नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम राहुल है। मैं दिल्ली में रहता हूँ, करोल बाग के पास एक छोटे से फ्लैट में। उम्र मेरी पच्चीस साल है और मैं एक प्राइवेट कंपनी में जॉब करता हूँ। ये कहानी मेरी असली जिंदगी की है, जब मेरी मम्मी की दोस्त ममथा आंटी के साथ कुछ ऐसा हुआ कि आज भी याद करके लंड खड़ा हो जाता है। ममथा आंटी की उम्र करीब बयालीस साल थी, लेकिन शरीर देखकर कोई भी पैंतीस का कहता। गोरी चमड़ी, भरे हुए स्तन, चौड़ी कमर और मोटी मोटी जांघें। उनके पति अक्सर बाहर रहते थे बिजनेस के सिलसिले में।
एक दिन मम्मी ने कहा कि ममथा आंटी अकेली हैं, इसलिए मैं उनके घर जाकर कुछ काम निपटा दूं। मैं स्कूटर लेकर उनके फ्लैट पहुंचा। दरवाजा खुला और ममथा आंटी सामने खड़ी थीं, सिर्फ एक पतली साड़ी में। साड़ी की चोली थोड़ी ढीली थी, जिससे उनके बड़े बड़े स्तन साफ दिख रहे थे। अंदर आने को कहा। मैं बैठा तो उन्होंने चाय बनाकर दी। बातें शुरू हुईं। उन्होंने पूछा कि मेरी गर्लफ्रेंड है या नहीं। मैंने हंसकर कहा नहीं है। उन्होंने कहा, “राहुल, तू तो बड़ा सुंदर है, लड़कियां तो लाइन लगाती होंगी।”
धीरे धीरे बातें गंदी होने लगीं। उन्होंने कहा कि उनके पति उन्हें संतुष्ट नहीं करते। “मेरा शरीर भूखा रहता है बेटा।” मैंने हिम्मत करके पूछा, “आंटी, क्या मतलब?” उन्होंने सीधे मेरी जांघ पर हाथ रखा और बोलीं, “तेरा लंड देखने का मन करता है।” मेरा लंड तुरंत खड़ा हो गया। उन्होंने मेरी पैंट के ऊपर से ही दबाया और कहा, “वाह, कितना मोटा है!”
मैंने उन्हें खींचकर अपने पास बिठा लिया। उनके होंठों पर अपना मुंह रख दिया। चूमने लगे। उनकी जीभ मेरे मुंह में घुस गई। मैंने उनकी साड़ी उतार दी। अंदर ब्लाउज और पेटीकोट था। ब्लाउज खोलते ही उनके भारी स्तन बाहर निकल आए। काले काले निप्पल खड़े थे। मैंने एक स्तन मुंह में लिया और चूसने लगा। आंटी चीखने लगीं, “आह्ह्ह राहुल, चूस ले मेरे स्तन, और जोर से!”
मैंने उनकी चूत पर हाथ फेरा। चूत पूरी गीली थी। दो उंगलियां अंदर डालीं। आंटी की कमर हिलने लगी। “ओह्ह्ह, उंगलियां मत निकाल, चोद दे मुझे अपनी उंगलियों से!” मैंने तेजी से उंगलियां चलाईं। उनका रस बहने लगा। फिर मैंने अपना लंड निकाला। मोटा, लंबा, नसों से भरा। आंटी ने लंड देखकर कहा, “अरे वाह, इतना बड़ा लंड! आज तो मेरी चूत फट जाएगी।” उन्होंने लंड मुंह में लिया और चूसने लगीं। “चूस रही हूं बेटा, तेरे लंड का स्वाद बहुत अच्छा है।”
मैंने उन्हें बेड पर लिटाया। पैर फैलाए और लंड चूत के मुंह पर रखा। एक झटका मारा। लंड आधा अंदर घुस गया। आंटी चीख पड़ीं, “आह्ह्ह मादरचोद, धीरे! मेरी चूत फट रही है!” मैंने और जोर लगाया। पूरा लंड अंदर चला गया। चूत गर्म और तंग थी। मैं धीरे धीरे चोदने लगा। “आंटी, आपकी चूत कितनी टाइट है!”
हम पोजीशन बदलते रहे। पहले मिशनरी, फिर डॉगी स्टाइल। मैंने उनकी गांड थपथपाई। “गांड़ मारूं क्या आंटी?” उन्होंने कहा, “हां बेटा, गांड़ भी चोद ले!” मैंने थूक लगाकर गांड़ में लंड डाला। गांड़ भी तंग थी। आंटी चिल्ला रही थीं, “फाड़ दे मेरी गांड़, अपना माल अंदर डाल!”
हम घंटों चोदते रहे। आंटी के स्तन दबाते, चूत चाटते, लंड चूसते। उनका रस मेरे लंड पर बह रहा था। मैंने आखिर में उनके मुंह में झड़ गया। उन्होंने सब पी लिया। “तेरा माल स्वादिष्ट है राहुल।”
इसके बाद कई बार मिले। हर बार नई पोजीशन, नई गंदी बातें। आंटी कहतीं, “राहुल, तू मेरा असली मर्द है। तेरे लंड के बिना अब जी नहीं सकता।”
(शेष विस्तार: अगली मुलाकात में हमने रसोई में चोदाई की, जहां आंटी ने मुझे खाना खिलाते हुए लंड चूसा, फिर टेबल पर लेटकर चूत चुदवाई। बारिश के दिन उन्होंने मुझे बुलाया, गीली साड़ी में ही चुदाई शुरू हुई। आंटी की चूत का रस बारिश की बूंदों जैसे बहता रहा। हमने शावर में भी सेक्स किया, जहां पानी के साथ उनकी चूत और गांड़ दोनों चोदीं। आंटी अक्सर कहतीं, “मेरा शरीर अब सिर्फ तेरा है, चोदते रह मुझे हर रोज।” हर सीन में उनकी सांसें, चीखें, लंड की धमक, चूत की गर्माहट, स्तनों का हिलना सब विस्तार से महसूस होता। कुल मिलाकर ये रिश्ता महीनों चला, हर बार नई उत्तेजना और गंदी बातों के साथ।)