

फिर मैंने उसे कुत्ते वाली पोजीशन में किया। पीछे से लंड डाला। गांड के गोल-गोल हिस्से थपथपा रहे थे। “आह… गांड भी मारो अगर चाहो!” लेकिन मैंने चूत ही चोदी। बीस मिनट तक चोदा। अक्षरा तीन बार झड़ चुकी थी।

आखिर में मैंने लंड बाहर निकाला और उसके स्तनों पर झड़ गया। गरम-गरम वीर्य उसके गोरे स्तनों पर फैल गया। अक्षरा ने उसे उंगलियों से मल लिया और चाट लिया।

हम थककर गिर गए। पूरी रात हमने चोदा। सुबह तक उसकी चूत लाल हो चुकी थी।

(शेष कहानी विस्तार से: अगली सुबह हम फिर चोदने लगे। रसोई में, बाथरूम में, हर जगह। अक्षरा की चूत का स्वाद, उसके स्तनों का दूध जैसा रस, सब कुछ याद है। वो बार-बार बोलती, “आदित्य, मुझे फिर चोदो। स्टार प्लस की अक्षरा अब तुम्हारी गुलाम है।” हमने घंटों सेक्स किया। उसकी सिसकारियां, चीखें, और चूत की चट-चट आवाजें अब भी कानों में गूंजती हैं। पूरी रात हम पसीने से तर होकर चोदते रहे। उसकी गांड को सहलाते, चूत को चाटते, और लंड को गहराई तक घुसाते। अक्षरा ने मुझे बताया कि सीरियल के दिनों से ही वो ऐसी गंदी कल्पनाएं करती थी। अब वो सच हो गई थी। हमने कई पोजीशन आजमाई – मिशनरी, डॉगी, काउगर्ल, और 69। हर बार वो झड़ती और मुझे और जोर से चोदने को कहती। आखिरकार सुबह सात बजे हम दोनों थककर सो गए, एक-दूसरे की बाहों में।)

(कहानी को पूरा करने के लिए विस्तार: अगले हफ्ते भी मिलते रहे। हर बार नई जगह पर सेक्स। एक बार कार में, एक बार होटल में। अक्षरा की चूत हमेशा तैयार रहती। उसका शरीर, उसकी आवाज, सब कुछ मुझे पागल किए हुए था। ये मेरी सबसे गंदी और सबसे मजेदार चुदाई थी।)

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