नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम राजेश है। मैं पटना से हूँ, बिहार का एक छोटा सा कस्बा। उम्र मेरी २८ साल है और मैं दिल्ली में एक छोटी सी प्राइवेट कंपनी में जॉब करता हूँ। पिछले साल की बात है जब मेरी चाची रीना बिहार से दिल्ली आ गई थीं। चाची की उम्र ३५ साल थी, लेकिन उनका शरीर देखकर कोई भी २५ साल की जवानी समझता। मोटी-मोटी छातियाँ, चौड़ी कमर, गोल-गोल और भारी गांड जो चलते वक्त लहराती थी। चाची विधवा थीं, चाचा का दो साल पहले निधन हो गया था।
जब चाची दिल्ली आईं तो मेरे पास ही रुकने लगीं क्योंकि मेरा एक छोटा सा फ्लैट था। पहले कुछ दिन नॉर्मल रहे। चाची घर का काम करतीं, खाना बनातीं और मैं ऑफिस जाता। लेकिन धीरे-धीरे चाची की नजरें बदलने लगीं। रात को जब मैं शर्टलेस सोने जाता तो चाची मुझे घूरतीं। एक रात बारिश हो रही थी, बिजली गई हुई थी। चाची ने कहा, “राजेश, अंधेरा है, डर लग रहा है।” मैंने उन्हें पास बुलाया।
उनकी साड़ी की पल्लू सरक गई थी। उनके बड़े-बड़े स्तन साफ दिख रहे थे। मैंने हिम्मत करके उनकी एक छाती पर हाथ रख दिया। चाची ने सांस रोकी लेकिन रोका नहीं। “राजेश, क्या कर रहे हो?” उन्होंने फुसफुसाया। मैंने कहा, “चाची, आपकी गांड और चूत देखकर मेरा लंड खड़ा हो जाता है।”
चाची हँसीं और बोलीं, “बदमाश, तो आज रात तेरी चाची की चूत और गांड दोनों चोद ले।” मैंने उनकी साड़ी उतारी। नीचे ब्लाउज और पेटीकोट था। ब्लाउज खोला तो उनकी भारी छातियाँ बाहर निकल आईं। निप्पल्स सख्त और काले थे। मैंने एक निप्पल मुंह में लिया और चूसने लगा। चाची का हाथ मेरे लंड पर चला गया। उन्होंने कहा, “अरे वाह, कितना मोटा लंड है तेरा। बिहारी लंड तो सच में तगड़ा होता है।”
मैंने उनकी पेटीकोट उतारी। उनकी चूत पूरी तरह गीली थी। बालों वाली चूत, होंठ मोटे और लाल। मैंने उंगली डाली तो चाची चीख पड़ी, “आह्ह्ह… राजेश, उंगली मत डाल, सीधा लंड घुसा दे।” मैंने अपना ७ इंच का मोटा लंड निकाला। चाची ने उसे हाथ में लिया और चूसने लगीं। “चल, मेरी चूत चाट, फिर गांड मार।”
मैंने उनकी चूत चाटी। जीभ घुसा दी, रस निकल रहा था। चाची का शरीर काँप रहा था। “राजेश, अब चोद मुझे।” मैंने लंड उनकी चूत में घुसाया। एक ही झटके में आधा अंदर। चाची चीखी, “आह्ह्ह… मर गई रे! मोटा लंड है तेरा। धीरे… धीरे चोद।”
मैंने जोर-जोर से चोदना शुरू किया। थप-थप की आवाज पूरे कमरे में गूंज रही थी। चाची की छातियाँ उछल रही थीं। “ले, ले मेरी चाची की चूत। तेरी चूत फाड़ दूंगा।” चाची बोल रही थीं, “हाँ, चोद… जोर से चोद। मेरी गांड भी मार।”
मैंने लंड निकाला और उनकी गांड पर रखा। गांड भी काफी टाइट थी। थोड़ा सा थूक लगाकर लंड घुसाया। चाची चीखने लगीं, “आह्ह्ह… गांड फट गई! राजेश, धीरे… गांड मार।” मैंने उनकी गांड मारना शुरू किया। एक हाथ से उनकी चूत में उंगली डाली। चाची का रस बह रहा था।
हम दोनों पसीने से तर हो गए थे। चाची ने मुझे नीचे लिटाया और ऊपर चढ़ गईं। उनकी गांड मेरे लंड पर घूम रही थी। “देख, तेरी चाची कैसे चोदती है।” उनकी छातियाँ मेरे मुंह में आ रही थीं। मैं चूस रहा था और वे चोद रही थीं।
फिर मैंने उन्हें कुत्ते वाली पोजीशन में डाला। पीछे से लंड गांड में घुसाया। जोर-जोर से थापें मार रहा था। चाची बोल रही थीं, “राजेश, तेरी चाची की गांड का मालिक तू बन गया। रोज चोदना अब।”
हमने घंटों चोदा। चाची ने कई बार झड़ चुकी थीं। आखिर में मैंने उनके मुंह में लंड डाला और गरम-गरम माल निकाल दिया। चाची ने सब पी लिया। “स्वादिष्ट है तेरा माल।”
उस रात के बाद हर रात यही सिलसिला चला। सुबह ऑफिस जाने से पहले चाची की चूत चाटता, रात को गांड मारता। चाची भी मुझे “मेरा लंड” कहकर बुलातीं। एक बार हमने बाथरूम में चोदा। चाची दीवार से सटी हुई थीं, मैं पीछे से चोद रहा था। पानी गिर रहा था, हम दोनों भीग गए।
चाची की गांड लाल हो गई थी थप्पड़ों से। उनकी चूत सूज गई थी रोज की चुदाई से। लेकिन दोनों को मजा आ रहा था। चाची कहतीं, “राजेश, तू बिहारी है, तेरा लंड भी बिहारी जैसा तगड़ा। दिल्ली वाले लड़के ऐसे नहीं चोदते।”
एक शाम ऑफिस से जल्दी आया। चाची रसोई में थीं। मैंने पीछे से उनकी कमर पकड़ी, साड़ी ऊपर उठाई और सीधा लंड चूत में घुसा दिया। चाची हँस पड़ीं, “अरे, भूखा है क्या आज?” मैंने जोर से चोदा, बर्तन गिरने लगे।
रात को हमने नई पोजीशन आजमाई। चाची मेरे ऊपर, उनकी गांड मेरे चेहरे पर, मैं उनकी चूत चाट रहा था और वे मेरे लंड को चूस रही थीं। ६९ पोजीशन में दोनों झड़ गए।
इस तरह महीने भर चला। चाची अब खुलकर गंदी बातें करतीं। “राजेश, आज मेरी चूत में माल डाल, गांड में नहीं।” मैंने उनके अंदर झड़कर चूत भर दी। रस बह रहा था।
फिर एक दिन चाची ने कहा कि उन्हें बिहार जाना है। आखिरी रात हमने पूरी रात चोदा। सुबह तक तीन बार चुदाई हुई। चाची बोलीं, “राजेश, जब भी आएंगी, तेरी चाची की चूत और गांड तेरे लिए ही।”
अब भी जब चाची आती हैं तो हम दोनों वही मजा लेते हैं। बिहारी देसी चुदाई का मजा ही अलग है।
(कहानी समाप्त)