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सुझाव: Hamari Devrani Natak – Gandi Chudai Aur Ras Bhari Masti — देखने योग्य

सुझाव: Hamari Devrani Natak – Gandi Chudai Aur Ras Bhari Masti — देखने योग्य

“सुझाव: Hamari Devrani Natak - Gandi Chudai Aur Ras Bhari Masti — देखने योग्य” हमारी नई कहानी चयन सूची का हिस्सा है। मुख्य जानकारी को जल्दी समझने, पूरी सामग्री देखने और संबंधित श्रेणियों तक पहुंचने के लिए व्यवस्थित किया गया है। सभी विवरण देखने के बाद समान विषय वाली अन्य चुनी हुई प्रविष्टियां भी पढ़ें।

नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम अर्जुन है और मैं दिल्ली के करोल बाग इलाके में रहता हूँ। हमारा परिवार संयुक्त है। मेरे बड़े भाई विक्रम की शादी दो साल पहले हुई थी अनन्या से। अनन्या हमारी देवरानी है, मतलब मेरी भाभी। वो बेहद खूबसूरत है, गोरंग, मोटी-मोटी जांघें, भारी-भारी स्तन जो टी-शर्ट में फटने को तैयार रहते हैं, और गोल-गोल गोलियाँ वाली गांड जो चलते वक्त लहराती रहती है। शुरू से ही मेरी नजर उस पर थी, लेकिन भाई की पत्नी होने के नाते मैं बस सपनों में ही चोदता था। फिर एक दिन ऐसा हुआ कि हमारी देवरानी का नाटक शुरू हो गया और वो नाटक असली चुदाई में बदल गया।

वो शाम का समय था। बारिश हो रही थी और घर में सिर्फ मैं और अनन्या थे। विक्रम ऑफिस से लेट आने वाला था। अनन्या किचन में चाय बना रही थी। उसने हल्का सा नाइट सूट पहना हुआ था जिससे उसकी छाती साफ दिख रही थी। मैं सोफे पर बैठा टीवी देख रहा था। अचानक बिजली चली गई। अंधेरा हो गया। अनन्या चीखी, “अर्जुन, डर लग रहा है!” मैं उठा और उसके पास गया। “कोई बात नहीं भाभी, मोबाइल की टॉर्च जला लेते हैं।” लेकिन जैसे ही मैं उसके पास पहुंचा, उसकी सांसें तेज हो गईं। उसकी आंखों में कुछ और ही नजर आ रहा था।

“अर्जुन, तुम्हें पता है विक्रम मुझे ठीक से नहीं चोदता। वो जल्दी झड़ जाता है।” उसने अचानक ये बोल दिया। मैं स्तब्ध रह गया। “भाभी, ये क्या कह रही हो?” “सच बोल रही हूं। मेरा मन करता है कोई मर्द मुझे जोर से चोदे, मेरी चूत फाड़ दे, गांड में लंड घुसा दे।” उसकी आवाज में गंदगी भरी हुई थी। मैंने हिम्मत करके उसका हाथ पकड़ा। “अनन्या, तुम सच में चाहती हो?” “हां अर्जुन, आज रात तुम मेरे देवर बनकर मुझे चोदो।”

हम दोनों बेडरूम में चले गए। बारिश की आवाज बाहर आ रही थी। अनन्या ने अपना सूट उतार दिया। उसके स्तन ब्रा में कैद थे, निप्पल्स सख्त हो चुके थे। मैंने उसे बिस्तर पर लिटाया और उसके स्तनों को चूसने लगा। “आह्ह्ह अर्जुन, चूसो मेरे बोब्स को, दांतों से काटो!” वो चीख रही थी। मैंने ब्रा उतारी और उसके बड़े-बड़े स्तनों को दोनों हाथों से दबाया। दूध जैसा सफेद रंग, गुलाबी निप्पल्स। मैं चूसता रहा, चाटता रहा। उसकी चूत से पहले ही रस टपकने लगा था।

मैंने उसके पैंटी को खींचा। उसकी चूत बिल्कुल साफ, गुलाबी और फूली हुई थी। बाल नहीं थे। मैंने उंगली डाली तो वो चीख पड़ी, “अरे वाह, मेरी चूत गीली हो गई है तुम्हारे लिए!” मैंने अपनी उंगली अंदर बाहर की, फिर दो उंगलियां। “अर्जुन, अब असली लंड डालो!” मैंने अपना लंड निकाला। वो सात इंच का मोटा लंड था, नसें उभरी हुई, सिरा लाल। अनन्या ने उसे हाथ में लिया और चाटने लगी। “लंड चूसूंगी, पूरा मुंह में लूंगी।” वो गले तक ले गई, थूक से तर कर दिया। “भाभी, तुम्हारा मुंह तो चूत जैसा लग रहा है।”

फिर मैंने उसे उल्टा कर दिया। गांड ऊपर, चूत नीचे। मैंने उसकी गांड चाटी, जीभ से चूत के होठों को चाटा। “आह्ह्ह मादरचोद, चाट मेरी चूत!” वो गंदी गंदी गालियां दे रही थी। मैंने लंड चूत पर रखा और एक जोरदार झटका मारा। “आह्ह्हह!” लंड आधा अंदर घुस गया। उसकी चूत बहुत टाइट थी। मैं धीरे धीरे धक्के मारने लगा। “चोदो मुझे अर्जुन, मेरी चूत फाड़ दो!” हर धक्के के साथ उसकी गांड हिल रही थी। मैंने उसकी कमर पकड़ी और जोर-जोर से चोदने लगा। थप-थप की आवाजें भर रही थीं।

हम पोजीशन बदलते रहे। पहले मिशनरी में, फिर डॉगी स्टाइल में। मैंने उसकी गांड पर थप्पड़ मारे, “ले ले रंडी, मेरी देवरानी रंडी!” “हां, मैं तुम्हारी रंडी हूं, और चोदो!” फिर वो ऊपर चढ़ गई। मेरे लंड पर बैठकर ऊपर नीचे होने लगी। उसके स्तन उछल रहे थे। मैं उन्हें दबा रहा था। “रस निकाल दो मेरी चूत से!” उसकी चूत से सफेद रस निकल रहा था, मेरे लंड पर चिपक रहा था।

हम घंटे भर चोदते रहे। कई बार वो झड़ चुकी थी। आखिर में मैंने उसकी चूत में ही झड़ने का फैसला किया। “अंदर ही डाल दो, गर्भ निरोधक गोली खा रखी है।” मैंने जोर से धक्का मारा और गरम-गरम वीर्य उसकी चूत में भर दिया। वो चीख पड़ी, “आह्ह्ह भर दो, पूरा रस भर दो!”

उसके बाद हम थककर लेट गए। लेकिन रात अभी खत्म नहीं हुई थी। दोबारा हमने चुदाई शुरू की। इस बार गांड में। मैंने उसकी गांड को तेल से चिकना किया और लंड घुसाया। “दर्द हो रहा है, लेकिन मजा भी आ रहा है!” वो चीख रही थी। मैंने धीरे धीरे गांड मारी। फिर तेज।

सुबह तक हम तीन बार चोद चुके थे। अनन्या की चूत और गांड दोनों रस और वीर्य से तर थीं। वो बोली, “अर्जुन, ये हमारा राज रहेगा। जब भी मन करे, चोद लेना।”

इसके बाद से हमारी देवरानी का नाटक रोज का हो गया। विक्रम जब ऑफिस जाता, हम चोदते। किचन में, बाथरूम में, सोफे पर। कभी वो मेरे लंड को चूसती, कभी मैं उसकी चूत चाटता। गंदी गंदी बातें, थप्पड़, बाल खींचना, सब कुछ। उसकी मोटी जांघों के बीच लंड घुसाना, स्तनों को निचोड़ना, सब कुछ याद रहता है।

एक बार बारिश में हम छत पर गए। वो पूरी नंगी, मैंने उसे दीवार से टिका कर चोदा। पानी गिर रहा था, हमारी चुदाई का रस भी। वो चीख रही थी, “और जोर से, पड़ोसियों को पता चल जाए!”

ये कहानी अभी जारी है। हर रात नई पोजीशन, नया मजा। अनन्या अब मेरी पर्सनल चुदक्कड़ देवरानी बन चुकी है। अगर तुम्हें और डिटेल चाहिए तो बताना, लेकिन याद रखना, ये सब सच है और बहुत गंदा।

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