नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम राहुल है। मैं दिल्ली में रहता हूँ, एक छोटे से फ्लैट में। उम्र मेरी 28 साल है और मैं एक प्राइवेट कंपनी में जॉब करता हूँ। आज मैं आपको अपनी एक सच्ची रोमांटिक और बेहद गंदी चुदाई की कहानी सुनाता हूँ। ये कहानी है मेरी ममी ममथा के साथ। ममथा मेरी असली ममी नहीं, बल्कि मेरी माँ की दूर की रिश्तेदार हैं। वो 38 साल की हैं, शादीशुदा लेकिन पति विदेश में रहता है। ममथा का फिगर देखकर कोई भी लड़का दीवाना हो जाए। उनकी साइज 38-30-40 है, भारी-भारी स्तन, गोल-गोल और कसे हुए, जिनमें काले-काले निप्पल हैं। उनकी गांड इतनी मोटी और उभरी हुई कि जब वो चलती हैं तो लहराती हुई लगती है। उनकी चूत हमेशा गीली रहती है, जैसे कोई रसीला फल।
ममथा अक्सर हमारे घर आती रहती थीं क्योंकि उनकी सास के साथ झगड़ा हो गया था। एक दिन बारिश में वो हमारे फ्लैट में रुक गईं। मैं अकेला था घर पर। माँ-बाप शादी में गए थे। शाम को बारिश तेज हो गई। ममथा ने गीले कपड़े बदले तो मुझे उनकी ब्रा और पैंटी साफ दिख गई। वो हल्का सा मुस्कुराईं और बोलीं, “राहुल, क्या देख रहा है? ममी को ऐसे मत घूर।” लेकिन उनकी आवाज में कुछ और ही था।
रात को हम दोनों एक साथ सोने लगे। बिस्तर छोटा था। ममथा ने साड़ी उतारकर सिर्फ पेटीकोट और ब्लाउज में लेटीं। उनकी सांसें तेज थीं। मैंने हिम्मत करके पूछा, “ममथा, आपकी शादी में सुख है?” वो चुप रहीं, फिर बोलीं, “नहीं राहुल, तेरे मामा तो साल भर विदेश रहते हैं। मेरी चूत सूख गई है बेटा।” ये सुनकर मेरा लंड खड़ा हो गया। 8 इंच का मोटा लंड जो उनकी चूत के लिए बिल्कुल परफेक्ट था।
मैंने धीरे से उनका हाथ पकड़ा और बोला, “ममथा, मैं आपकी मदद कर सकता हूँ।” वो हंस पड़ीं और बोलीं, “चल, आज रात तू मुझे चोद।” मैंने तुरंत उनका ब्लाउज खोला। उनके स्तन बाहर निकल आए, भारी और दूधिया रंग के। निप्पल सख्त हो चुके थे। मैंने एक स्तन मुंह में लिया और चूसने लगा। ममथा सिसकारियां मारने लगीं, “आह्ह्ह… राहुल, चूस ले मेरा दूध… तेरी ममी की चूचियां तेरे लिए हैं।” मैं दूसरे स्तन को हाथ से दबा रहा था। दूध जैसा रस नहीं निकला लेकिन उनकी सांसें और तेज हो गईं।
फिर मैंने उनका पेटीकोट नीचे किया। उनकी चूत पूरी तरह गंजी थी, होंठ मोटे और गुलाबी, बीच में एक छोटा सा छेद जिससे चमकदार रस टपक रहा था। मैंने उंगली डाली तो ममथा चीख पड़ी, “उफ्फ्फ… राहुल, उंगली मत डाल, सीधा अपना लंड घुसा दे।” लेकिन मैंने पहले जीभ से चाटना शुरू किया। उनकी चूत का स्वाद खट्टा-मीठा था। मैंने क्लिट को चूसा और अंदर जीभ घुमाई। ममथा मेरे सिर को दबा रही थीं, “हां… और चाट… मेरी चूत खा ले पूरी… आह्ह्ह… मैं झड़ने वाली हूँ।” थोड़ी देर में उनका शरीर कांपने लगा और गरम-गरम रस मेरे मुंह में छूट गया।
अब बारी मेरे लंड की थी। ममथा ने मेरी पैंट खोली और मेरा लंड देखकर बोलीं, “वाah, इतना मोटा और लंबा! आज तेरी ममी की चूत फट जाएगी।” उन्होंने लंड मुंह में लिया और चूसने लगीं। उनकी जीभ लंड के नीचे घूम रही थी, लार टपक रही थी। “गले तक ले ले ममथा,” मैंने कहा। वो गले तक ले गईं, आंखों से आंसू आ गए लेकिन रुकें नहीं। 10 मिनट चूसने के बाद मैं बोला, “अब चोदूं?”
ममथा ने लेटकर टांगें फैला दीं। मैंने लंड उनकी चूत पर रखा और एक झटके में आधा घुसा दिया। “आह्ह्ह… मर गई… धीरे राहुल… तेरी ममी की चूत तंग है,” वो चिल्लाईं। मैंने धीरे-धीरे पूरे 8 इंच अंदर डाल दिए। उनकी चूत गर्म और गीली थी, दीवारें लंड को कस रही थीं। मैंने जोर-जोर से धक्के मारने शुरू किए। “चोद… चोद मुझे… तेरी ममी को रंडी बना दे,” ममथा चीख रही थीं। हर धक्के के साथ उनकी भारी गांड हिल रही थी। मैंने उनकी गांड थपथपाई, “कितनी मोटी गांड है तेरी ममथा, आज इसको भी चोदूंगा।”
हमने 20 मिनट तक मिशनरी पोजीशन में चोदा। ममथा बार-बार झड़ रही थीं। फिर मैंने उन्हें कुत्ते वाली पोजीशन में कर दिया। गांड ऊपर करके। मैंने लंड पीछे से घुसाया। “आह्ह्ह… गहरे… और गहरा… मेरी चूत फाड़ दे,” वो बोल रही थीं। मैंने उनकी कमर पकड़कर जोर से चोदा। लंड और चूत की टकराहट की आवाज पूरे कमरे में गूंज रही थी। “प्लच… प्लच… प्लच…” हर धक्के के साथ ममथा की चूत से रस निकल रहा था।
मैंने लंड बाहर निकाला और उनकी गांड में उंगली डाली। “नहीं राहुल, गांड मत मार… अभी नहीं,” वो बोलीं लेकिन मैंने थूक लगाकर लंड गांड में घुसा दिया। “आह्ह्ह… दर्द हो रहा… लेकिन अच्छा लग रहा है… चोद मेरी गांड,” ममथा ने खुद कहा। गांड की दीवारें लंड को और ज्यादा कस रही थीं। 15 मिनट बाद मैंने चीखते हुए कहा, “ममथा, मैं झड़ने वाला हूँ।” “अंदर ही छोड़… मेरी चूत में अपना गरम रस भर दे,” वो बोलीं। मैंने लंड चूत में डाला और जोर से झड़ गया। गरम-गरम वीर्य उनकी चूत भर गया, बाहर निकलकर टपकने लगा।
हम दोनों पसीने से लथपथ हो गए। ममथा ने मुझे चूमा और बोलीं, “राहुल, ये रोमांस अब रोज चलेगा।” पूरी रात हमने तीन बार और चोदा। सुबह तक उनकी चूत और गांड दोनों लाल हो चुकी थीं। ममथा ने कहा, “अब से तू मेरा लवर है। जब चाहे चोदना।”
ये कहानी यहीं खत्म नहीं होती। अगले हफ्ते हमने होटल में पूरी रात सेक्स किया। ममथा ने लिंग चूसते-चूसते कहा, “तेरा लंड मेरी जान है।” हमारी चुदाई अब भी चल रही है। दिल्ली की गर्मियों में जब बारिश आती है, हम दोनों नंगे होकर चोदते हैं। ममथा की चूत अब कभी सूखती नहीं, क्योंकि मेरा लंड हमेशा तैयार रहता है।
(कहानी पूरी हुई, लेकिन याद रखना दोस्तों, ये सिर्फ फिक्शन है। असल जिंदगी में हमेशा सहमति और सुरक्षा का ध्यान रखें।)