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विशेष: Suman New Dehati Lokgeet Wali Dehati Chudai

विशेष: Suman New Dehati Lokgeet Wali Dehati Chudai

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नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम राहुल है। मैं उत्तर प्रदेश के एक छोटे से कस्बे में रहता हूँ। उम्र मेरी ३२ साल है और मैं लोकल स्कूल में टीचर हूँ। रोज़ की ज़िंदगी में कुछ खास नहीं था, लेकिन पिछले महीने कुछ ऐसा हुआ कि अब तक याद करके लंड खड़ा हो जाता है। बात शुरू हुई सुमन से। सुमन हमारी गली की २८ साल की औरत है, जिसकी शादी दो साल पहले हुई थी लेकिन पति बाहर काम करता है। वो नई-नई देहाती लोकगीत गाती है, खासकर शादी-ब्याह और होली के मौसम में। उसकी आवाज़ में एक अलग ही मादकता है, जैसे गाने गाते-गाते वो किसी को अपनी चूत में समा ले।

एक शाम बारिश हो रही थी। मैं स्कूल से लौट रहा था जब सुमन ने मुझे बुलाया। “राहुल भाई, अंदर आओ ना, नया लोकगीत सुनाती हूँ।” उसने लाल रंग की साड़ी पहनी हुई थी, जिसके नीचे से उसकी मोटी गांड साफ दिख रही थी। मैं अंदर गया। घर में कोई नहीं था। उसने गाना शुरू किया – “नया देहाती लोकगीत” जो उसने हाल ही में सीखा था। गाते-गाते वो झूम रही थी, उसके बड़े-बड़े स्तन साड़ी के ब्लाउज में उछल रहे थे। मैं बैठा देख रहा था और मेरा लंड धीरे-धीरे तन रहा था।

गाना खत्म करके सुमन मुस्कुराई और बोली, “कैसा लगा राहुल? और भी सुनाऊँ?” मैंने कहा, “बहुत अच्छा लगा, लेकिन तुम्हारी आवाज़ सुनकर कुछ और ही ख्याल आ रहे हैं।” वो हँसी और पास आ गई। “क्या ख्याल?” मैंने सीधा जवाब दिया, “तुम्हारी चूत चोदने का।” सुमन शर्मा गई लेकिन आँखों में चमक आ गई। “अरे वाह, इतना सीधा? पति तो महीनों से नहीं आया।”

उसने साड़ी का पल्लू गिरा दिया। उसके भारी स्तन ब्लाउज में कैद थे, निप्पल साफ उभरे हुए। मैंने हाथ बढ़ाया और एक स्तन दबाया। “कितने बड़े हैं तेरे बोबे सुमन।” वो सिसकारियाँ लेने लगी। “दबाओ और, मेरा पति कभी नहीं दबाता।” मैंने ब्लाउज के हुक खोले। दोनों स्तन बाहर निकल आए, काले-काले निप्पल। मैंने एक को मुँह में लिया और चूसने लगा। सुमन का हाथ मेरे लंड पर गया। “अरे वाह, कितना मोटा है तेरा लंड।”

वो घुटनों के बल बैठ गई और मेरी पैंट खोलकर लंड बाहर निकाला। “कितना बड़ा और काला है।” उसने जीभ से चाटा, फिर पूरा मुँह में ले लिया। “चूस सुमन, मेरे लंड का रस पी।” वो जोर-जोर से चूस रही थी, थूक गिर रहा था। मैंने उसके बाल पकड़कर मुँह चोदना शुरू किया। “ले, गला तक ले।” वो गले तक ले रही थी, आँखों से आँसू आ रहे थे लेकिन मुँह से खुशी के शोर निकल रहे थे।

फिर मैंने उसे बिस्तर पर लिटाया। साड़ी ऊपर उठाई, पेटीकोट खोला। उसकी चूत बालों से भरी थी, मोटी और गुलाबी। “कितनी गीली है तेरी चूत।” मैंने उंगली डाली। “आह्ह… राहुल, उंगली मत, सीधा लंड डाल।” मैंने लंड उसकी चूत पर रगड़ा। “बोल, चोदूँ?” “हाँ, जोर से चोद।”

मैंने एक झटके में पूरा लंड अंदर घुसा दिया। “आह्ह्ह… मर गई!” सुमन चीखी। मैं धीरे-धीरे चोदने लगा, फिर रफ्तार बढ़ाई। “तेरी चूत कितनी टाइट है सुमन।” वो दोनों हाथों से मेरी पीठ खींच रही थी। “और जोर से, मेरी गांड भी मार।” मैंने उसे उल्टा कर दिया, गांड ऊपर उठाई। उसकी गांड के छेद पर थूक लगाया और लंड घुसाया। “आह्ह… गांड फट गई!” वो चिल्ला रही थी लेकिन पीछे धक्का मार रही थी। मैं गांड मारते-मारते उसके स्तन दबा रहा था।

हम दोनों पसीने से तर हो चुके थे। मैंने उसे फिर सामने से चोदा, इस बार और गहराई से। “रस निकाल दूँगा तेरी चूत में।” “हाँ, भर दो।” आखिर में मैंने जोर का झटका मारा और सारा माल उसकी चूत में छोड़ दिया। सुमन का शरीर काँप रहा था। “मैं भी झड़ गई।”

हम थोड़ी देर लेटे रहे। फिर सुमन ने फिर से गाना शुरू किया, लेकिन इस बार नंगी हालत में। “नया देहाती लोकगीत” गाते हुए वो फिर मेरे लंड को हाथ में लेकर सहला रही थी। “अभी और चोदोगे?” मैंने कहा, “रात भर।”

दूसरे राउंड में मैंने उसे दीवार से टिका कर चोदा। उसके स्तन दीवार से रगड़ खा रहे थे। “तेरी चूत का रस मेरे लंड पर चिपक रहा है।” सुमन बोल रही थी, “चोद, चोद, मुझे अपनी रखैल बना ले।” हमने तीन बार और चोदा, हर बार अलग पोजीशन में – कुतिया वाली, ऊपर बैठकर, और ६९ में। हर बार वो नया लोकगीत गाती, जिससे मेरा लंड और सख्त होता।

अंत में सुबह होने को आई तो सुमन ने कहा, “अब रोज आना, नया-नया लोकगीत सुनाऊँगी और चुदवाऊँगी।” मैंने वादा किया। तब से हर हफ्ते हम मिलते हैं। सुमन का नया देहाती लोकगीत अब मेरे लिए सबसे बड़ी कामुकता बन गया है। उसकी चूत, गांड, बोबे और गंदी बातें मुझे दीवाना बना चुकी हैं।

(कहानी यहीं खत्म नहीं होती, दोस्तों। सुमन के साथ हर मुलाकात नई होती है, नया गाना, नई चुदाई। लेकिन इतना ही काफी है आज के लिए।)

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