नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम विकास है। मैं दिल्ली से हूँ लेकिन मेरे पापा का गाँव हरियाणा में है। पिछले महीने मुझे गाँव जाना पड़ा क्योंकि शादी का कार्यक्रम था। गाँव में रात के समय देहाती डांस का मंचन हुआ। जब मैंने पहली बार उन देहाती डांस लड़कियों को देखा तो मेरी साँसें रुक गईं। तीन लड़कियाँ थीं – रानी, मीरा और सोनू। सबकी उम्र पच्चीस के आसपास, देहाती अंदाज में चोली-घाघरा पहने, मोटी-मोटी जांघें, भारी स्तन और कमर में घुंघरू बंधे। मंच पर जब वे नाचने लगीं तो उनके स्तन उछल रहे थे, घाघरा ऊपर चढ़ रहा था और पसीने से भीगी कमर चमक रही थी।
मैं पास के अंधेरे में खड़ा होकर देख रहा था। रानी सबसे आगे थी। उसकी चोली इतनी टाइट थी कि उसके बड़े-बड़े स्तन फटने को थे। नाचते-नाचते उसने मुझे देखा और आँख मार दी। कार्यक्रम खत्म होने के बाद सब लोग तितर-बितर हो गए। मैं होटल की तरफ जा रहा था कि रानी ने पीछे से आवाज लगाई, “अरे शहर वाले भाई, अकेले कहाँ जा रहे हो?”
मैं रुका। रानी, मीरा और सोनू तीनों पास आईं। रानी बोली, “रात अभी बाकी है। हमारे साथ थोड़ी देहाती मस्ती करोगे?” मैंने हाँ कर दी। वे मुझे अपने ठिकाने ले गईं – गाँव के बाहर एक पुराना खेत वाला मकान। अंदर घुसते ही रानी ने दरवाजा बंद किया और सीधे मेरे पास आई। “शहर वाले लंड का स्वाद तो आज चखेंगे,” वो बोली और मेरे मुंह में अपनी जुबान डाल दी।
मीरा ने मेरी शर्ट उतारी। सोनू घुटनों के बल बैठ गई और मेरी पैंट खोलकर लंड बाहर निकाल लिया। “अरे वाह, कितना मोटा है!” सोनू चिल्लाई और तुरंत उसे मुँह में ले लिया। उसकी गर्म साँस और गीली जुबान ने मेरा लंड पत्थर जितना सख्त कर दिया। रानी मेरे पीछे आकर मेरी पीठ चूमने लगी, फिर मेरी गांड सहलाती हुई बोली, “आज रात हम तीनों तुम्हें सूखा देंगे।”
मीरा ने अपना घाघरा उतारा। उसकी नंगी गांड और मोटी जांघें सामने थीं। उसकी चूत पहले से ही गीली थी। उसने मुझे बिस्तर पर लिटाया और अपने स्तन मेरे मुंह में ठूंस दिए। “चूसो, चूसो इन मलाई भरे स्तनों को!” मैंने उसके काले-काले निप्पल चूसे, काटे। सोनू अभी भी मेरे लंड चूस रही थी, उसकी लार से मेरा लंड चमक रहा था।
रानी ने अपनी चोली उतारी। उसके स्तन इतने बड़े थे कि दोनों हाथों से भी नहीं पकड़ पाता। उसने मेरे लंड पर बैठने की कोशिश की। “धीरे, रानी, अभी तो शुरूआत है,” मैंने कहा। लेकिन वो नहीं मानी। उसकी चूत गर्म और तंग थी। लंड उसके अंदर घुसते ही वो चीख पड़ी, “अह्ह्ह… मोटा लंड! फाड़ दे मेरी चूत!” मैंने उसके कूल्हे पकड़कर जोर-जोर से ऊपर-नीचे करने लगा। हर धक्के में उसकी चूत से चट-चट की आवाज आ रही थी। पसीना, चूत का रस और मेरी लंड की मलाई मिलकर सब कुछ गीला हो गया।
मीरा ने मेरे मुंह पर अपनी चूत रख दी। “चाटो मेरी चूत, शहर वाले!” मैंने उसकी फूली हुई चूत के होठ चाटे, जीभ अंदर डाली। उसका रस मीठा और नमकीन था। सोनू मेरे अंडकोष चूस रही थी। तीनों लड़कियाँ एक साथ सिसकारियाँ ले रही थीं।
रानी का पहला झड़ाव आ गया। वो जोर से काँपी, “मैं झड़ रही हूँ… अह्ह्ह!” उसकी चूत ने मेरे लंड को और ज्यादा निचोड़ लिया। मैंने उसे नीचे उतारा और मीरा को पीठ के बल लिटा दिया। उसकी टाँगें फैलाईं और लंड सीधा उसकी चूत में घुसा दिया। मीरा चीखी, “हाँ, जोर से चोदो! मेरी देहाती चूत फाड़ दो!” मैंने उसके स्तन दबाते हुए तेज-तेज धक्के मारे। उसकी गांड नीचे से उछल रही थी। सोनू ने मेरी गांड में उंगली डाल दी, “अंदर-बाहर करो, मेरा लंड भी लगेगा!”
रानी अब मेरे पीछे आकर मेरी पीठ पर बैठ गई और अपने स्तन रगड़ने लगी। “अब सोनू की बारी,” मैंने कहा। सोनू को कुत्ते वाली स्टाइल में करवाया। उसकी गांड ऊपर उठाई और लंड उसकी चूत में मारा। सोनू चिल्लाई, “अरे माँ! इतना गहरा! गांड भी मारो!” मैंने उसकी गांड के छेद में अंगूठा डाला। तीनों लड़कियाँ बारी-बारी से चिल्ला रही थीं।
घंटों तक चोदने के बाद मैंने रानी की चूत में झड़ने का फैसला किया। लंड अंदर डाला और जोर से दबाया। गरम-गरम माल उसकी चूत में भर गया। रानी चीखी, “भर दो! सब रस अंदर!” जब लंड बाहर निकाला तो चूत से मेरा माल और उसका रस बह रहा था। मीरा ने तुरंत उसे चाट लिया।
फिर सोनू ने मुझे चूसकर फिर से खड़ा किया। इस बार मीरा की गांड मारी। वो चीखती रही, “गांड फट रही है! लेकिन मत रुको!” घंटे भर की मस्ती के बाद सब थककर गिर गए। सुबह तक हमने तीन-तीन बार चुदाई की। हर बार नई स्टाइल, नया रस।
रानी ने आखिर में कहा, “अगली बार फिर आना, शहर वाले। देहाती डांस लड़कियों का नशा कभी उतरता नहीं।” मैं दिल्ली लौटा लेकिन वो रात मेरे दिमाग में अभी भी ताजा है। उन तीनों की चूत, गांड, स्तन और गंदी गंदी बातें मुझे बार-बार याद आती हैं। अगर कभी गाँव जाओ तो देहाती डांस लड़कियों का शो जरूर देखना, शायद तुम्हें भी ऐसा ही नशा हो जाए।