नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम विकास है। मैं मुंबई का रहने वाला हूँ और पिछले दस साल से छोटी-मोटी कॉमेडी फिल्में बना रहा हूँ। ज्यादातर फिल्में रिमोट विलेज पर आधारित होती हैं, क्योंकि बजट कम लगता है और लोकल कलाकार सस्ते मिल जाते हैं। लेकिन इस बार की फिल्म “Comedy Movies Based on Remote Village” का शूटिंग एकदम सच्चे रिमोट गांव में होने वाली थी। गांव का नाम था बरेली के पास का छोटा सा ठिकाना, जहां बिजली भी ठीक से नहीं आती, लेकिन औरतों की गांड और चूतें इतनी रसीली कि दिल बैठ जाए।
मैं डायरेक्टर के तौर पर वहां पहुंचा तो सबसे पहले मेरी नजर पड़ी गांव की सबसे हॉट औरत पर। उसका नाम था रेखा, उम्र करीब ३२ साल, लेकिन शरीर ऐसा कि कोई २५ साल की लगे। उसके बड़े-बड़े स्तन, मोटी गांड और पतली कमर देखकर मेरा लंड तुरंत खड़ा हो गया। रेखा विधवा थी, उसके पति की मौत हो चुकी थी और वो अकेली रहती थी। फिल्म में उसे एक कॉमेडी सीन में भाभी का रोल दिया था, जहां वो नायक से मस्ती करती है। शूटिंग शुरू हुई तो रेखा को डायलॉग बोलने में दिक्कत हो रही थी। मैंने उसे अलग से ट्रेनिंग देने का बहाना बनाकर अपनी झोपड़ी में बुला लिया।
“विकास जी, ये डायलॉग कैसे बोलें?” रेखा ने पूछा, उसकी आवाज में थोड़ी शरारत थी। मैंने दरवाजा बंद किया और बोला, “पहले ये देखो, तुम्हारा शरीर फिल्म के लिए परफेक्ट है।” मैंने उसके स्तनों पर हाथ फेरा। रेखा ने आंखें बंद कर लीं और सांस तेज हो गई। “अरे साहब, गांव में कोई देख लेगा तो…” मैंने उसका मुंह बंद करते हुए बोला, “कोई नहीं देखेगा।” मैंने उसकी साड़ी उतारी। उसके काले, मोटे स्तन बाहर निकल आए, निप्पल्स सख्त हो चुके थे। मैंने एक निप्पल मुंह में लिया और चूसने लगा। रेखा चीख पड़ी, “आह्ह्ह… चूसो और जोर से, मेरा दूध निकाल दो!”
मैंने उसकी चूत पर हाथ रखा। वो पहले से ही गीली हो चुकी थी। “रेखा, तेरी चूत कितनी गर्म है!” मैंने दो उंगलियां अंदर डालीं और तेजी से घुमाने लगा। रेखा की गांड फड़क रही थी। “विकास, अब लंड डालो ना, मैं मर रही हूं!” मैंने अपना लंड निकाला, जो ८ इंच का मोटा था। रेखा ने उसे हाथ में लिया और चूसने लगी। “उम्म्म… कितना बड़ा लंड है, पूरा मुंह भर रहा है।” उसकी जीभ मेरे लंड के सिरे पर घूम रही थी, लार टपक रही थी।
मैंने उसे चारपाई पर लिटाया और उसके पैर फैला दिए। उसकी चूत पूरी तरह खुल गई, गुलाबी अंदरूनी हिस्सा दिख रहा था, रस बह रहा था। मैंने लंड का सिरा चूत के मुंह पर रखा और एक झटके में आधा अंदर घुसा दिया। रेखा चीखी, “आह्ह्ह… फाड़ डाला! धीरे…” लेकिन मैंने रुकना नहीं, पूरा लंड अंदर तक ठोक दिया। “ले ले रेखा, तेरी चूत मेरे लंड की गुलाम बन गई!” मैं तेजी से चोदने लगा। थप्प-थप्प की आवाजें पूरे झोपड़ी में गूंज रही थीं। रेखा की गांड लाल हो रही थी, उसके स्तन उछल रहे थे। “चोदो मुझे, गांड भी मारो!”
मैंने उसे उल्टा किया, गांड ऊपर करके। उसकी गांड की दरार में लंड घुसाया। “ये ले, तेरी गांड भी फाड़ दूंगा!” रेखा चिल्ला रही थी, “हां, गांड मारो, मैं तुम्हारी रंडी हूं!” लंड और चूत का रस मिलकर झाग बन रहा था। मैंने २० मिनट तक गांड मारी, फिर चूत में झड़ गया। गर्म माल उसके अंदर भर दिया। रेखा सांस लेते हुए बोली, “विकास, ये फिल्म की ट्रेनिंग रोज चाहिए।”
अगले दिन शूटिंग के दौरान रेखा ने मुझे आंख मार दी। फिल्म का सीन था जहां नायक गांव की औरतों से मस्ती करता है। असली लाइफ में भी वही हो रहा था। शाम को गांव की दूसरी औरत, २८ साल की मीना, मेरे पास आई। “सर, मुझे भी रोल चाहिए।” मीना की जांघें मोटी थीं, उसकी चूत की गंध दूर से आ रही थी। मैंने दोनों को एक साथ बुलाया। तीनों नंगे हो गए। रेखा ने मीना की चूत चाटनी शुरू कर दी, जबकि मैं मीना के मुंह में लंड ठेल रहा था। “चूस रंडी, दोनों चूतें मेरी हैं!”
मीना चीख रही थी, “आंटी जी, जीभ और गहरी डालो!” रेखा की उंगलियां मीना की गांड में घुस रही थीं। फिर मैंने मीना को लिटाया और उसकी चूत चोदने लगा, जबकि रेखा मेरे पीछे बैठकर मेरी गांड चाट रही थी। “विकास, तेरी गांड भी स्वादिष्ट है!” तीन घंटे तक हम चोदते रहे। लंड से चूत, मुंह से चूत, गांड से लंड – सब कुछ मिक्स हो गया। रस की नदियां बह रही थीं।
फिल्म की शूटिंग १५ दिन चली। हर रात नई औरत आती, कभी कोई बूढ़ी औरत भी चोदने को तैयार हो जाती। एक बार तो पूरे गांव की ५ औरतें एक साथ आईं। मैं एक-एक करके सबकी चूतें फाड़ता, गांडें मारता, और वो सब हंसते-हंसते कॉमेडी सीन याद करतीं। “ये वाली पोजीशन फिल्म में डाल दो!” रेखा कहती।
आखिरी रात को रेखा और मीना ने मिलकर मुझे नंगा करके बांध दिया। दोनों ने बारी-बारी से मेरे लंड को चूसा, अंडकोष चाटे, फिर एक ने चूत पर बैठकर चोदा, दूसरी ने मुंह में लंड लिया। “ले, अब हम चोद रही हैं!” उनकी चूतें मेरे लंड पर घिस रही थीं, रस टपक रहा था। मैंने जोर से झड़कर दोनों के मुंह भर दिए।
फिल्म बन गई, हिट हुई। लेकिन असली मजा तो गांव की उन चूतों और गांडों में था। अब भी जब “Comedy Movies Based on Remote Village” देखता हूं तो याद आती है रेखा की गर्म चूत और मीना की मोटी गांड। दोस्तों, अगर कभी रिमोट गांव में शूटिंग करो तो याद रखना, वहां औरतें सिर्फ फिल्म नहीं, असली चुदाई भी सिखाती हैं।
(कहानी समाप्त, लेकिन यादें कभी खत्म नहीं होतीं।)